नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination)
परिचय (Introduction)
क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप अचानक किसी गर्म वस्तु को छू लेते हैं तो आपका हाथ एक सेकंड से भी कम समय में कैसे पीछे हट जाता है? या जब आप भूखे होते हैं और स्वादिष्ट खाने की खुशबू आती है तो मुँह में पानी क्यों आ जाता है? ये सभी क्रियाएँ हमारे शरीर में होने वाले नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) का अद्भुत उदाहरण हैं।
मानव शरीर एक अत्यंत जटिल मशीन है जो हर पल लाखों कार्य एक साथ करता रहता है। चलना, दौड़ना, बोलना, सोचना, याद रखना, सांस लेना, भोजन पचाना, दिल का धड़कना—ये सभी क्रियाएँ निरंतर चलती रहती हैं। इन सभी कार्यों के बीच सही तालमेल और समन्वय बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि यह तालमेल न हो, तो शरीर सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाएगा।
Control and Coordination का मुख्य उद्देश्य है:
· शरीर को बदलते वातावरण के अनुसार ढालना (adaptation)
· उत्तेजना (stimulus) पर उचित प्रतिक्रिया (response) देना
· शरीर की आंतरिक स्थिरता (homeostasis) बनाए रखना
इस अध्याय में हम दो प्रमुख नियंत्रण प्रणालियाँ समझते हैं:
1. तंत्रिका तंत्र (Nervous System) – तेज, electrical impulses आधारित
2. अंत:स्रावी/हार्मोन तंत्र (Endocrine System) – धीमा, chemical messengers (hormones) आधारित
और साथ ही पौधों में नियंत्रण/समन्वय—जो हार्मोन और वृद्धि-गतियों (tropisms) से होता है।
आइए, इस रोचक यात्रा में आगे बढ़ें और समझें कि कैसे हमारा शरीर हर परिस्थिति में सही प्रतिक्रिया देने में सक्षम होता है।
नियंत्रण एवं समन्वय की आवश्यकता
जीवित प्राणियों को हर समय अपने आसपास के वातावरण से अनगिनत सूचनाएँ मिलती रहती हैं। ये सूचनाएँ बाहरी हो सकती हैं—जैसे प्रकाश, ध्वनि, गंध, स्पर्श, ताप—या आंतरिक हो सकती हैं—जैसे रक्त में ग्लूकोज का स्तर, कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा, या हार्मोन का संतुलन। इन सभी सूचनाओं को समझना, उन्हें प्रोसेस करना और उपयुक्त प्रतिक्रिया देना ही नियंत्रण एवं समन्वय कहलाता है।
उत्तेजना (Stimulus) वह कोई भी परिवर्तन है जो हमारे शरीर या वातावरण में होता है और जो हमें प्रतिक्रिया करने के लिए प्रेरित करता है। ग्राही (Receptors) वे संरचनाएँ हैं जो इन उत्तेजनाओं को पकड़ती हैं—जैसे आँख प्रकाश के लिए, कान ध्वनि के लिए, जीभ स्वाद के लिए, नाक गंध के लिए, और त्वचा स्पर्श एवं ताप के लिए। इन ग्राहियों से सूचना केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क या मेरुरज्जु) तक पहुँचती है, जहाँ इसका विश्लेषण होता है। फिर उपयुक्त आदेश प्रभावक (Effectors) तक भेजे जाते हैं, जो मांसपेशियाँ या ग्रंथियाँ होती हैं। यही प्रतिक्रिया (Response) कहलाती है।
तंत्रिका तंत्र (Nervous System) – शरीर का विद्युत नेटवर्क
तंत्रिका तंत्र शरीर का सबसे तीव्र संचार तंत्र है। यह विद्युत आवेगों के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है और शरीर को तुरंत प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाता है। तंत्रिका तंत्र को तीन मुख्य भागों में बाँटा जाता है:
केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System - CNS): इसमें मस्तिष्क और मेरुरज्जु (spinal cord) शामिल हैं। यह शरीर का नियंत्रण केंद्र है जहाँ सभी सूचनाओं का विश्लेषण होता है और निर्णय लिए जाते हैं।
परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System - PNS): यह तंत्रिकाओं का जाल है जो मस्तिष्क और मेरुरज्जु को शरीर के विभिन्न भागों से जोड़ता है।
स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System - ANS): यह अनैच्छिक क्रियाओं—जैसे हृदयगति, श्वसन, पाचन—को नियंत्रित करता है।
NEW CHAPTER ALERT! Part 2 – The Nineteenth Century (1815-1914) उन्नीसवीं सदी
न्यूरॉन (Neuron) – तंत्रिका तंत्र की इकाई
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। यह एक विशेष प्रकार की कोशिका है जो विद्युत आवेगों को संचारित करने में सक्षम होती है। एक न्यूरॉन में निम्नलिखित भाग होते हैं:
डेंड्राइट (Dendrites): ये छोटी-छोटी शाखाओं जैसी संरचनाएँ हैं जो अन्य न्यूरॉन या ग्राहियों से संदेश प्राप्त करती हैं। ये न्यूरॉन का "रिसीविंग एंड" हैं।
कोशिका देह (Cell Body या Cyton): इसमें केंद्रक और अन्य कोशिकांग होते हैं। यह प्राप्त सूचनाओं को संसाधित करता है और निर्णय लेता है कि आवेग को आगे भेजना है या नहीं।
ऐक्सॉन (Axon): यह एक लंबी नलिका जैसी संरचना है जो विद्युत आवेग को कोशिका देह से दूर ले जाती है। अधिकांश न्यूरॉनों में ऐक्सॉन माइलिन आवरण (Myelin Sheath) से ढका होता है, जो आवेग की गति को बढ़ाता है और उसे सुरक्षा प्रदान करता है।
तंत्रिका अंत (Axon Terminals): ये ऐक्सॉन के अंतिम छोर पर शाखाओं जैसी संरचनाएँ हैं जो अगले न्यूरॉन या प्रभावक के पास आवेग पहुँचाती हैं।
साइनैप्स (Synapse): दो न्यूरॉनों के बीच एक छोटा सा अंतराल होता है जिसे साइनैप्स कहते हैं। यहाँ विद्युत आवेग न्यूरोट्रांसमीटर नामक रासायनिक पदार्थों में बदल जाता है, जो अंतराल को पार करके अगले न्यूरॉन को उत्तेजित करता है।
न्यूरॉन तीन प्रकार के होते हैं: संवेदी न्यूरॉन (ग्राही से CNS तक), प्रेरक न्यूरॉन (CNS से प्रभावक तक), और संबंधी न्यूरॉन (CNS के अंदर न्यूरॉनों को जोड़ने वाले)।
कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय: जैव प्रक्रम (Life Processes) Complete notes.
क्रियाओं के प्रकार
हमारे शरीर की क्रियाएँ मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं:
ऐच्छिक क्रियाएँ (Voluntary Actions): ये वे क्रियाएँ हैं जो हम अपनी इच्छा और सोच-विचार के बाद करते हैं, जैसे चलना, लिखना, बोलना, किसी वस्तु को उठाना। इन क्रियाओं का नियंत्रण मस्तिष्क के सेरिब्रम (Cerebrum) भाग द्वारा होता है।
अनैच्छिक क्रियाएँ (Involuntary Actions): ये वे क्रियाएँ हैं जो हमारी इच्छा या नियंत्रण के बिना स्वतः होती रहती हैं, जैसे हृदय का धड़कना, सांस लेना, पाचन, रक्तचाप का नियमन। इन क्रियाओं का नियंत्रण मेडुला ऑब्लोंगेटा और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र करता है।
प्रतिवर्ती क्रियाएँ (Reflex Actions): ये अत्यंत तीव्र, स्वचालित और अनैच्छिक प्रतिक्रियाएँ हैं जो किसी आकस्मिक उत्तेजना के प्रति होती हैं। उदाहरण के लिए, गर्म वस्तु छूने पर हाथ का तुरंत हट जाना, आँख में कुछ जाने पर पलक का झपकना, घुटने पर हल्की चोट लगने पर पैर का उछलना। ये क्रियाएँ शरीर को नुकसान से बचाने के लिए विकसित हुई हैं।
CHAPTER 3! The Making of a Global World – Part 1: पूर्व-आधुनिक विश्व – The Pre-Modern World.
