प्रथम विश्व युद्ध, खिलाफत और असहयोग आंदोलन
परिचय:
NCERT Class 10 History के Chapter 2 "Nationalism in India" का यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण section है। इसमें बताया गया है कि कैसे प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के बाद भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन ने नया रूप लिया। महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्याग्रह का नया तरीका, ब्रिटिश सरकार के दमनकारी कानून (Rowlatt Act 1919), जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 April 1919), खिलाफत आंदोलन और अंततः असहयोग आंदोलन (1920-22) – ये सभी घटनाएं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक मोड़ बने।
सत्याग्रह का विचार (The Idea of Satyagraha)
गांधी जी का दक्षिण अफ्रीका अनुभव
महात्मा गांधी 1915 में भारत लौटे, लेकिन उनका सत्याग्रह का विचार दक्षिण अफ्रीका में ही विकसित हुआ था।
सत्याग्रह = सत्य + आग्रह
· सत्य की शक्ति
· अहिंसक प्रतिरोध
· शारीरिक बल नहीं, आत्मिक बल
भारत में पहले सत्याग्रह (1916-1918)
गांधी जी ने भारत में तीन स्थानीय आंदोलनों में सत्याग्रह का प्रयोग किया:
|
स्थान |
वर्ष |
मुद्दा |
परिणाम |
|
चंपारण (बिहार) |
1916 |
नील किसानों पर अत्याचार, तिनकठिया प्रथा |
किसानों को राहत |
|
खेड़ा (गुजरात) |
1917 |
फसल खराब, लेकिन लगान माफी नहीं |
लगान स्थगित |
|
अहमदाबाद |
1918 |
मिल मजदूरों की हड़ताल |
मजदूरों को बढ़ोतरी |
सत्याग्रह की विशेषताएं
· अहिंसा – किसी को चोट नहीं पहुंचाना
· सत्य – नैतिक आधार पर खड़ा रहना
· आत्म-पीड़ा – उत्पीड़क को शर्मिंदा करना
· जन-भागीदारी – सभी वर्गों को शामिल करना
NCERT Point: गांधी
जी ने सत्याग्रह को
"सत्य की शक्ति" कहा
और इसे हिंसक प्रतिरोध
से बिल्कुल अलग बताया.
Chapter 1 "रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण"
प्रथम विश्व युद्ध और भारत
युद्ध का प्रभाव (1914-1918)
आर्थिक कठिनाइयाँ:
· रक्षा खर्च बढ़ा → करों में वृद्धि
· सीमा शुल्क बढ़ा → वस्तुओं के दाम बढ़े
· जबरन सेना भर्ती → गांवों में असंतोष
· 1918-19 और 1920-21 में फसल खराब → अकाल
महामारी:
· 1918-19: स्पेनिश फ्लू – 120-130 लाख लोगों की मौत
राजनीतिक असंतोष:
· ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों से युद्ध में मदद मांगी
· वादा किया "युद्ध के बाद self-government"
· लेकिन युद्ध के बाद दमनकारी कानून (Rowlatt Act)
Rowlatt Act 1919 – "काला कानून"
क्या था Rowlatt Act?
मार्च 1919 में ब्रिटिश सरकार ने Rowlatt Act पास किया।
मुख्य प्रावधान:
· बिना मुकदमा चलाए किसी को भी गिरफ्तार कर सकते थे
· बिना वारंट तलाशी
· राजनीतिक गतिविधियों पर रोक
· प्रेस की स्वतंत्रता खत्म
भारतीय प्रतिक्रिया:
· इसे "काला कानून" (Black Act) कहा गया
· गांधी जी ने इसे "शैतानी कानून" बताया
· पूरे देश में विरोध
गांधी जी का आह्वान
गांधी जी ने 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल (hartal) का आह्वान किया:
· दुकानें बंद
· रेलवे, कारखाने बंद
· शांतिपूर्ण प्रदर्शन
परिणाम: पंजाब और दिल्ली में हिंसा भड़क गई।
राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद: Class 10 history Notes.
जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 April 1919)
पृष्ठभूमि
· पंजाब में Rowlatt Act के विरोध में प्रदर्शन
· ब्रिटिश सरकार ने मार्शल लॉ लगा दिया
· दो लोकप्रिय नेता – Dr. Saifuddin Kitchlew और Dr. Satyapal को गिरफ्तार किया
13 अप्रैल 1919 – काला दिन
स्थान: जलियांवाला बाग, अमृतसर (पंजाब)
अवसर: बैसाखी का मेला + विरोध सभा
समय: शाम
घटना:
· लगभग 10,000-20,000 लोग बाग में इकट्ठे थे (बाग चारों ओर से बंद था, केवल एक संकरा रास्ता)
· जनरल डायर (General Dyer) ने सैनिकों को आदेश दिया
· बिना चेतावनी के गोलियां चलाईं
· लगभग 10 मिनट तक फायरिंग जारी रही
· लोग भागने की कोशिश में मारे गए, कुछ कुएं में कूद गए
आधिकारिक आंकड़े: 379 मरे
वास्तविक अनुमान: 1000+ मरे, हजारों घायल
प्रतिक्रिया
भारत में:
· पूरे देश में गुस्सा
· रवींद्रनाथ टैगोर ने "नाइटहुड" (knighthood) वापस कर दिया
· गांधी जी ने "Kaiser-i-Hind" उपाधि वापस की
ब्रिटेन में:
· Hunter Commission बनाई गई (कमजोर जांच)
· डायर को सेवा से हटाया, लेकिन कोई सजा नहीं
खिलाफत आंदोलन (Khilafat Movement)
पृष्ठभूमि
खलीफा (Caliph): इस्लाम का आध्यात्मिक नेता, तुर्की (Ottoman Empire) के सुल्तान
समस्या:
· WWI में Ottoman Empire की हार
· ब्रिटेन और मित्र देशों ने तुर्की पर कठोर संधि थोपी
· खलीफा की शक्तियां छीनने का खतरा
· भारतीय मुसलमानों में असंतोष
आंदोलन की शुरुआत (1919)
नेता:
· Muhammad Ali
· Shaukat Ali (अली बंधु)
· Maulana Abul Kalam Azad
मांग: खलीफा की स्थिति बहाल हो, तुर्की को न्याय मिले
गांधी जी का समर्थन
गांधी जी ने देखा कि:
· हिंदू-मुस्लिम एकता का मौका
· ब्रिटिश विरोध में दोनों समुदाय साथ आ सकते हैं
· राष्ट्रीय आंदोलन मजबूत होगा
Class 10 History (NCERT) | Chapter 1: “राष्ट्र की दृश्य कल्पना” – अब बिल्कुल आसान!
असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement 1920-22)
शुरुआत
सितंबर 1920 में गांधी जी ने कलकत्ता (Calcutta) में Congress के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव रखा।
दिसंबर 1920 में नागपुर अधिवेशन में आंदोलन को औपचारिक मंजूरी मिली।
असहयोग का मतलब
ब्रिटिश सरकार को किसी भी तरह का सहयोग न देना:
राजनीतिक:
· सरकारी उपाधियों और पदों का त्याग
· विधान परिषदों का बहिष्कार
आर्थिक:
· विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार
· स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग
· खादी पहनना
सामाजिक:
· सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार
· राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान खोलना
· वकीलों द्वारा अदालतों का बहिष्कार
Exam Table:
|
क्षेत्र |
असहयोग के तरीके |
|
राजनीतिक |
उपाधियां वापस, चुनाव बहिष्कार |
|
आर्थिक |
विदेशी कपड़े बहिष्कार, स्वदेशी |
|
सामाजिक |
स्कूल-कॉलेज छोड़ना, राष्ट्रीय संस्थान |
|
न्यायिक |
अदालतों का बहिष्कार |
आंदोलन का फैलाव
शहरों में
· मध्यम वर्ग ने बड़े पैमाने पर भाग लिया
· विदेशी कपड़ों का आयात 1921-22 में आधा हो गया
· व्यापारियों ने विदेशी सामान खरीदना बंद किया
गांवों में
· किसानों ने लगान न देने का आंदोलन शुरू किया
