गुरुवार, 15 जनवरी 2026

आंदोलन में विभिन्न धाराएं – शहर, गांव और बागानों में स्वराज | कक्षा 10 इतिहास | Class 10 Social Science Notes PDF Download.

आंदोलन में विभिन्न धाराएं

परिचय:


असहयोग-खिलाफत आंदोलन (1921-22) सिर्फ एक राजनीतिक आंदोलन नहीं थायह एक जन-आंदोलन था जिसमें अलग-अलग सामाजिक समूहों ने अपनी-अपनी समझ और आकांक्षाओं के साथ भाग लिया। NCERT में स्पष्ट लिखा है: "सभी ने 'स्वराज' की पुकार का जवाब दिया, लेकिन यह शब्द अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग मतलब रखता था।"

इस section में हम देखेंगे कि शहरों में मध्यम वर्ग, गांवों में किसान-आदिवासी और बागानों में मजदूरों ने आंदोलन को अपने तरीके से समझा और उसमें शामिल हुए।

आंदोलन में विभिन्न धाराएं-| कक्षा 10 इतिहास | Class 10 Social Science Notes.

शहरों में आंदोलन (The Movement in the Towns)

 

मध्यम वर्ग का नेतृत्व

आंदोलन की शुरुआत शहरों के मध्यम वर्ग से हुई

प्रमुख भागीदार:

·       छात्र (Students)

·       शिक्षक (Teachers)

·       वकील (Lawyers)

·       व्यापारी (Traders)

शहरों में भागीदारी के तरीके

वर्ग

योगदान

उदाहरण

छात्र

सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़े, राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों में दाखिला

हजारों छात्रों ने बहिष्कार किया

शिक्षक

सरकारी नौकरी छोड़ी, राष्ट्रीय स्कूलों में पढ़ाना शुरू किया

हेडमास्टर भी शामिल

वकील

अदालतों का बहिष्कार, कानूनी प्रैक्टिस बंद की

Motilal Nehru, CR Das

व्यापारी

विदेशी सामान बेचना बंद, स्वदेशी को बढ़ावा

आयात में गिरावट

 

आर्थिक प्रभावसबसे नाटकीय

विदेशी कपड़ों का बहिष्कार:

·       1921-22 में विदेशी कपड़ों का आयात आधा हो गया

·       लोगों ने सार्वजनिक रूप से विदेशी कपड़े जलाए

·       खादी और स्वदेशी वस्त्रों की मांग बढ़ी

भारतीय उद्योग को लाभ:

·       Indian textile mills और handlooms का उत्पादन बढ़ा

·       मध्यम वर्ग और व्यापारी वर्ग ने स्वदेशी को बढ़ावा दिया

आंदोलन धीमा क्यों पड़ा?

1. खादी महंगी थी:

·       आम लोगों के लिए खादी खरीदना मुश्किल

·       सस्ते mill के कपड़े की जरूरत थी

2. राष्ट्रीय संस्थानों की कमी:

·       वैकल्पिक शिक्षण संस्थान कम थे

·       छात्र-शिक्षक वापस सरकारी संस्थानों में लौटे

3. वकीलों की वापसी:

·       कानूनी practice छोड़ना आर्थिक रूप से मुश्किल था

·       धीरे-धीरे वकील सरकारी अदालतों में वापस आए

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्रोह (Rebellion in the Countryside)

 

आंदोलन गांवों में फैला

असहयोग आंदोलन शहरों से गांवों में फैल गया और इसमें किसानों और आदिवासियों के संघर्ष शामिल हो गए।

महत्वपूर्ण: ग्रामीण क्षेत्रों में आंदोलन ने अलग रूप लिया – Congress leadership इससे अक्सर असहज थी।

"प्रथम विश्व युद्ध, खिलाफत और असहयोग आंदोलन" – गांधी जी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रवाद का नया दौर!