प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc)
प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान तंत्रिका आवेग जिस निश्चित मार्ग से गुजरता है, उसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं। इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें मस्तिष्क की सीधी भागीदारी नहीं होती, जिससे प्रतिक्रिया का समय बहुत कम हो जाता है और शरीर को चोट से बचाया जा सकता है।
प्रतिवर्ती चाप का क्रम इस प्रकार है: ग्राही → संवेदी तंत्रिका → मेरुरज्जु (संबंधी न्यूरॉन) → प्रेरक तंत्रिका → प्रभावक।
आइए इसे एक उदाहरण से समझें। मान लीजिए आप अनजाने में किसी गर्म बर्तन को छू लेते हैं:
1. त्वचा में स्थित ग्राही (temperature receptors) तुरंत अत्यधिक गर्मी का पता लगाते हैं
2. यह सूचना संवेदी तंत्रिका के माध्यम से विद्युत आवेग के रूप में मेरुरज्जु तक पहुँचती है
3. मेरुरज्जु में संबंधी न्यूरॉन इस सूचना को तुरंत प्रोसेस करता है और बिना मस्तिष्क की प्रतीक्षा किए प्रतिक्रिया का निर्णय लेता है
4. यह निर्णय प्रेरक तंत्रिका के माध्यम से हाथ की मांसपेशियों (प्रभावक) तक पहुँचता है
5. मांसपेशियाँ तुरंत संकुचित होती हैं और हाथ पीछे हट जाता है
यह पूरी प्रक्रिया एक सेकंड के अंश में पूरी हो जाती है। यदि यह सूचना पहले मस्तिष्क तक जाती, वहाँ विश्लेषण होता, फिर आदेश वापस आता, तो इतनी देरी में गंभीर जलन हो सकती थी। यही कारण है कि प्रतिवर्ती चाप एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र है।
ध्यान दें कि हालाँकि प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता, लेकिन सूचना एक अलग मार्ग से मस्तिष्क तक भी पहुँचती है। इसलिए हाथ हटने के कुछ क्षण बाद आपको दर्द का एहसास होता है और आप समझ पाते हैं कि क्या हुआ।
कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds).
मानव मस्तिष्क (Human Brain)
मस्तिष्क मानव शरीर का सबसे जटिल और महत्वपूर्ण अंग है। यह खोपड़ी (cranium) द्वारा सुरक्षित रहता है और तीन झिल्लियों (meninges) से ढका होता है। मस्तिष्क को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जाता है:
अग्र मस्तिष्क (Forebrain): इसका सबसे बड़ा भाग सेरिब्रम (Cerebrum) है, जो मस्तिष्क का लगभग दो-तिहाई हिस्सा घेरता है। सेरिब्रम हमारी बुद्धि, सोच-विचार, तर्क, निर्णय लेने, स्मरण करने और सीखने का केंद्र है। यह सभी ऐच्छिक क्रियाओं—जैसे चलना, बोलना, लिखना—को नियंत्रित करता है। साथ ही यह सभी संवेदी अनुभूतियों—देखना, सुनना, सूँघना, स्वाद लेना, स्पर्श महसूस करना—को प्रोसेस करता है। सेरिब्रम दो गोलार्धों (hemispheres) में बँटा होता है और इसकी सतह पर अनेक उभार और खाँचें होती हैं, जो सतही क्षेत्रफल को बढ़ाकर अधिक न्यूरॉन समायोजित करने में मदद करती हैं।
मध्य मस्तिष्क (Midbrain): यह अग्र मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क को जोड़ता है। यह दृश्य और श्रवण प्रतिवर्तों में भूमिका निभाता है।
पश्च मस्तिष्क (Hindbrain): इसमें तीन मुख्य भाग होते हैं:
सेरिबेलम (Cerebellum): यह मस्तिष्क के पिछले निचले भाग में स्थित होता है। इसका मुख्य कार्य शरीर का संतुलन बनाए रखना, शारीरिक मुद्रा (posture) को नियंत्रित करना और मांसपेशीय गतियों में समन्वय स्थापित करना है। जब आप साइकिल चलाते हैं या नाचते हैं, तो सेरिबेलम यह सुनिश्चित करता है कि आपके सभी अंग सही तालमेल में काम करें।
पोन्स (Pons): यह श्वसन की लय को नियमित करने में सहायता करता है।
मेडुला ऑब्लोंगेटा (Medulla Oblongata): यह मस्तिष्क का निचला भाग है जो मेरुरज्जु से जुड़ता है। यह जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है—श्वसन की दर, हृदय की धड़कन, रक्तचाप, निगलना, खाँसी, छींक, उल्टी आदि। इसी कारण मेडुला को किसी भी प्रकार की क्षति जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है।
History CHAPTER 2 COMPLETE! Part 4 = सामूहिक अपनेपन की भावना
