मात्रक एवं मापन
(Units and Measurement)
परिचय -
सितंबर 1999 में NASA का Mars Climate Orbiter मंगल की कक्षा में पहुँचने से ठीक पहले खो गया। वजह कोई बड़ी तकनीकी खराबी नहीं थी, बस एक मात्रक की गड़बड़ी थी: एक टीम का सॉफ़्टवेयर थ्रस्टर के आँकड़े पाउंड-फ़ोर्स सेकंड में दे रहा था, जबकि दूसरी टीम उन्हें न्यूटन-सेकंड मानकर चल रही थी। करीब 125 मिलियन डॉलर का मिशन इसी भूल की भेंट चढ़ गया।
यही मात्रक एवं मापन का असली मतलब है: संख्या के साथ सही इकाई न हो, तो संख्या का कोई अर्थ नहीं।
परीक्षा की नज़र से यह भौतिकी का सबसे ‘सस्ता’ अध्याय है। SSC, रेलवे और राज्य PSC जैसी परीक्षाओं में यहाँ से ज़्यादातर सीधे तथ्य पूछे जाते हैं (कौन सा मात्रक किसे मापता है, SI में कितने मूल मात्रक हैं)। NDA/CDS और JEE/NEET में गणना वाले सवाल आते हैं (विमीय सूत्र, त्रुटि, सार्थक अंक)। यह गाइड दोनों तरह के पाठकों के लिए है। हर हिस्से के अंत में परीक्षा पॉइंट दिया है, ताकि आप सिर्फ वही याद करें जो काम आता है।
5 बातें जो हर हाल में याद रखें
- SI में 7 मूल मात्रक हैं: मीटर, किलोग्राम, सेकंड, ऐम्पियर, केल्विन, मोल, कैंडेला।
- 20 मई 2019 से ये सातों मात्रक प्रकृति के निश्चित स्थिरांकों से परिभाषित हैं। किलोग्राम अब प्लांक स्थिरांक पर टिका है, पेरिस के बेलन पर नहीं।
- रेडियन और स्टेरेडियन को पुरानी किताबें ‘पूरक मात्रक’ कहती हैं, पर 1995 से इन्हें विमाहीन व्युत्पन्न मात्रक माना जाता है।
- कार्य, ऊर्जा और बल-आघूर्ण की विमा समान है: [ML²T⁻²]।
- परिशुद्धता ≠ यथार्थता। परिशुद्ध माप आपस में मेल खाते हैं, यथार्थ माप सही मान के पास होते हैं।
मात्रक
एवं मापन क्या है?
किसी चीज़ को नापने का मतलब है उसकी तुलना किसी तय मानक से करना। जब आप कहते हैं कि तार की लंबाई 3 मीटर है, तो आप कह रहे हैं कि तार उस मानक ‘एक मीटर’ से तीन गुना है। इस तुलना की प्रक्रिया को मापन (Measurement) कहते हैं और जिस मानक से तुलना होती है, उसे मात्रक (Unit)।
जिन चीज़ों को नापा जा सकता है, जैसे लंबाई, समय, बल, ताप, उन्हें भौतिक राशि (Physical Quantity) कहते हैं। प्यार, सुंदरता या ईमानदारी को नापा नहीं जा सकता, इसलिए ये भौतिक राशियाँ नहीं हैं।
हर माप के दो हिस्से होते हैं:
भौतिक राशि (Q) = संख्यात्मक मान (n) × मात्रक (u)
यहाँ एक रोचक बात है: मात्रक बदलने पर संख्या उलटी दिशा में बदलती है। 2 मीटर को सेंटीमीटर में लिखें तो 200 हो जाता है, क्योंकि मात्रक सौ गुना छोटा हुआ तो संख्या सौ गुना बड़ी। इसे n₁u₁ = n₂u₂ लिखा जाता है, और सारे मात्रक-रूपांतरण इसी पर टिके हैं।
हमारे पुरखे भी मापते थे, पर हाथ, बालिश्त और कदम से। दिक्कत यह थी कि हर आदमी का हाथ अलग होता है, इसलिए हर बाज़ार में लंबाई अलग निकलती थी। एक अच्छे मात्रक में ये पाँच गुण होने चाहिए:
- सुपरिभाषित: उसकी परिभाषा स्पष्ट हो।
- अपरिवर्तनशील: समय, ताप या स्थान के साथ न बदले।
- पुनरुत्पादनीय: दुनिया में कहीं भी दोबारा बनाया जा सके।
- सुविधाजनक: आकार इतना हो कि रोज़ के कामों में प्रयोग हो सके।
- अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त: सब देश उसे अपनाएँ।
परीक्षा पॉइंट: ‘अच्छे मात्रक के गुण’ बार-बार
पूछा जाने वाला छोटा प्रश्न है। साथ ही याद रखें कि मात्रक बड़ा होगा तो संख्या
छोटी होगी। इसी से ‘10 m/s को km/h में बदलो’ जैसे सवाल हल होते हैं (10 × 18/5 =
36 km/h)।
भारत में यूरोपियों का आगमन.