अवध (Awadh) में किसान आंदोलन

नेतृत्व: बाबा रामचंद्र

बाबा रामचंद्र एक संन्यासी थे जो पहले Fiji में indentured labourer (गिरमिटिया मजदूर) के रूप में काम कर चुके थे

किसानों की समस्याएं

1. तालुकदार और ज़मींदार का शोषण:

·       बहुत ऊंचा किराया (rent) मांगते थे

·       कई तरह के अतिरिक्त कर (cesses)

2. बेगार प्रथा:

·       किसानों को बिना मज़दूरी के ज़मींदारों के खेतों में काम करना पड़ता था

3. tenure की असुरक्षा:

·       किसान regularly बेदखल कर दिए जाते थे

·       उन्हें लीज़ की ज़मीन पर कोई अधिकार नहीं मिलता था

आंदोलन की मांगें

लगान (revenue) में कमी
बेगार की प्रथा खत्म हो
शोषक ज़मींदारों का सामाजिक बहिष्कार

नई-धोबी बंद (Nai-Dhobi Bandh)

कई जगह पंचायतों ने "नई-धोबी बंद" का आयोजन किया:

·       नाई (barbers) और धोबी (washermen) ने ज़मींदारों को सेवा देना बंद कर दिया

·       यह सामाजिक दबाव का शक्तिशाली तरीका था

Jawaharlal Nehru की भूमिका

जून 1920: Jawaharlal Nehru ने अवध के गांवों में जाना शुरू किया, किसानों की समस्याएं समझीं

अक्टूबर 1920: Oudh Kisan Sabha की स्थापना

·       नेतृत्व: Jawaharlal Nehru, बाबा रामचंद्र और अन्य

·       एक महीने में 300+ शाखाएं गांवों में खुल गईं

आंदोलन का कठोर रूप (1921)

जैसे-जैसे आंदोलन फैला, इसने हिंसक रूप ले लिया (Congress नेतृत्व को यह पसंद नहीं था):

·       तालुकदारों और व्यापारियों के घरों पर हमले

·       बाज़ारों को लूटा गया

·       अनाज के भंडार पर कब्ज़ा किया गया

स्थानीय नेताओं का दावा:

·       "गांधी जी ने कहा है कि कोई टैक्स नहीं देना"

·       "ज़मीन गरीबों में बांट दी जाएगी"

·       महात्मा के नाम का इस्तेमाल हर कार्रवाई को जायज़ ठहराने के लिए किया गया

Chapter 1 "रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण" complete किया? 

 

आदिवासी विद्रोहगुडेम हिल्स (Andhra Pradesh)

 

स्थान और समुदाय

Gudem Hills (गुडेम पहाड़ियां), आंध्र प्रदेश में आदिवासी किसानों ने अपना अलग संघर्ष शुरू किया

मुख्य मुद्दा: जंगलों तक पहुंच

औपनिवेशिक सरकार ने:

·       जंगलों को बंद कर दिया (forest closure)

·       आदिवासियों को पारंपरिक अधिकारों से वंचित किया

·       जंगल से लकड़ी, फल, जड़ी-बूटी लेना प्रतिबंधित

स्वराज की अलग व्याख्या

आदिवासियों ने "स्वराज" का मतलब समझा:

·       जंगलों पर अपना पुराना अधिकार वापस मिलना

·       औपनिवेशिक प्रतिबंधों से मुक्ति

·       बल प्रयोग (force) से भारत को आज़ाद कराना ही एकमात्र रास्ता

नेता: अल्लूरी सीताराम राजू

Alluri Sitaram Raju एक करिश्माई नेता थे:

·       उन्होंने दावा किया कि उनके पास विशेष शक्तियां हैं

·       खुद को divine incarnation (ईश्वर का अवतार) बताया

·       लोग उन्हें जादुई शक्तियों वाला मानते थे

आंदोलन का स्वरूप – Guerrilla Warfare

गांधी जी से प्रेरणा (लेकिन अहिंसा नहीं):

·       आदिवासियों ने गांधी जी का सम्मान किया

·       खादी पहनी, शराब छोड़ी

·       लेकिन अहिंसा स्वीकार नहीं कीउन्हें लगा force ज़रूरी है

Guerrilla warfare (छापामार युद्ध):