अंत:स्रावी तंत्र (Endocrine System) – रासायनिक संदेशवाहक
जहाँ तंत्रिका तंत्र विद्युत आवेगों के माध्यम से तीव्र गति से काम करता है, वहीं अंत:स्रावी तंत्र हार्मोन नामक रासायनिक संदेशवाहकों के माध्यम से धीमी लेकिन दीर्घकालिक प्रभाव डालता है। हार्मोन विशेष ग्रंथियों—जिन्हें अंत:स्रावी ग्रंथियाँ कहते हैं—से स्रावित होते हैं। ये ग्रंथियाँ नलिकाविहीन (ductless) होती हैं, अर्थात् ये अपने स्राव को सीधे रक्त में छोड़ती हैं। फिर रक्त के माध्यम से हार्मोन पूरे शरीर में घूमते हुए अपने लक्ष्य अंग (target organ) तक पहुँचते हैं और वहाँ विशिष्ट प्रभाव डालते हैं।
हार्मोनल नियंत्रण में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है पुनर्निवेश तंत्र (Feedback Mechanism)। इसमें हार्मोन का स्तर बढ़ने पर उसका स्रावण कम हो जाता है, और घटने पर बढ़ जाता है। यह एक स्वनियामक प्रणाली है जो शरीर में संतुलन बनाए रखती है।
कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3: धातु एवं अधातु | Complete Notes + MCQ + PYQ
प्रमुख अंत:स्रावी ग्रंथियाँ और उनके हार्मोन
पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland): यह मस्तिष्क के आधार पर एक छोटी मटर के दाने जितनी ग्रंथि है, लेकिन इसे "मास्टर ग्रंथि" कहा जाता है क्योंकि यह अन्य अंत:स्रावी ग्रंथियों को नियंत्रित करती है। यह वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) स्रावित करती है जो शरीर की सामान्य वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से बौनापन (dwarfism) और अधिकता से विशालकायता (gigantism) हो सकती है। यह अन्य हार्मोन भी बनाती है जो थायरॉइड, अधिवृक्क और जनन ग्रंथियों को उत्तेजित करते हैं।
थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland): यह गर्दन में, श्वास नली के आसपास स्थित तितली के आकार की ग्रंथि है। यह थायरॉक्सिन (Thyroxine) हार्मोन बनाती है जो शरीर के उपापचय (metabolism) को नियंत्रित करता है, यानी यह तय करता है कि हमारे शरीर की कोशिकाएँ भोजन से ऊर्जा कितनी तेजी से बनाएँगी। थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है। आयोडीन की कमी से थायरॉक्सिन कम बनता है और ग्रंथि आकार में बढ़ जाती है, जिसे घेंघा या गलगंड (Goitre) रोग कहते हैं। गर्दन में सूजन इस रोग की पहचान है। इसकी रोकथाम के लिए आयोडीन युक्त नमक का उपयोग करना चाहिए।
अग्न्याशय (Pancreas): यह पेट में, आमाशय के पीछे स्थित एक मिश्रित ग्रंथि है—यह बहि:स्रावी (पाचक रस बनाती है) और अंत:स्रावी (हार्मोन बनाती है) दोनों है। इसकी विशेष कोशिकाएँ इंसुलिन (Insulin) हार्मोन बनाती हैं जो रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) के स्तर को नियंत्रित करता है। भोजन के बाद जब रक्त में ग्लूकोज बढ़ता है, तो इंसुलिन कोशिकाओं को इस ग्लूकोज को अवशोषित करने में मदद करता है। इंसुलिन की कमी या अप्रभावी होने पर रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है, जिसे मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes Mellitus) कहते हैं। इस स्थिति में मूत्र में भी शर्करा आने लगती है।
अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland): दोनों गुर्दों के ऊपर एक-एक अधिवृक्क ग्रंथि होती है। ये एड्रेनालिन (Adrenaline) हार्मोन स्रावित करती हैं, जिसे "आपातकालीन हार्मोन" या "लड़ो या भागो हार्मोन" भी कहा जाता है। जब हम किसी खतरनाक या तनावपूर्ण स्थिति में होते हैं—जैसे किसी जानवर से सामना, परीक्षा का तनाव, दुर्घटना—तो एड्रेनालिन तुरंत रक्त में स्रावित होता है। यह हृदय की धड़कन बढ़ाता है, श्वसन तेज करता है, रक्त की आपूर्ति मुख्यतः मांसपेशियों और मस्तिष्क की ओर कर देता है, और शरीर को तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार कर देता है। इससे व्यक्ति अधिक शक्तिशाली और सतर्क हो जाता है।
जनन ग्रंथियाँ (Reproductive Glands): पुरुषों में वृषण (Testes)