मात्रक प्रणालियाँ
अलग-अलग देशों और क्षेत्रों ने अलग-अलग मात्रक चुन लिए थे, इसीलिए कई प्रणालियाँ बनीं:
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प्रणाली |
लंबाई |
द्रव्यमान |
समय |
कहाँ दिखती है |
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CGS |
सेंटीमीटर |
ग्राम |
सेकंड |
पुरानी किताबें, कुछ प्रयोगशालाएँ |
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FPS |
फुट |
पाउंड |
सेकंड |
ब्रिटिश/अमेरिकी इंजीनियरिंग |
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MKS |
मीटर |
किलोग्राम |
सेकंड |
यांत्रिकी, SI की नींव |
|
SI |
7 मूल मात्रक |
पूरी दुनिया का वैज्ञानिक मानक |
इस बँटवारे की कीमत अक्सर बहुत बड़ी होती है। 1983 में Air Canada की एक उड़ान (‘Gimli Glider’) के ईंधन की गणना में पाउंड और किलोग्राम का घालमेल हो गया। ज़रूरत से काफी कम ईंधन भरा गया, और बीच हवा में ईंधन खत्म हो गया। पायलटों ने विमान को ग्लाइड कराकर सुरक्षित उतार लिया, पर यह घटना मात्रकों के मानकीकरण की सबसे चर्चित मिसाल बन गई।
इसीलिए 1960 में अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली (SI, Système International d'Unités) अपनाई गई। इसकी देखरेख BIPM (अंतरराष्ट्रीय माप-तौल ब्यूरो) करता है और फ़ैसले CGPM (माप-तौल पर आम सम्मेलन) में होते हैं।
भारत में: भारत ने 1956 के Standards of Weights and Measures Act के ज़रिए मीट्रिक प्रणाली अपनाई, जो चरणबद्ध तरीके से लागू हुई। आज वैधानिक माप-तौल का काम Legal Metrology Act, 2009 के तहत चलता है। देश के राष्ट्रीय मापन मानकों का रखरखाव दिल्ली स्थित CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL) करती है। भारतीय मानक समय (IST) भी वहीं से तय और प्रसारित होता है।
रूपांतरण जो हर बार काम आते हैं:
- 1 न्यूटन (N) = 10⁵ डाइन (CGS में बल)
- 1 जूल (J) = 10⁷ अर्ग (CGS में कार्य/ऊर्जा)
- 1 पास्कल (Pa) = 10 डाइन/सेमी²
- 1 बार = 10⁵ Pa; 1 वायुमंडल (atm) ≈ 1.013 × 10⁵ Pa
उदाहरण: 5 जूल कार्य CGS में कितना होगा? 5 × 10⁷ = 5 × 10⁷ अर्ग।
परीक्षा पॉइंट: SI की शुरुआत 1960 से मानी जाती है। ‘1 N = कितने डाइन’ और ‘1 J = कितने
अर्ग’ SSC/रेलवे स्तर पर दोहराए जाने वाले तथ्य हैं। ‘CGS में बल का मात्रक’ पूछा
जाए तो उत्तर डाइन है, न्यूटन नहीं।
भारतीय राजव्यवस्था का महत्वपूर्ण टॉपिक: संघीय प्रणाली.
SI के 7 मूल मात्रक
SI की पूरी इमारत सात मूल मात्रकों पर खड़ी है। बाकी सारे मात्रक इन्हीं से
बनते हैं।
|
भौतिक राशि |
SI मात्रक |
संकेत |
2019 के बाद परिभाषा का आधार |
|
लंबाई |
मीटर |
m |
निर्वात में प्रकाश की चाल c = 299,792,458 m/s |
|
द्रव्यमान |
किलोग्राम |
kg |
प्लांक स्थिरांक h = 6.62607015 × 10⁻³⁴ J·s |
|
समय |
सेकंड |
s |
सीज़ियम-133 की अति-सूक्ष्म संक्रमण आवृत्ति = 9,192,631,770 Hz |
|
विद्युत धारा |
ऐम्पियर |
A |
मूल आवेश e = 1.602176634 × 10⁻¹⁹ C |
|
ताप |
केल्विन |
K |
बोल्ट्ज़मान स्थिरांक k = 1.380649 × 10⁻²³ J/K |
|
पदार्थ की मात्रा |
मोल |
mol |
आवोगाद्रो संख्या = 6.02214076 × 10²³ प्रति मोल |
|
ज्योति तीव्रता |
कैंडेला |
cd |
540 THz विकिरण की ज्योति दक्षता = 683 lm/W |
अब 2019 वाला बदलाव। 20 मई 2019 (विश्व मापविज्ञान दिवस) से सभी मात्रक निश्चित प्राकृतिक स्थिरांकों के आधार पर परिभाषित हैं। इससे पहले किलोग्राम फ़्रांस के सेव्रे (Sèvres) में रखे प्लैटिनम-इरिडियम के एक बेलन से परिभाषित होता था, जो किसी भौतिक वस्तु पर टिका आख़िरी मात्रक था। समस्या यह थी कि कोई भी धातु का टुकड़ा खरोंच या धूल से बदल सकता है, जबकि प्लांक स्थिरांक नहीं बदलता।
पुरानी परिभाषाएँ भी जान लें, क्योंकि पुरानी किताबों और कुछ परीक्षा-प्रश्नों में वही मिलती हैं:
- किलोग्राम: अंतरराष्ट्रीय प्रोटोटाइप बेलन का द्रव्यमान।
- केल्विन: जल के त्रिक बिंदु (273.16 K) के ताप का 1/273.16 भाग।
- मोल: 12 ग्राम (0.012 kg) कार्बन-12 में जितने परमाणु हों, उतने कण।
- ऐम्पियर: दो समांतर तारों के बीच लगने वाले बल पर आधारित।
याद रखने की एक ट्रिक: संकेतों का क्रम m, kg, s, A, K, mol, cd है। इसे अंग्रेज़ी के इस वाक्य से रट लें: My Kid Sings And Keeps Making Cakes।
परीक्षा पॉइंट: UPSC और PSC में ‘कथन सही/गलत’
वाले प्रश्न आते हैं, जैसे ‘किलोग्राम अब प्लांक स्थिरांक से परिभाषित है’ (सही)
और ‘किलोग्राम अब भी पेरिस के बेलन से परिभाषित है’ (गलत)। अगर प्रश्न ‘पहले क्या
था’ पूछे, तो पुरानी परिभाषा ही उत्तर है। और ध्यान दें: द्रव्यमान का SI मात्रक किलोग्राम है,
ग्राम नहीं। यह मूल मात्रकों में अकेला है जिसके नाम में पहले से उपसर्ग ‘किलो’
जुड़ा है।
पूरा आर्टिकल पढ़ें:भारत में संसदीय प्रणाली.