· अवध (Oudh) में किसान आंदोलन – बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में
· आंध्र प्रदेश में आदिवासी विद्रोह – Alluri Sitaram Raju
मजदूरों में
· रेलवे वर्कशॉप, बागानों (plantations) में हड़तालें
· अपनी-अपनी व्याख्या से आंदोलन में शामिल हुए
चौरी चौरा घटना और आंदोलन की समाप्ति
चौरी चौरा (5 फरवरी 1922)
स्थान: चौरी चौरा, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
घटना:
· एक शांतिपूर्ण जुलूस पर पुलिस ने गोली चलाई
· भीड़ नियंत्रण से बाहर हो गई
· 22 पुलिसकर्मियों को थाने में जिंदा जला दिया
गांधी जी की प्रतिक्रिया
· गांधी जी बहुत दुखी हुए
· उन्होंने कहा: "आंदोलन हिंसक हो गया है"
· 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन वापस ले लिया
नेताओं की प्रतिक्रिया
· Jawaharlal Nehru, Subhas Chandra Bose जैसे युवा नेता निराश हुए
· उन्हें लगा कि आंदोलन अपने चरम पर था, वापस लेना गलत था
· लेकिन गांधी जी का मानना था: "हिंसक साधन से स्वराज नहीं आ सकता"
असहयोग आंदोलन के परिणाम
सकारात्मक
✅ पहली बार जन-आंदोलन – लाखों लोगों ने भाग लिया
✅ सभी वर्ग शामिल – किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग, छात्र
✅ हिंदू-मुस्लिम एकता (खिलाफत के साथ)
✅ स्वदेशी और खादी राष्ट्रीय प्रतीक बने
✅ लोगों को ब्रिटिश सरकार से डर खत्म हुआ
नकारात्मक
❌ आंदोलन अचानक वापस लेने से निराशा
❌ खिलाफत मुद्दा अंततः असफल
(1924 में तुर्की ने खुद खलीफा पद खत्म किया)
❌ हिंदू-मुस्लिम एकता अस्थायी
साबित हुई
"जर्मनी और इटली का निर्माण" – NCERT के exact points पर सरल हिंदी notes!
📝 10 MCQs
1. महात्मा गांधी
ने भारत
में सत्याग्रह
का पहला
प्रयोग कहाँ
किया?
a) खेड़ा
b) चंपारण
c) अहमदाबाद
d) बारदोली
उत्तर: b) चंपारण (1916)
(CBSE 2019, Delhi)
2. Rowlatt Act कब पास
किया गया?
a) फरवरी 1919
b) मार्च 1919
c) अप्रैल 1919
d) मई 1919
उत्तर: b) मार्च 1919
(CBSE 2020, All India)
3. जलियांवाला बाग
हत्याकांड कब
हुआ?
a) 6 अप्रैल 1919
b) 10 अप्रैल 1919
c) 13 अप्रैल 1919
d) 18 अप्रैल 1919
उत्तर: c) 13 अप्रैल 1919
(CBSE 2018)
4. जलियांवाला बाग
में गोलीबारी
का आदेश
किसने दिया?
a) लॉर्ड कर्जन
b) जनरल डायर
c) लॉर्ड इरविन
d) माइकल ओ'ड्वायर
उत्तर: b) जनरल डायर
(General Dyer)
(CBSE 2021, Term-1)
5. रवींद्रनाथ टैगोर
ने जलियांवाला
बाग के
विरोध में
क्या वापस
किया?
a) पद्म भूषण
b) नाइटहुड (Knighthood)
c) भारत रत्न
d) विक्टोरिया क्रॉस
उत्तर: b) नाइटहुड (Knighthood)
(CBSE 2019, Compartment)
6. खिलाफत आंदोलन
का मुख्य
उद्देश्य क्या
था?
a) भारत की स्वतंत्रता
b) तुर्की के खलीफा की शक्तियां बहाल करना
c) साइमन कमीशन का विरोध
d) सांप्रदायिक एकता
उत्तर: b) तुर्की के
खलीफा की
शक्तियां बहाल
करना
(CBSE 2020, Delhi)
7. असहयोग आंदोलन
को Congress की मंजूरी
कब मिली?
a) सितंबर 1920
b) अक्टूबर 1920
c) दिसंबर 1920 (नागपुर
अधिवेशन)
d) जनवरी 1921
उत्तर: c) दिसंबर 1920 (नागपुर अधिवेशन)
(CBSE 2018, All India)
8. चौरी चौरा
घटना कहाँ
हुई?
a) बिहार
b) उत्तर प्रदेश
c) पंजाब
d) बंगाल
उत्तर: b) उत्तर प्रदेश
(गोरखपुर)
(CBSE 2017, Outside Delhi)
9. चौरी चौरा
घटना किस
तारीख को
हुई?