और महिलाओं में अंडाशय (Ovaries)
जनन ग्रंथियाँ हैं। वृषण टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) हार्मोन बनाता है जो पुरुष लक्षणों—जैसे दाढ़ी-मूँछ, गहरी आवाज, मांसपेशीय विकास—के लिए जिम्मेदार है। अंडाशय एस्ट्रोजन (Estrogen)
और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) बनाता है जो महिला लक्षणों, मासिक चक्र और गर्भावस्था के लिए आवश्यक हैं।
Class 10 Science chapter: “अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acids, Bases and Salts)”
तंत्रिका नियंत्रण बनाम हार्मोनल नियंत्रण
दोनों नियंत्रण तंत्र अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। तंत्रिका तंत्र तब काम आता है जब तुरंत प्रतिक्रिया चाहिए—जैसे खतरे से बचना, गेंद को पकड़ना। इसकी गति बहुत तेज है (प्रति सेकंड 100 मीटर तक), माध्यम तंत्रिका तंतु हैं और प्रभाव अल्पकालिक होता है।
दूसरी ओर, हार्मोनल नियंत्रण दीर्घकालिक बदलावों के लिए उपयुक्त है—जैसे वृद्धि, यौवनारंभ, उपापचय दर, गर्भावस्था। यह अपेक्षाकृत धीमा है, माध्यम रक्त है और प्रभाव लंबे समय तक रहता है। दोनों मिलकर शरीर में संपूर्ण नियंत्रण एवं समन्वय बनाए रखते हैं।
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पौधों में नियंत्रण एवं समन्वय
पौधों में न तो तंत्रिका तंत्र होता है और न ही मस्तिष्क, फिर भी वे अपने वातावरण के प्रति प्रतिक्रिया देते हैं। पौधे प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण, जल, स्पर्श जैसी उत्तेजनाओं को महसूस करते हैं और उचित प्रतिक्रिया देते हैं। यह प्रतिक्रिया मुख्यतः पादप हार्मोन और वृद्धि गतियों के माध्यम से होती है।
अनुवर्तन गतियाँ (Tropic Movements): ये वे गतियाँ हैं जो उत्तेजना की दिशा के आधार पर होती हैं, यानी दिशात्मक होती हैं।
प्रकाशानुवर्तन (Phototropism): पौधे का तना प्रकाश की ओर मुड़ता है (धनात्मक प्रकाशानुवर्तन), जबकि जड़ें प्रकाश से दूर बढ़ती हैं (ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन)। इसमें ऑक्सिन (Auxin) हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका है। जब एक तरफ से प्रकाश आता है, तो ऑक्सिन छायावाली तरफ अधिक मात्रा में जमा हो जाता है। ऑक्सिन कोशिकाओं को लंबा (elongate) करता है, इसलिए छायावाली तरफ की कोशिकाएँ अधिक लंबी हो जाती हैं और तना प्रकाश की ओर झुक जाता है।
गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism): जड़ें गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ती हैं (धनात्मक), जबकि तना विपरीत दिशा में (ऋणात्मक)। यही कारण है कि बीज को किसी भी तरह बोया जाए, जड़ें नीचे और तना ऊपर बढ़ता है।
जलानुवर्तन (Hydrotropism): जड़ें जल की उपस्थिति वाली दिशा में बढ़ती हैं, भले ही वह दिशा गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ही क्यों न हो।
स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism): मटर या अंगूर की लतरें (tendrils) जब किसी सहारे को छूती हैं तो उसके चारों ओर लिपट जाती हैं। जिस तरफ स्पर्श होता है, उस तरफ की कोशिकाएँ धीमी गति से बढ़ती हैं जबकि दूसरी तरफ तेजी से, जिससे लतर सहारे पर लिपट जाती है।
रसायनानुवर्तन (Chemotropism): पराग नलिका अंडाशय से निकलने वाले रासायनिक संकेतों की ओर बढ़ती है।
अदिश गतियाँ (Nastic Movements): ये गतियाँ उत्तेजना की दिशा पर निर्भर नहीं करतीं, अर्थात् अदिशात्मक होती हैं। सबसे प्रसिद्ध उदाहरण छुई-मुई (Mimosa pudica) का पौधा है। जब इसकी पत्तियों को छुआ जाता है, तो वे तुरंत बंद हो जाती हैं और पत्ती नीचे की ओर झुक जाती है। यह पत्ती के आधार पर स्थित विशेष कोशिकाओं में पानी के दबाव (turgor pressure) में अचानक परिवर्तन के कारण होता है। कुछ फूल दिन में खुलते और रात में बंद हो जाते हैं, यह भी नैस्टी गति का उदाहरण है।
Chapter 1 "रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण" complete किया?