व्युत्पन्न मात्रक और पूरक मात्रक
मूल मात्रकों को गुणा-भाग करके जो मात्रक बनते हैं, उन्हें व्युत्पन्न मात्रक (Derived Units) कहते हैं। वेग = दूरी ÷ समय, इसलिए उसका मात्रक m/s है और उसका कोई अलग नाम नहीं। पर कुछ राशियाँ इतनी इस्तेमाल होती हैं कि उनके मात्रकों को अपना नाम मिल गया, और ज़्यादातर नाम वैज्ञानिकों के नाम पर हैं।
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राशि |
मात्रक |
संकेत |
मूल मात्रकों में |
|
बल |
न्यूटन |
N |
kg·m·s⁻² |
|
दाब |
पास्कल |
Pa |
N/m² = kg·m⁻¹·s⁻² |
|
कार्य / ऊर्जा |
जूल |
J |
N·m = kg·m²·s⁻² |
|
शक्ति |
वाट |
W |
J/s = kg·m²·s⁻³ |
|
आवृत्ति |
हर्ट्ज़ |
Hz |
s⁻¹ |
|
विद्युत आवेश |
कूलॉम |
C |
A·s |
|
विभवांतर |
वोल्ट |
V |
J/C |
|
प्रतिरोध |
ओम |
Ω |
V/A |
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धारिता |
फैराड |
F |
C/V |
|
चुंबकीय फ्लक्स |
वेबर |
Wb |
V·s |
|
चुंबकीय क्षेत्र |
टेस्ला |
T |
Wb/m² |
एक उलझन जो लगभग हर विद्यार्थी को होती है: द्रव्यमान और भार एक नहीं हैं। 60 kg का व्यक्ति पृथ्वी पर लगभग 60 × 9.8 ≈ 588 N के बल से खिंचता है। चंद्रमा पर g लगभग 1.6 m/s² है, तो वही व्यक्ति करीब 96 N का भार महसूस करेगा। द्रव्यमान दोनों जगह 60 kg ही रहेगा। इसीलिए भार बल है और उसका मात्रक न्यूटन है, किलोग्राम नहीं।
पूरक मात्रक (Supplementary Units) की कहानी थोड़ी अलग है। रेडियन (समतल कोण) और स्टेरेडियन (ठोस कोण) दोनों दो समान विमा वाली राशियों के अनुपात हैं: रेडियन = चाप ÷ त्रिज्या, स्टेरेडियन = क्षेत्रफल ÷ त्रिज्या²। इसलिए इनकी कोई विमा नहीं होती। SI की शुरुआती व्यवस्था में मूल, पूरक और व्युत्पन्न, तीन श्रेणियाँ थीं। 1995 में CGPM ने पूरक श्रेणी हटा दी और इन दोनों को विमाहीन व्युत्पन्न मात्रक घोषित कर दिया। फिर भी कई पुरानी किताबें और गाइड अब भी ‘7 मूल + 2 पूरक’ पढ़ाते हैं।
परीक्षा पॉइंट: अगर प्रश्न ‘SI के दो पूरक मात्रक’ पूछे और विकल्पों में रेडियन-स्टेरेडियन
हों, तो वही चुनें, क्योंकि प्रश्न-निर्माता अक्सर पुरानी किताब से चलते हैं। पर
कथन-आधारित प्रश्न में ‘पूरक श्रेणी अब समाप्त है’ वाला कथन सही माना जाएगा। और
याद रखें: 2π रेडियन = 360°, यानी 1 रेडियन ≈ 57.3°; साथ ही पूरे गोले का ठोस कोण 4π
स्टेरेडियन होता है। न्यूटन, वाट जैसे नाम लिखते समय छोटे अक्षर और संकेत में बड़ा
अक्षर (N, W) लगता है, यह भी पूछा जा चुका एक तथ्य है।
ब्लॉग “पंचवर्षीय योजनाएँ”.