a) 4 फरवरी 1922
b) 5 फरवरी 1922
c) 12 फरवरी 1922
d) 15 फरवरी 1922
उत्तर: b) 5 फरवरी 1922
(CBSE 2022, Term-1)
10. गांधी जी
ने असहयोग
आंदोलन कब
वापस लिया?
a) 5 फरवरी 1922
b) 10 फरवरी 1922
c) 12 फरवरी 1922
d) 20 फरवरी 1922
उत्तर: c) 12 फरवरी 1922
(CBSE 2019, Delhi)
क्रांतियों का युग 1830–1848: Complete Notes
✍️ Very Short Answer
1. सत्याग्रह का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सत्याग्रह = सत्य + आग्रह। यह अहिंसक प्रतिरोध का तरीका है जिसमें सत्य और नैतिकता के आधार पर अन्याय का विरोध किया जाता है, बिना हिंसा के।
2. Rowlatt Act को "काला कानून" क्यों
कहा गया?
उत्तर: Rowlatt Act बिना मुकदमा चलाए किसी को भी गिरफ्तार करने की शक्ति देता था। यह दमनकारी और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन था, इसलिए इसे "काला कानून" कहा गया।
3. जलियांवाला बाग में कितने लोग मारे गए?
उत्तर: आधिकारिक आंकड़े 379 मृतकों
के हैं, लेकिन वास्तविक संख्या 1000+ मानी जाती है। हजारों घायल हुए।
4. खिलाफत आंदोलन के दो मुख्य नेताओं के नाम लिखें।
उत्तर: मुहम्मद अली और शौकत अली (अली बंधु), मौलाना अबुल कलाम आज़ाद।
5. चौरी चौरा घटना में क्या हुआ था?
उत्तर: 5 फरवरी 1922 को चौरी चौरा (गोरखपुर) में भीड़ ने थाने में 22 पुलिसकर्मियों को जिंदा जला दिया। इससे गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
📚 5 Short Answer
1. भारत में
सत्याग्रह के
तीन प्रारंभिक
प्रयोगों का
वर्णन कीजिए।
(CBSE 2019, All India + 2020, Delhi – बहुत important)
उत्तर:
|
स्थान |
वर्ष |
मुद्दा |
|
चंपारण (बिहार) |
1916 |
नील किसानों पर अत्याचार, तिनकठिया प्रथा के खिलाफ |
|
खेड़ा (गुजरात) |
1917 |
फसल खराब होने पर भी लगान वसूली के विरोध में |
|
अहमदाबाद |
1918 |
कपड़ा मिल मजदूरों की बेहतर वेतन की मांग |
परिणाम: तीनों जगह सत्याग्रह सफल रहा और गांधी जी की प्रसिद्धि बढ़ी।
2. Rowlatt Act की मुख्य
विशेषताएं और
भारतीयों की
प्रतिक्रिया लिखिए।
(CBSE 2018, Outside
Delhi + 2021, Term-2)
उत्तर:
विशेषताएं:
· बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तारी
· बिना वारंट तलाशी
· प्रेस पर प्रतिबंध
· राजनीतिक गतिविधियों पर रोक
प्रतिक्रिया:
· गांधी जी ने 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया
· पूरे देश में विरोध प्रदर्शन
· इसे "काला कानून" और "शैतानी कानून" कहा गया
3. जलियांवाला बाग
हत्याकांड का
संक्षिप्त विवरण
दीजिए।
(CBSE 2017, Delhi +
2019, Outside Delhi – हर साल आता है)
उत्तर:
तारीख: 13 अप्रैल 1919
स्थान: जलियांवाला बाग, अमृतसर (पंजाब)
घटना:
· बैसाखी के मेले और Rowlatt Act विरोध के लिए 10,000-20,000 लोग इकट्ठे थे
· जनरल डायर ने बिना चेतावनी के गोलीबारी का आदेश दिया
· लगभग 10 मिनट तक फायरिंग
· 1000+ लोग मारे गए, हजारों घायल
प्रभाव: रवींद्रनाथ टैगोर ने knighthood वापस की, पूरे देश में गुस्सा।
4. खिलाफत आंदोलन
क्यों शुरू
हुआ? गांधी
जी ने
इसका समर्थन
क्यों किया?