MCQ (PYQ)
1. प्रतिवर्ती क्रिया
होती है—
(क) स्वैच्छिक
(ख) अनैच्छिक व त्वरित
(ग) धीमी
(घ) केवल हार्मोन द्वारा
उत्तर: (ख)
2. प्रतिवर्ती चाप
का सही
क्रम है—
(क) ग्राही →
प्रेरक →
संवेदी →
प्रभावक
(ख) ग्राही →
संवेदी →
मेरुरज्जु →
प्रेरक →
प्रभावक
(ग) मस्तिष्क →
ग्राही →
प्रभावक
(घ) प्रभावक →
ग्राही →
मेरुरज्जु
उत्तर: (ख)
3. न्यूरॉन का
वह भाग
जो कोशिका
देह से
संदेश दूर
ले जाता
है—
(क) डेंड्राइट
(ख) ऐक्सॉन
(ग) केंद्रक
(घ) सायटन
उत्तर: (ख)
4. दो न्यूरॉनों
के बीच
का जोड़
कहलाता है—
(क) साइनैप्स
(ख) रंध्र
(ग) विल्ली
(घ) नेफ्रॉन
उत्तर: (क)
5. सेरिबेलम का
मुख्य कार्य
है—
(क) सोच-विचार
(ख) संतुलन व मांसपेशीय समन्वय
(ग) दृष्टि
(घ) पाचन
उत्तर: (ख)
6. मेडुला ऑब्लोंगेटा
नियंत्रित करता
है—
(क) स्वैच्छिक क्रियाएँ
(ख) श्वसन व हृदयगति
(ग) सुनना
(घ) लिखना
उत्तर: (ख)
7. अंत:स्रावी
ग्रंथियाँ होती
हैं—
(क) नलिकायुक्त
(ख) नलिकाविहीन
(ग) केवल पाचन ग्रंथियाँ
(घ) केवल पसीना ग्रंथियाँ
उत्तर: (ख)
8. हार्मोन शरीर
में किसके
द्वारा पहुँचते
हैं—
(क) तंत्रिका तंतु
(ख) रक्त
(ग) हड्डी
(घ) वसा
उत्तर: (ख)
9. आपात स्थिति
में "लड़ो या
भागो" से संबंधित
हार्मोन है—
(क) इंसुलिन
(ख) थायरॉक्सिन
(ग) एड्रेनालिन
(घ) ऑक्सिन
उत्तर: (ग)
10. थायरॉक्सिन के
निर्माण के
लिए आवश्यक
है—
(क) लोहा
(ख) आयोडीन
(ग) कैल्शियम
(घ) सोडियम
उत्तर: (ख)
Chapter 1 का सबसे SCORING Part – "राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद (nationalism & Imperalism)(Balkans)"
लघु उत्तरीय प्रश्न
Q1. नियंत्रण एवं समन्वय से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: शरीर के विभिन्न अंगों और तंत्रों की क्रियाओं पर उचित नियंत्रण रखना तथा उनके बीच तालमेल बनाए रखना नियंत्रण एवं समन्वय कहलाता है। इससे उत्तेजना पर सही प्रतिक्रिया समय पर होती है ।
Q2. न्यूरॉन की परिभाषा लिखिए तथा इसके चार भाग लिखिए।
उत्तर: तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई न्यूरॉन कहलाती है । इसके भाग—डेंड्राइट, कोशिका देह/सायटन, ऐक्सॉन, साइनैप्स।
Q3. प्रतिवर्ती क्रिया क्या है? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: किसी उत्तेजना के प्रति होने वाली त्वरित, स्वतः तथा अनैच्छिक प्रतिक्रिया प्रतिवर्ती क्रिया कहलाती है। उदाहरण: गर्म वस्तु छूने पर हाथ का तुरंत हट जाना ।
Q4. प्रतिवर्ती चाप क्या है? इसके घटक लिखिए।
उत्तर: प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान तंत्रिका आवेग जिस मार्ग से गुजरता है उसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं । घटक—ग्राही, संवेदी तंत्रिका, मेरुरज्जु (संबंधी न्यूरॉन), प्रेरक तंत्रिका, प्रभावक (मांसपेशी/ग्रंथि)।
Q5. प्रतिवर्ती क्रियाएँ लाभकारी क्यों हैं?