महत्वपूर्ण मात्रक और उनसे मापी जाने वाली राशियाँ
SSC, रेलवे और राज्य PSC में सबसे ज़्यादा सीधे अंक यहीं से आते हैं। नीचे की तालिका को ‘मात्रक → राशि → एक अतिरिक्त तथ्य’ के क्रम में पढ़ें, क्योंकि प्रश्न अक्सर अतिरिक्त तथ्य पर ही घुमाया जाता है।
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मात्रक |
मापी जाने वाली राशि |
याद रखने लायक तथ्य |
|
बेल / डेसीबल |
ध्वनि की तीव्रता (प्रबलता स्तर) |
1 बेल = 10 डेसीबल |
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फैदम |
जल की गहराई |
1 फैदम = 6 फुट ≈ 1.83 m |
|
नॉट |
जहाज़/विमान की गति |
1 नॉट = 1 नौटिकल मील प्रति घंटा ≈ 1.852 km/h |
|
नौटिकल मील |
समुद्री दूरी |
1 नौटिकल मील = 1852 m |
|
डाइन |
बल (CGS) |
1 N = 10⁵ डाइन |
|
अर्ग |
कार्य/ऊर्जा (CGS) |
1 J = 10⁷ अर्ग |
|
कैलोरी |
ऊष्मा |
1 कैलोरी ≈ 4.18 J |
|
इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) |
ऊर्जा (परमाणु स्तर) |
1 eV ≈ 1.6 × 10⁻¹⁹ J |
|
किलोवाट-घंटा (kWh) |
ऊर्जा |
बिजली बिल की ‘एक यूनिट’; 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J |
|
हॉर्स पावर |
शक्ति |
1 hp ≈ 746 W |
|
बार |
वायुमंडलीय दाब |
1 बार = 10⁵ Pa |
|
पॉइज़ |
श्यानता (CGS) |
SI में Pa·s |
|
गॉस |
चुंबकीय क्षेत्र (CGS) |
1 T = 10⁴ गॉस |
|
टेस्ला |
चुंबकीय क्षेत्र (SI) |
वेबर/मीटर² |
|
वेबर |
चुंबकीय फ्लक्स |
|
|
हेनरी |
प्रेरकत्व |
|
|
फैराड |
विद्युत धारिता |
|
|
सीमेंस |
विद्युत चालकता |
ओम का व्युत्क्रम |
|
कैंडेला |
ज्योति तीव्रता |
SI का मूल मात्रक |
|
ल्यूमेन |
ज्योति फ्लक्स |
|
|
लक्स |
रोशनी (illuminance) |
ल्यूमेन/मीटर² |
|
डायोप्टर |
लेंस की क्षमता |
P = 1/f (f मीटर में) |
|
बेकुरल |
रेडियोधर्मिता (SI) |
पुराना मात्रक: क्यूरी, 1 Ci = 3.7 × 10¹⁰ Bq |
|
ग्रे / सीवर्ट |
विकिरण की अवशोषित / तुल्य मात्रा |
|
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मोल |
पदार्थ की मात्रा |
SI का मूल मात्रक |
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कैरेट |
रत्नों का द्रव्यमान |
1 कैरेट = 200 mg |
|
क्विंटल / मीट्रिक टन |
द्रव्यमान |
100 kg / 1000 kg |
|
लीटर |
आयतन |
1 L = 10⁻³ m³ |
दूरी और आकार के विशेष मात्रक अलग से याद करें, क्योंकि इनके सवाल गणना वाले भी बनते हैं:
|
मात्रक |
मान |
कहाँ काम आता है |
|
एंगस्ट्रॉम (Å) |
10⁻¹⁰ m |
परमाणु का आकार, प्रकाश की तरंगदैर्ध्य |
|
फर्मी (fm) |
10⁻¹⁵ m |
नाभिक का आकार |
|
माइक्रॉन (µm) |
10⁻⁶ m |
सूक्ष्म जीव, तार की मोटाई |
|
खगोलीय इकाई (AU) |
≈ 1.496 × 10¹¹ m |
पृथ्वी–सूर्य की औसत दूरी |
|
प्रकाश वर्ष |
≈ 9.46 × 10¹⁵ m |
तारों और आकाशगंगाओं की दूरी |
|
पारसेक |
≈ 3.26 प्रकाश वर्ष ≈ 3.09 × 10¹⁶ m |
खगोल विज्ञान |
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बार्न |
10⁻²⁸ m² |
नाभिकीय अभिक्रिया का अनुप्रस्थ काट (क्षेत्रफल) |
और यह सूची उन मात्रकों की है जो वैज्ञानिकों के नाम पर हैं, जो ‘किसके नाम पर’ वाले प्रश्नों के लिए काम आती है:
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मात्रक |
किसके नाम पर |
|
न्यूटन |
आइज़क न्यूटन |
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जूल |
जेम्स प्रेस्कॉट जूल |
|
वाट |
जेम्स वाट |
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पास्कल |
ब्लेज़ पास्कल |
|
हर्ट्ज़ |
हाइनरिक हर्ट्ज़ |
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कूलॉम |
चार्ल्स-ऑगस्टिन डी कूलॉम |
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वोल्ट |