(CBSE 2020, All India +
2018, Compartment)
उत्तर:
कारण:
· WWI में तुर्की (Ottoman Empire) की हार
· ब्रिटेन और मित्र देशों ने तुर्की पर कठोर संधि थोपी
· खलीफा (इस्लाम के आध्यात्मिक नेता) की शक्तियां छीनने का खतरा
· भारतीय मुसलमानों में असंतोष
गांधी जी का समर्थन:
· हिंदू-मुस्लिम एकता का सुनहरा अवसर
· ब्रिटिश विरोध में दोनों समुदाय साथ आ सकते थे
· राष्ट्रीय आंदोलन मजबूत होता
5. असहयोग आंदोलन
की मुख्य
विशेषताएं लिखिए।
(CBSE 2019, Delhi +
2022, Term-2)
उत्तर:
विशेषताएं:
1. राजनीतिक: सरकारी उपाधियों और पदों का त्याग, विधान परिषदों का बहिष्कार
2. आर्थिक: विदेशी वस्तुओं (खासकर कपड़े) का बहिष्कार, स्वदेशी और खादी का प्रचार
3. सामाजिक: सरकारी स्कूलों-कॉलेजों का बहिष्कार, राष्ट्रीय संस्थान खोलना
4. न्यायिक: अदालतों का बहिष्कार
5. अहिंसक: पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीका
📖 Long Answer Questions
1. चौरी चौरा
घटना का
वर्णन करते
हुए बताइए
कि गांधी
जी ने
असहयोग आंदोलन
क्यों वापस
लिया। इस
निर्णय पर
नेताओं की
क्या प्रतिक्रिया
थी?
(CBSE 2019, All India +
2020, Outside Delhi – Most Important 5 Marker)
उत्तर:
परिचय:
असहयोग आंदोलन 1920-22 अपने चरम पर था, लेकिन चौरी चौरा की हिंसक घटना ने इसे अचानक रोक दिया।
चौरी चौरा घटना (5 फरवरी 1922):
स्थान: चौरी चौरा, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
घटना:
· असहयोग आंदोलन के समर्थकों का शांतिपूर्ण जुलूस निकल रहा था
· पुलिस ने भीड़ पर गोली चला दी
· भीड़ नियंत्रण से बाहर हो गई और हिंसक हो गई
· 22 पुलिसकर्मियों को थाने में बंद करके जिंदा जला दिया गया
गांधी जी का निर्णय:
· गांधी जी बेहद दुखी और निराश हुए
· उन्होंने कहा: "आंदोलन हिंसक रास्ते पर जा रहा है"
· उनका मानना था कि हिंसक साधनों से प्राप्त स्वराज का कोई अर्थ नहीं
· 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन वापस ले लिया
नेताओं की प्रतिक्रिया:
· Jawaharlal Nehru, Subhas Chandra Bose और अन्य युवा नेता बहुत निराश हुए
· उन्हें लगा कि आंदोलन अपने चरम पर था और वापस लेना गलत था
· लेकिन गांधी जी दृढ़ थे कि अहिंसा से कोई समझौता नहीं
निष्कर्ष:
यह घटना गांधी जी के अहिंसा के सिद्धांत के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता दिखाती है, भले ही इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी।
2. जलियांवाला बाग
हत्याकांड के
कारण, घटना
और परिणामों
का विस्तृत
वर्णन कीजिए।
(CBSE 2018, Delhi + 2019,
Compartment + 2021, Term-2 – बार-बार आने वाला)
उत्तर:
परिचय:
जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय इतिहास की सबसे दुखद और क्रूर घटनाओं में से एक है, जिसने ब्रिटिश शासन की वास्तविकता उजागर कर दी।
कारण:
1. Rowlatt Act (मार्च 1919): दमनकारी कानून के विरोध में पंजाब में तीव्र आंदोलन
2. नेताओं की गिरफ्तारी: Dr. Satyapal और Dr. Saifuddin Kitchlew को गिरफ्तार किया गया
3. मार्शल लॉ: पंजाब में मार्शल लॉ लागू, सभा-जुलूस पर प्रतिबंध
घटना (13 अप्रैल 1919):
स्थान: जलियांवाला बाग, अमृतसर
अवसर: बैसाखी का मेला + विरोध सभा
समय: शाम का समय
· लगभग 10,000-20,000 लोग बाग में इकट्ठे थे (बाग चारों ओर से दीवारों से घिरा था, केवल एक संकरा रास्ता)
· जनरल डायर 50 सैनिकों के साथ आया
· बिना कोई चेतावनी दिए सीधे गोलीबारी का आदेश दिया