उत्तर: प्रतिवर्ती क्रियाएँ शरीर को हानि से बचाती हैं क्योंकि इनमें प्रतिक्रिया बहुत तेज होती है। यह त्वरित प्रतिक्रिया मेरुरज्जु द्वारा होने से समय बचता है और चोट की संभावना घटती है ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Q1. प्रतिवर्ती चाप का वर्णन कीजिए तथा गर्म वस्तु छूने पर होने वाली प्रतिवर्ती क्रिया को क्रमवार लिखिए।
उत्तर: प्रतिवर्ती चाप वह मार्ग है जिससे प्रतिवर्ती क्रिया में तंत्रिका आवेग गुजरता है ।
क्रम: ग्राही → संवेदी तंत्रिका → मेरुरज्जु (संबंधी न्यूरॉन) → प्रेरक तंत्रिका → प्रभावक।
गर्म वस्तु छूने पर:
1. त्वचा के ग्राही (receptors) गर्मी का पता लगाते हैं
2. संवेदी तंत्रिका आवेग को मेरुरज्जु तक ले जाती है
3. मेरुरज्जु में संबंधी न्यूरॉन (interneuron) तुरंत प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है
4. प्रेरक तंत्रिका (motor neuron) मांसपेशियों को संकेत देती है
5. मांसपेशियाँ संकुचित होकर हाथ को तुरंत पीछे खींच लेती हैं
महत्व: यह प्रक्रिया बहुत तेज होती है क्योंकि मस्तिष्क तक संकेत जाने और वापस आने में समय लगेगा। मेरुरज्जु त्वरित relay करता है, जिससे चोट की संभावना कम होती है ।
Q2. न्यूरॉन का सचित्र वर्णन कीजिए तथा उसके भागों के कार्य लिखिए।
उत्तर:
परिभाषा: न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है ।
संरचना (चित्र में निम्न लेबल करें):
1. डेंड्राइट (Dendrites):
o शाखित संरचनाएँ
o कार्य: आवेग/संदेश ग्रहण करना
2. कोशिका देह (Cell Body/Cyton):
o केंद्रक और कोशिका द्रव्य युक्त
o कार्य: सूचना का समेकन और प्रसंस्करण
3. ऐक्सॉन (Axon):
o लंबी नलिका जैसी संरचना
o माइलिन आवरण (myelin sheath) से ढकी
o कार्य: आवेग को आगे ले जाना
4. तंत्रिका अंत/ऐक्सॉन छोर (Axon Terminals):
o ऐक्सॉन के अंत में शाखाएँ
o कार्य: अगले न्यूरॉन या प्रभावक तक संदेश पहुँचाना
5. साइनैप्स (Synapse):
o दो न्यूरॉनों के बीच जोड़
o कार्य: रासायनिक न्यूरोट्रांसमीटर द्वारा संदेश का स्थानांतरण
Q3. मानव मस्तिष्क के भाग लिखिए और उनके प्रमुख कार्य समझाइए।
उत्तर:
मानव मस्तिष्क को तीन मुख्य भागों में बाँटा जाता है:
1. अग्र मस्तिष्क (Forebrain):
सेरिब्रम (Cerebrum):
· मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग
· कार्य:
o सोच-विचार, तर्क, बुद्धि
o स्मरण और सीखना
o ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण
o संवेदी अनुभूतियाँ (देखना, सुनना, स्वाद, गंध, स्पर्श)
2. मध्य मस्तिष्क (Midbrain):
· दृश्य और श्रवण प्रतिवर्तों में सहायता
3. पश्च मस्तिष्क (Hindbrain):
सेरिबेलम (Cerebellum):
· कार्य:
o शरीर का संतुलन
o मुद्रा (posture) बनाए रखना
o मांसपेशीय क्रियाओं का समन्वय
मेडुला ऑब्लोंगेटा (Medulla Oblongata):
· कार्य:
o अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण
o श्वसन दर
o हृदय की धड़कन
o रक्तचाप
o उल्टी, खाँसी, छींक का केंद्र
पोन्स (Pons):
· श्वसन की लय में सहायता
Q4. हार्मोन क्या हैं? अंत:स्रावी ग्रंथियों की भूमिका समझाइए तथा चार प्रमुख हार्मोन-कार्य लिखिए।
उत्तर:
हार्मोन:
हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक हैं जो अंत:स्रावी ग्रंथियाँ बनाती हैं और रक्त के माध्यम से लक्ष्य अंग तक पहुँचाकर क्रियाओं का नियंत्रण करती हैं ।
अंत:स्रावी ग्रंथियाँ:
· नलिकाविहीन (ductless) ग्रंथियाँ
· हार्मोन सीधे रक्त में स्रावित होते हैं
· शरीर की वृद्धि, उपापचय, प्रजनन आदि नियंत्रित करती हैं
चार प्रमुख हार्मोन:
1. वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone):
· ग्रंथि: पिट्यूटरी
· कार्य: शरीर की सामान्य वृद्धि और विकास
2. थायरॉक्सिन (Thyroxine):
· ग्रंथि: थायरॉइड
· कार्य: शरीर के उपापचय (metabolism) को नियंत्रित करना
· आवश्यकता: आयोडीन
· कमी: घेंघा रोग
3. इंसुलिन (Insulin):
· ग्रंथि: अग्न्याशय