एलेसांड्रो वोल्टा |
|
ओम |
जॉर्ज साइमन ओम |
|
ऐम्पियर |
आंद्रे-मैरी ऐम्पियर |
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फैराड |
माइकल फैराडे |
|
हेनरी |
जोसेफ़ हेनरी |
|
टेस्ला |
निकोला टेस्ला |
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वेबर |
विल्हेल्म वेबर |
|
केल्विन |
लॉर्ड केल्विन (विलियम थॉमसन) |
|
बेकुरल |
हेनरी बेकुरल |
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बेल |
अलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल |
|
सीमेंस |
वर्नर वॉन सीमेंस |
परीक्षा पॉइंट: तीन जाल सबसे ज़्यादा काम करते हैं। पहला, प्रकाश वर्ष समय
नहीं, दूरी की इकाई है। दूसरा, रिक्टर स्केल मात्रक नहीं, पैमाना है,
इसलिए ‘रिक्टर किसका मात्रक है’ जैसे विकल्प में सही उत्तर ‘कोई नहीं’ हो सकता है।
तीसरा, किलोवाट-घंटा और लीटर SI के मात्रक नहीं, स्वीकार्य मात्रक हैं:
ऊर्जा का SI मात्रक जूल है और आयतन का घन मीटर। इसके अलावा बल-आघूर्ण का मात्रक
N·m है, पर उसे ‘जूल’ नहीं कहा जाता, भले ही दोनों की विमा समान हो।
जानिए प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों के बारे में एक आसान और interesting तरीके से।
मात्रकों के गुणक और उपसर्ग (Prefixes)
हर बार नया मात्रक बनाने की जगह SI में 10 की घात दर्शाने वाले उपसर्ग लगते हैं। 1000 मीटर को ‘किलो-मीटर’ कहना इसी का उदाहरण है।
|
उपसर्ग |
संकेत |
गुणक |
उपसर्ग |
संकेत |
गुणक |
|
टेरा |
T |
10¹² |
पिको |
p |
10⁻¹² |
|
गीगा |
G |
10⁹ |
नैनो |
n |
10⁻⁹ |
|
मेगा |
M |
10⁶ |
माइक्रो |
µ |
10⁻⁶ |
|
किलो |
k |
10³ |
मिली |
m |
10⁻³ |
|
हेक्टो |
h |
10² |
सेंटी |
c |
10⁻² |
|
डेका |
da |
10¹ |
डेसी |
d |
10⁻¹ |
इनके अलावा पेटा (P, 10¹⁵), एक्सा (E, 10¹⁸), ज़ेटा (Z, 10²¹), योटा (Y, 10²⁴) और फेम्टो (f, 10⁻¹⁵), एटो (a, 10⁻¹⁸), ज़ेप्टो (z, 10⁻²¹), योक्टो (y, 10⁻²⁴) भी पूछे जाते हैं। 2022 में चार नए उपसर्ग जुड़े: रोन्ना (R, 10²⁷), क्वेटा (Q, 10³⁰), रोन्टो (r, 10⁻²⁷) और क्वेक्टो (q, 10⁻³⁰)।
तीन छोटे उदाहरण, जो रूपांतरण का पूरा ढाँचा समझा देते हैं:
- 250 mg = 250 × 10⁻³ g = 0.25 g = 2.5 × 10⁻⁴ kg
- 600 nm (नारंगी-लाल प्रकाश की लगभग तरंगदैर्ध्य) = 600 × 10⁻⁹ m = 6 × 10⁻⁷ m
- 1 nm = 10⁻⁹ m = 10 Å
परीक्षा पॉइंट: सबसे आम
गलती M
और m की है:
1 Mm = 10⁶ m, पर 1 mm = 10⁻³ m। ‘माइक्रो’ का संकेत ग्रीक
अक्षर µ है, अंग्रेज़ी m नहीं। क्रम याद रखने की आसान तरकीब: हर तीन घात पर नया
नाम आता है, यानी k → M →
G → T (10³, 10⁶,
10⁹, 10¹²) और m →
µ → n →
p (10⁻³,
10⁻⁶,
10⁻⁹,
10⁻¹²)।
एक और ध्यान देने की बात: किलोग्राम पहले से उपसर्ग वाला मात्रक है, इसलिए ग्राम
के आगे उपसर्ग लगाते हैं (मिलीग्राम, माइक्रोग्राम), ‘मिली-किलोग्राम’ नहीं।
राष्ट्रीय आय को समझना इतना मुश्किल नहीं है!
विमा और विमीय सूत्र (Dimensions)
मात्रक बताता है कि राशि को किस इकाई में नापा गया। विमा (Dimension) बताती है कि वह राशि मूल राशियों से बनी कैसे है। यांत्रिकी में तीन मूल राशियाँ काम आती हैं: द्रव्यमान [M], लंबाई [L] और समय [T]। विद्युत, ऊष्मा आदि के लिए धारा [A], ताप [K], पदार्थ की मात्रा [mol] और ज्योति तीव्रता [cd] जुड़ती हैं।
किसी राशि को इन्हीं के घातों में लिखने पर जो व्यंजक मिलता है, वह विमीय सूत्र है। मान लीजिए बल निकालना है: F = m × a। द्रव्यमान की विमा [M] है और त्वरण (वेग ÷ समय) की [LT⁻²], तो बल का विमीय सूत्र [MLT⁻²] हुआ। इसे पढ़ने का तरीका यह है: बल द्रव्यमान में 1 घात, लंबाई में 1 घात और समय में −2 घात पर निर्भर है।