· लगभग 10 मिनट तक गोलियां चलती रहीं
· लोग भागने की कोशिश में कुचल गए, कुछ कुएं में कूद गए
आंकड़े:
· आधिकारिक: 379 मृतक, 1200 घायल
· वास्तविक अनुमान: 1000+ मृतक
परिणाम:
1. राष्ट्रीय स्तर पर:
· पूरे देश में आक्रोश और गुस्सा
· रवींद्रनाथ टैगोर ने "नाइटहुड" वापस कर दिया
· गांधी जी ने "Kaiser-i-Hind" उपाधि लौटा दी
· लाखों लोग राष्ट्रवादी आंदोलन में शामिल हुए
2. ब्रिटिश प्रतिक्रिया:
· Hunter Commission की गई (सतही जांच)
· डायर को सेवा से हटाया गया, लेकिन कोई सजा नहीं
· ब्रिटेन में कुछ लोगों ने डायर का बचाव भी किया
निष्कर्ष:
जलियांवाला बाग ने ब्रिटिश राज का असली चेहरा दिखाया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई गति दी। यह घटना भारतीयों के मन में अंग्रेजों के प्रति नफरत की भावना पैदा करने में निर्णायक साबित हुई।
3. असहयोग आंदोलन
के कारण,
कार्यक्रम और
परिणामों का
विस्तृत विवरण
दीजिए।
(CBSE 2017, Outside
Delhi + 2020, All India + 2022, Term-2)
उत्तर:
परिचय:
असहयोग आंदोलन (1920-22) भारतीय
राष्ट्रीय आंदोलन का पहला बड़े पैमाने का जन-आंदोलन था, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया।
कारण:
1. Rowlatt Act (1919): दमनकारी कानून ने लोगों को नाराज किया
2. जलियांवाला बाग (13 अप्रैल 1919): क्रूर हत्याकांड ने देश को झकझोर दिया
3. खिलाफत आंदोलन: मुसलमानों का तुर्की के खलीफा के समर्थन में आंदोलन
4. आर्थिक कठिनाइयां: WWI के बाद महंगाई, कर वृद्धि, फसल खराब
5. राजनीतिक निराशा: ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के बाद self-government का वादा नहीं निभाया
कार्यक्रम (शुरुआत: सितंबर 1920 / मंजूरी: दिसंबर 1920 नागपुर):
असहयोग के तरीके:
|
क्षेत्र |
कार्यक्रम |
|
राजनीतिक |
सरकारी उपाधियां और पद छोड़ना, विधान परिषदों का बहिष्कार |
|
आर्थिक |
विदेशी कपड़े का बहिष्कार, स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग, खादी पहनना |
|
सामाजिक |
सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़ना, राष्ट्रीय संस्थान खोलना |
|
न्यायिक |
अदालतों का बहिष्कार |
जन-भागीदारी:
· छात्रों ने स्कूल-कॉलेज छोड़े
· Motilal Nehru, CR Das जैसे वकीलों ने प्रैक्टिस छोड़ी
· विदेशी कपड़े सार्वजनिक रूप से जलाए गए
· खादी राष्ट्रीय प्रतीक बनी
परिणाम:
सकारात्मक:
✅ पहली बार लाखों आम लोगों ने भाग लिया
✅ सभी वर्ग शामिल – किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग, छात्र
✅ हिंदू-मुस्लिम एकता (खिलाफत के साथ)
✅ स्वदेशी और खादी राष्ट्रीय प्रतीक बने
✅ विदेशी कपड़े का आयात आधा हो गया (1921-22)
✅ लोगों में राष्ट्रीय चेतना और आत्मविश्वास बढ़ा
नकारात्मक:
❌ चौरी चौरा (5 फरवरी 1922) की हिंसक घटना के बाद गांधी जी ने आंदोलन वापस ले लिया (12 फरवरी
1922)
❌ कई नेता इस निर्णय से निराश हुए
❌ खिलाफत मुद्दा 1924 में खत्म हो गया (तुर्की ने खुद खलीफा पद समाप्त किया)
❌ हिंदू-मुस्लिम एकता अस्थायी साबित हुई
निष्कर्ष:
असहयोग आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक नया अध्याय खोला। यह पहली बार था जब आम भारतीय बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुए। हालांकि आंदोलन अचानक वापस लिया गया, लेकिन इसने साबित किया कि अहिंसक प्रतिरोध से ब्रिटिश सरकार को चुनौती दी जा सकती है।
4. खिलाफत आंदोलन
का संक्षिप्त
इतिहास लिखते
हुए बताइए
कि गांधी
जी ने
इसका समर्थन
क्यों किया?