· कार्य: रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करना
· कमी: मधुमेह (Diabetes)
4. एड्रेनालिन (Adrenaline):
· ग्रंथि: अधिवृक्क
· कार्य: आपातकालीन स्थिति में शरीर को तैयार करना
o हृदयगति और श्वसन तेज करना
o रक्त आपूर्ति मांसपेशियों की ओर
o "लड़ो या भागो" प्रतिक्रिया
पुनर्निवेश तंत्र (Feedback Mechanism):
हार्मोन के स्तर को संतुलित रखने की स्वनियामक प्रणाली ।
Q5. पौधों में नियंत्रण एवं समन्वय कैसे होता है? अनुवर्तन गतियों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
पौधों में नियंत्रण:
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, इसलिए नियंत्रण एवं समन्वय मुख्यतः पादप हार्मोन और वृद्धि गतियों द्वारा होता है ।
अनुवर्तन गतियाँ (Tropic Movements):
उत्तेजना की दिशा के अनुसार होने वाली वृद्धि गतियाँ।
उदाहरण:
1. प्रकाशानुवर्तन (Phototropism):
· तना प्रकाश की ओर मुड़ता है (धनात्मक)
· जड़ें प्रकाश से दूर बढ़ती हैं (ऋणात्मक)
· क्रियाविधि: ऑक्सिन हार्मोन छायावाली तरफ अधिक जमा होता है, जिससे वहाँ की कोशिकाएँ अधिक लंबी होती हैं और तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है
2. गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism):
· जड़ें गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ती हैं (धनात्मक)
· तना गुरुत्वाकर्षण के विपरीत बढ़ता है (ऋणात्मक)
3. जलानुवर्तन (Hydrotropism):
· जड़ें जल की ओर बढ़ती हैं
4. स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism):
· लतर (tendrils) सहारे को छूकर उस पर लिपट जाती हैं
5. रसायनानुवर्तन (Chemotropism):
· पराग नलिका अंडाशय की ओर बढ़ती है
अदिश गतियाँ (Nastic Movements):
दिशा पर निर्भर नहीं, जैसे छुई-मुई की पत्तियाँ छूने पर बंद होना ।
निष्कर्ष (Conclusion)
नियंत्रण एवं समन्वय जीवन की सबसे आवश्यक प्रक्रिया है जो सभी जीवित प्राणियों में पाई जाती है। यह वह तंत्र है जो शरीर के असंख्य अंगों और प्रणालियों को एक सुसंगठित इकाई के रूप में काम करने में सक्षम बनाता है। मनुष्य में यह कार्य दो मुख्य तंत्रों—तंत्रिका तंत्र और अंत:स्रावी तंत्र—द्वारा संपन्न होता है।
तंत्रिका तंत्र हमें बदलते वातावरण के प्रति तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रदान करता है। न्यूरॉन की अद्भुत संरचना और विद्युत आवेगों की तीव्र गति से यह संभव होता है। प्रतिवर्ती चाप जैसी विशेष व्यवस्थाएँ हमें आकस्मिक खतरों से बचाती हैं। मस्तिष्क, विशेषकर सेरिब्रम, हमें सोचने-समझने, सीखने, याद रखने और जटिल निर्णय लेने की शक्ति देता है। सेरिबेलम हमें संतुलित और समन्वित गतियाँ करने में मदद करता है, जबकि मेडुला जीवन के लिए अनिवार्य अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
दूसरी ओर, अंत:स्रावी तंत्र हार्मोन के माध्यम से धीमी लेकिन दीर्घकालिक नियंत्रण प्रदान करता है। थायरॉक्सिन हमारे उपापचय को नियंत्रित करता है और हमें ऊर्जावान रखता है। इंसुलिन रक्त शर्करा को संतुलित रखकर हमें मधुमेह से बचाता है। एड्रेनालिन आपात स्थिति में हमें तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार कर देता है। वृद्धि हार्मोन हमारे शारीरिक विकास को सुनिश्चित करता है। ये सभी हार्मोन पुनर्निवेश तंत्र के माध्यम से एक संतुलित स्तर पर बने रहते हैं।
पौधों में, जहाँ जटिल तंत्रिका तंत्र नहीं होता, वहाँ भी नियंत्रण एवं समन्वय पादप हार्मोन—विशेषकर ऑक्सिन—और विभिन्न अनुवर्तन गतियों के माध्यम से होता है। प्रकाशानुवर्तन में ऑक्सिन की भूमिका यह दर्शाती है कि कैसे सरल रासायनिक पदार्थ भी जटिल प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित कर सकते हैं।
याद रखें, नियंत्रण एवं समन्वय केवल जीव विज्ञान का विषय नहीं है—यह जीवन का मूलभूत सिद्धांत है जो हर जीवित प्राणी को कार्यशील बनाता है।
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