|
राशि |
विमीय सूत्र |
SI मात्रक |
|
वेग |
[LT⁻¹] |
m/s |
|
त्वरण |
[LT⁻²] |
m/s² |
|
बल |
[MLT⁻²] |
N |
|
संवेग / आवेग |
[MLT⁻¹] |
kg·m/s |
|
कार्य / ऊर्जा / बल-आघूर्ण |
[ML²T⁻²] |
J (बल-आघूर्ण: N·m) |
|
शक्ति |
[ML²T⁻³] |
W |
|
दाब / प्रतिबल / यंग गुणांक |
[ML⁻¹T⁻²] |
Pa |
|
घनत्व |
[ML⁻³] |
kg/m³ |
|
आवृत्ति |
[T⁻¹] |
Hz |
|
कोणीय संवेग |
[ML²T⁻¹] |
kg·m²/s |
|
प्लांक नियतांक (h) |
[ML²T⁻¹] |
J·s |
|
पृष्ठ तनाव |
[MT⁻²] |
N/m |
|
श्यानता गुणांक |
[ML⁻¹T⁻¹] |
Pa·s |
|
गुरुत्वीय नियतांक (G) |
[M⁻¹L³T⁻²] |
N·m²/kg² |
|
विशिष्ट ऊष्मा |
[L²T⁻²K⁻¹] |
J/(kg·K) |
|
विद्युत आवेश |
[AT] |
C |
|
विभवांतर |
[ML²T⁻³A⁻¹] |
V |
|
प्रतिरोध |
[ML²T⁻³A⁻²] |
Ω |
|
धारिता |
[M⁻¹L⁻²T⁴A²] |
F |
इन्हें रटने की जगह बनाना सीखिए। दाब चाहिए? दाब = बल ÷ क्षेत्रफल = [MLT⁻²] ÷ [L²] = [ML⁻¹T⁻²]। शक्ति चाहिए? शक्ति = कार्य ÷ समय = [ML²T⁻²] ÷ [T] = [ML²T⁻³]। परीक्षा-हॉल में एक भी सूत्र भूल जाएँ, तो यही दो पंक्तियाँ बचा लेती हैं।
तालिका में एक पैटर्न है, जिस पर परीक्षक सबसे ज़्यादा खेलते हैं: अलग-अलग राशियों की विमा समान हो सकती है।
- कार्य, ऊर्जा, ऊष्मा, बल-आघूर्ण: [ML²T⁻²]
- दाब, प्रतिबल, यंग गुणांक, ऊर्जा घनत्व: [ML⁻¹T⁻²]
- संवेग और आवेग: [MLT⁻¹]
- प्लांक नियतांक और कोणीय संवेग: [ML²T⁻¹]
विमीय विश्लेषण के तीन उपयोग
1. सूत्र की जाँच। नियम सीधा है: समीकरण के दोनों ओर की विमा बराबर होनी चाहिए। v² = u² + 2as लें: v² की विमा [L²T⁻²] है, u² की भी, और as = [LT⁻²][L] = [L²T⁻²], यानी सूत्र विमीय रूप से सही है। अब v = u + at² लें: at² = [LT⁻²][T²] = [L], जबकि v की विमा [LT⁻¹] है, इसलिए यह सूत्र गलत है।
2. मात्रक का रूपांतरण। 1 N को डाइन में बदलना है। बल की विमा [MLT⁻²] है। SI से CGS में जाने पर द्रव्यमान 1000 गुना (kg → g) और लंबाई 100 गुना (m → cm) बड़ी संख्या देती है, समय वही रहता है। तो 1 N = 1 × 1000 × 100 = 10⁵ डाइन।
3. सूत्र निकालना। सरल लोलक का आवर्तकाल T लोलक की लंबाई l, गोले के द्रव्यमान m और g पर निर्भर मान लें: T ∝ lᵃ mᵇ gᶜ। विमाएँ मिलाएँ तो द्रव्यमान से b = 0, लंबाई से a + c = 0 और समय से −2c = 1 मिलता है, यानी c = −1/2 और a = 1/2। निष्कर्ष: T ∝ √(l/g), और द्रव्यमान का कोई असर नहीं। इसमें 2π का मान प्रयोग से ही मिलता है, विमा से नहीं, जो हमें सीमाओं तक ले आता है।
विमीय विश्लेषण की सीमाएँ
- यह विमाहीन स्थिरांकों (½, 2π, k) का मान नहीं बता सकता।
- sin, cos, log, eˣ जैसे फलनों के अंदर का चर विमाहीन होना चाहिए, इसलिए इन पर सीधे लागू नहीं होता।
- जिन सूत्रों में कई पद जुड़े हों (जैसे s = ut + ½at²), उन्हें सीधे इस विधि से नहीं निकाला जा सकता।
- यह समान विमा वाली राशियों (कार्य और बल-आघूर्ण) में अंतर नहीं कर पाता।
- विमीय रूप से सही होने का मतलब सही होना नहीं है। s = ut + at² विमाओं के हिसाब से ठीक बैठता है, पर इसमें ½ का गुणक छूटा है, इसलिए भौतिक रूप से गलत है।
परीक्षा पॉइंट: NDA/CDS और JEE/NEET में ‘कौन-सा सूत्र विमीय रूप से सही है/गलत है’ और
‘समान विमा वाली राशियाँ’ बार-बार आते हैं। SSC/रेलवे स्तर पर ‘विमाहीन राशि’ पूछी
जाती है। इन्हें अलग से याद रखें: कोण, विकृति (strain), अपवर्तनांक, आपेक्षिक
घनत्व, पॉइसन अनुपात, घर्षण गुणांक और मैक संख्या, ये सब विमाहीन हैं।
ध्यान दें: विमाहीन होने का मतलब मात्रकहीन होना भी नहीं है, जैसे कोण का मात्रक
रेडियन या डिग्री होता है।
राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP).