इसका असहयोग
आंदोलन से
क्या संबंध
था?
(CBSE 2018, All India +
2020, Delhi)
उत्तर:
परिचय:
खिलाफत आंदोलन एक धार्मिक-राजनीतिक आंदोलन था जो अंततः भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़ गया।
खिलाफत आंदोलन की पृष्ठभूमि:
खलीफा: इस्लाम का आध्यात्मिक नेता, तुर्की (Ottoman Empire) के सुल्तान
समस्या:
· WWI (1914-18) में Ottoman Empire की हार
· ब्रिटेन और मित्र देशों ने तुर्की पर कठोर संधि थोपी
· खलीफा की शक्तियां छीनने का खतरा
· भारतीय मुसलमानों में तीव्र असंतोष
आंदोलन की शुरुआत (1919):
नेता:
· मुहम्मद अली और शौकत अली (अली बंधु)
· मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
· हसरत मोहानी
मांग: खलीफा की स्थिति बहाल हो, तुर्की के साथ न्याय हो
गांधी जी का समर्थन – कारण:
1. हिंदू-मुस्लिम एकता का अवसर:
· गांधी जी ने देखा कि यह दोनों समुदायों को एकजुट करने का सुनहरा मौका है
· साम्प्रदायिक सद्भाव राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत कर सकता था
2. ब्रिटिश विरोध:
· खिलाफत मुद्दा ब्रिटिश सरकार के खिलाफ था
· दोनों समुदाय एक साझा दुश्मन के खिलाफ लड़ सकते थे
3. जन-आंदोलन का विस्तार:
· मुस्लिम समुदाय की बड़ी भागीदारी से आंदोलन शक्तिशाली बनता
असहयोग से संबंध:
1. दोनों आंदोलन साथ-साथ (1920-22):
· खिलाफत आंदोलन को असहयोग आंदोलन के साथ जोड़ दिया गया
· गांधी जी ने दोनों को एक बताया
2. संयुक्त रणनीति:
· दोनों में अहिंसक असहयोग के तरीके अपनाए गए
· बहिष्कार, प्रदर्शन, सत्याग्रह
3. Congress-Muslim League सहयोग:
· दोनों संगठन एक मंच पर आए
· संयुक्त नेतृत्व
परिणाम:
सकारात्मक:
· 1920-22 में हिंदू-मुस्लिम एकता का बेहतरीन दौर
· असहयोग आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला
नकारात्मक:
· 1924 में तुर्की ने खुद खलीफा पद समाप्त कर दिया
· खिलाफत मुद्दा असफल हो गया
· हिंदू-मुस्लिम एकता अस्थायी साबित हुई
· बाद में सांप्रदायिक तनाव बढ़े
निष्कर्ष:
खिलाफत आंदोलन ने अस्थायी रूप से ही सही, लेकिन साम्प्रदायिक एकता का एक उदाहरण पेश किया। गांधी जी की रणनीति ने राष्ट्रीय आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
“यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण: कुलीन वर्ग, मध्यम वर्ग और उदारवाद – Class 10 History Notes”
निष्कर्ष
प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारत में राष्ट्रवाद ने एक नया और व्यापक रूप लिया। महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्याग्रह और असहयोग जैसे अहिंसक तरीकों ने लाखों साधारण भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल किया। Rowlatt Act और जलियांवाला बाग ने ब्रिटिश शासन की क्रूरता को उजागर किया, जबकि खिलाफत आंदोलन ने (अस्थायी ही सही) हिंदू-मुस्लिम एकता दिखाई। असहयोग आंदोलन ने साबित किया कि अहिंसक प्रतिरोध से भी सरकार को चुनौती दी जा सकती है। हालांकि चौरी चौरा की हिंसा ने आंदोलन को रोक दिया, लेकिन इसने भारतीय राष्ट्रवाद की नींव मजबूत कर दी।
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