मापन यंत्र
किसी यंत्र से जो सबसे छोटी माप ली जा सकती है, उसे उसका अल्पतमांक (Least Count) कहते हैं। अल्पतमांक जितना छोटा, माप उतनी बारीक। सामान्य पैमाने (स्केल) का अल्पतमांक 1 mm होता है। उससे बारीक नापने के लिए दो यंत्र पढ़ाए जाते हैं।
वर्नियर कैलिपर्स
इसमें एक मुख्य पैमाना (MS) होता है और उस पर सरकने वाला वर्नियर पैमाना (VS)। सामान्य यंत्र में मुख्य पैमाने का 1 भाग (MSD) = 1 mm होता है और वर्नियर के 10 भाग (VSD) मुख्य पैमाने के 9 भागों के बराबर होते हैं, यानी 1 VSD = 0.9 mm।
अल्पतमांक = 1 MSD − 1 VSD = 1 − 0.9 = 0.1 mm = 0.01 cm
पाठ्यांक = मुख्य पैमाना पाठ्यांक (MSR) + वर्नियर संपाती भाग (VSR) × अल्पतमांक
MSR वह है जो वर्नियर के शून्य के ठीक बाईं ओर वाली मुख्य पैमाने की रेखा पर दिखे, और VSR वर्नियर की वह रेखा है जो मुख्य पैमाने की किसी रेखा से सीधी मिलती हो।
उदाहरण। एक सिक्के का व्यास नापा। वर्नियर का शून्य मुख्य पैमाने पर 2.3 cm और 2.4 cm के बीच है, और वर्नियर की 6वीं रेखा मुख्य पैमाने की रेखा से मिल रही है। तो व्यास = 2.3 + 6 × 0.01 = 2.36 cm।
शून्यांक त्रुटि। जबड़े पूरी तरह बंद करने पर दोनों शून्य मिलने चाहिए। न मिलें, तो यंत्र में शून्यांक त्रुटि है:
- धनात्मक: वर्नियर शून्य मुख्य शून्य के दाईं ओर है और n-वीं रेखा मिल रही है। त्रुटि = +n × 0.01 cm। उदाहरण: 4थी रेखा मिले तो +0.04 cm।
- ऋणात्मक: वर्नियर शून्य बाईं ओर है और n-वीं रेखा मिल रही है। त्रुटि = −(10 − n) × 0.01 cm। उदाहरण: 7वीं रेखा मिले तो −0.03 cm।
सही पाठ्यांक = प्रेक्षित पाठ्यांक − शून्यांक त्रुटि (त्रुटि का चिह्न साथ लेकर)। ऊपर वाले सिक्के में त्रुटि +0.04 cm हो तो सही व्यास 2.36 − 0.04 = 2.32 cm होगा, और −0.03 cm हो तो 2.36 + 0.03 = 2.39 cm।
स्क्रू गेज
तार की मोटाई या पतली चादर जैसी चीज़ें नापने के लिए। इसमें एक पेंच होता है जो हर पूरे चक्कर में रैखिक पैमाने पर एक तय दूरी चलता है, जिसे पिच कहते हैं।
अल्पतमांक = पिच ÷ वृत्तीय पैमाने के कुल भाग
सामान्यतः पिच 1 mm और वृत्तीय पैमाने पर 100 भाग होते हैं, इसलिए अल्पतमांक = 1/100 = 0.01 mm। (कई यंत्रों में पिच 0.5 mm और भाग 50 होते हैं; अल्पतमांक तब भी 0.01 mm ही आता है।)
पाठ्यांक = रैखिक पैमाना पाठ्यांक + वृत्तीय पैमाना पाठ्यांक × अल्पतमांक
उदाहरण। तार का व्यास नापा। रैखिक पैमाने पर 2 mm दिखे और वृत्तीय पैमाने का 36वाँ भाग संदर्भ-रेखा पर हो, तो व्यास = 2 + 36 × 0.01 = 2.36 mm।
शून्यांक त्रुटि यहाँ भी जाँचें: जबड़े बंद करने पर वृत्तीय पैमाने का पाठ्यांक 0 होना चाहिए। अगर यह +3 भाग दिखाए, तो त्रुटि +0.03 mm है और सही व्यास 2.36 − 0.03 = 2.33 mm। अगर पाठ्यांक 97 दिखे, तो इसका अर्थ −3 भाग, यानी −0.03 mm की त्रुटि है, और सही व्यास 2.36 + 0.03 = 2.39 mm।
परीक्षा पॉइंट: दो सूत्र रटें: वर्नियर में LC = 1 MSD − 1 VSD, स्क्रू गेज में LC = पिच ÷ भागों की संख्या। और चिह्न की गलती से बचिए: सही पाठ्यांक हमेशा प्रेक्षित − शून्यांक त्रुटि होता है, ‘हमेशा घटाओ’ नहीं। ऋणात्मक त्रुटि में घटाने का मतलब जोड़ना होता है। प्रश्न में ‘पिच 0.5 mm, 50 भाग’ दिया हो, तो LC 0.5/50 = 0.01 mm ही निकालें, 0.5 mm नहीं।
MCQs (PYQ)
1. ऊष्मा ऊर्जा का SI मात्रक क्या है? SSC CGL 2017 (Tier-1).
(a) जूल
(b) न्यूटन
(c) कैलोरी
(d) केल्विन
उत्तर: (a)। ऊष्मा ऊर्जा का ही एक रूप है। कैलोरी SI मात्रक नहीं
है।
2. चुंबकीय क्षेत्र का मात्रक क्या है? SSC
CGL 2018
(a) कोबाल्ट
(b) ऐम्पियर
(c) टेस्ला
(d) ओम
उत्तर: (c)। 1 T = 1 Wb/m²। कोबाल्ट तत्व का नाम है, मात्रक
नहीं।
3. ‘टॉर (Torr)’ किसका मात्रक है? SSC
CGL 2019
(a) शक्ति
(b) दाब
(c) ऊर्जा
(d) बल
उत्तर: (b)। 1 Torr = 1/760 atm, लगभग 1 mmHg।
4. एक मीटर में कितने माइक्रॉन होते हैं? SSC
CGL 2020.
(a) 1000
(b) 1000000
(c) 100000
(d) 10000
उत्तर: (b)। 1 माइक्रॉन = 10⁻⁶ m।
5. रैखिक संवेग की विमा किसके समान है? SSC
CGL 2020
(a) आवेग
(b) कार्य
(c) प्रतिबल
(d) ऊर्जा
उत्तर: (a)। दोनों की विमा [MLT⁻¹] है। कार्य और ऊर्जा की [ML²T⁻²] और
प्रतिबल की [ML⁻¹T⁻²] होती है।
6. निम्न में से कौन SI का मूल मात्रक नहीं है? RRB
ALP 2018.
(a) कूलॉम
(b) मीटर
(c) किलोग्राम
(d) ऐम्पियर
उत्तर: (a)। 1 C = 1 A·s, इसलिए यह व्युत्पन्न मात्रक है।
7. संवेग का मात्रक क्या है? RRB
ALP 2018
(a) kg·m·s²
(b) kg·m·s⁻²
(c) kg·m·s
(d) kg·m·s⁻¹
उत्तर: (d)। संवेग = द्रव्यमान × वेग।
8. बल-आघूर्ण (torque) का SI मात्रक क्या है? RRB
ALP 2018
(a) N·m²
(b) N²·m
(c) N·m
(d) N
उत्तर: (c)। बल-आघूर्ण = दूरी × बल।
9. एक कैलोरी का मान कितना होता है? RRB
ALP 2018
(a) 32 जूल
(b) 4.2 जूल
(c) 3.2 जूल
(d) 2.34 जूल
उत्तर: (b)। सटीक मान लगभग 4.184 J है, जिसे परीक्षा में 4.2 J
लिया जाता है।
10. ‘प्रकाश वर्ष’ किससे संबंधित है?
(a) ऊर्जा
(b) दूरी
(c) चाल
(d) समय
उत्तर: (b)। 1 प्रकाश वर्ष ≈ 9.46
× 10¹⁵ m।
उत्तर: (d)
वांडीवाश का युद्ध
व्याख्या:
1760 में आयरकूट ने वांडीवाश में फ्रांसीसी सेनापति काउंट लाली को हराया। इसके बाद
1763 की पेरिस संधि ने फ्रांसीसियों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा ख़त्म कर दी।
रॉलेट एक्ट 1919 – सम्पूर्ण जानकारी (Rowlatt Act in Hindi).
निष्कर्ष
मात्रक एवं मापन में मेहनत का सबसे ज़्यादा फल उन्हें मिलता है जो इसे दो हिस्सों में बाँटकर पढ़ते हैं। तथ्य वाला हिस्सा (SI के सात मात्रक, 2019 का बदलाव, मात्रक-राशि तालिकाएँ) SSC, रेलवे और PSC में सीधे अंक देता है, और गणना वाला हिस्सा (विमा, त्रुटि, सार्थक अंक, यंत्र) NDA, CDS और JEE/NEET में फ़र्क पैदा करता है। अगर आप सिर्फ एक काम करें, तो मात्रक-राशि तालिका को बिना देखे लिखने की कोशिश कीजिए। जहाँ अटकें, वहीं आपकी कमज़ोरी है।
इस लेख की तालिकाओं को बुकमार्क कर लीजिए, और परीक्षा से एक दिन पहले सिर्फ ‘आख़िरी रिवीज़न शीट’ और MCQ दोबारा पढ़िए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
मात्रक किसे कहते हैं?
किसी भौतिक राशि को नापने के लिए चुना गया मानक परिमाण मात्रक कहलाता है। जैसे लंबाई के लिए मीटर और समय के लिए सेकंड। किसी माप को पूरा लिखने के लिए संख्या के साथ मात्रक ज़रूरी है: भौतिक राशि = संख्यात्मक मान × मात्रक।
SI में कितने मूल मात्रक हैं और कौन-से?
सात: मीटर (लंबाई), किलोग्राम (द्रव्यमान), सेकंड (समय), ऐम्पियर (विद्युत धारा), केल्विन (ताप), मोल (पदार्थ की मात्रा) और कैंडेला (ज्योति तीव्रता)। बाकी सभी मात्रक इन्हीं से बनते हैं।
मूल और व्युत्पन्न मात्रक में क्या अंतर है?
मूल मात्रक स्वतंत्र होते हैं और किसी दूसरे मात्रक से नहीं बनते। व्युत्पन्न मात्रक मूल मात्रकों के गुणा-भाग से बनते हैं, जैसे न्यूटन (kg·m·s⁻²), जूल और पास्कल। वेग (m/s) भी व्युत्पन्न है, पर उसका अलग नाम नहीं है।
क्या पूरक मात्रक अब भी SI का हिस्सा हैं?
रेडियन और स्टेरेडियन अब भी SI में हैं, पर 1995 से ‘पूरक’ श्रेणी में नहीं। इन्हें विमाहीन व्युत्पन्न मात्रक माना जाता है। पुरानी किताबों और कुछ परीक्षा-प्रश्नों में वही पुरानी श्रेणी मिलती है, इसलिए प्रश्न का संदर्भ देखकर उत्तर दें।
किलोग्राम की वर्तमान परिभाषा क्या है?
20 मई 2019 से किलोग्राम प्लांक स्थिरांक (h = 6.62607015 × 10⁻³⁴ J·s) के निश्चित मान से परिभाषित है। पहले यह पेरिस के पास रखे प्लैटिनम-इरिडियम के एक बेलन के द्रव्यमान से परिभाषित था।