·       विद्रोहियों ने पुलिस थानों पर हमले किए

·       हथियार लूटे

·       जंगलों में छिपकर लड़ाई

Contrast: Alluri Sitaram Raju ने बल प्रयोग को उचित माना, जबकि गांधी जी अहिंसा में विश्वास करते थे

"राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद (nationalism & Imperalism)(Balkans)"

बागानों में स्वराज (Swaraj in the Plantations)

 

बागान मजदूरों की समस्या

Assam और अन्य जगहों पर tea plantations में मजदूर काम करते थे

1. Inland Emigration Act of 1859:

·       बागान मजदूरों को बिना permission के बागान छोड़ना मना था

·       यह कानून उन्हें बंधुआ मजदूर जैसी स्थिति में रखता था

2. कठोर परिस्थितियां:

·       कम मज़दूरी

·       अमानवीय व्यवहार

·       गांव जाने की आज़ादी नहीं

स्वराज का मतलबगांव लौटना

बागान मजदूरों ने समझा:

·       "गांधी राज" आने वाला है

·       Gandhi Raj में हर किसी को अपने गांव में ज़मीन मिलेगी

·       अब बागान में काम करने की ज़रूरत नहीं

1921 में हज़ारों मजदूर बागान छोड़कर चल पड़े

हज़ारों मजदूर असम के बागानों से अपने गांवों की तरफ चल पड़े

बाधाएं:

·       रास्ते में railway और steamer strike हो गई

·       पुलिस ने रोका और बेरहमी से पीटा (brutal repression)

·       बहुत कम मजदूर अपने गंतव्य तक पहुंच पाए

Lesson: मजदूरों ने स्वराज को अपनी तरह से समझागांव लौटने और ज़मीन पाने की आज़ादी

Class 10 History (NCERT) | Chapter 1: “राष्ट्र की दृश्य कल्पना” – अब बिल्कुल आसान!

आंदोलन में विविधताएक नज़र में

 

क्षेत्र

नेता/समुदाय

मुख्य मुद्दा

स्वराज का मतलब

तरीका

शहर

मध्यम वर्ग, छात्र, वकील

विदेशी संस्थानों का बहिष्कार, स्वदेशी

राजनीतिक स्वतंत्रता

अहिंसक बहिष्कार

अवध (ग्रामीण)

बाबा रामचंद्र, किसान

ज़मींदारों का शोषण, बेगार

लगान में कमी, ज़मीन पर अधिकार

सामाजिक बहिष्कार, कभी-कभी हिंसा

गुडेम हिल्स

Alluri Sitaram Raju, आदिवासी

जंगल बंद, पारंपरिक अधिकार

जंगलों पर अधिकार वापस

Guerrilla warfare (बल प्रयोग)

असम बागान

Plantation workers

Inland Emigration Act, बंधुआ मज़दूरी

गांव लौटना, ज़मीन पाना

बागान छोड़कर भागना



Congress
और विविध धाराएं

 

Congress का प्रयास

Congress (गांधी जी के नेतृत्व में) ने कोशिश की कि:

·       अवध के किसान संघर्ष को wider struggle में integrate करे

·       सभी समूहों को एक movement में लाए

समस्या

·       ग्रामीण आंदोलन ने अक्सर हिंसक रूप ले लिया

·       Congress programme से अलग विकसित हुआ

·       स्थानीय नेता गांधी जी का नाम लेकर अपने मुद्दे उठाने लगे

NCERT का महत्वपूर्ण बिंदु:
"
एकता बिना संघर्ष के नहीं उभरी।" (Unity did not emerge without conflict.)

"जर्मनी और इटली का निर्माण" – NCERT के exact points पर सरल हिंदी notes!


चौरी
चौरा घटना और आंदोलन की समाप्ति

 

चौरी चौरा (5 फरवरी 1922)

स्थान: चौरी चौरा, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)

घटना:

·       एक शांतिपूर्ण जुलूस पर पुलिस ने गोली चलाई

·       भीड़ नियंत्रण से बाहर हो गई

·       22 पुलिसकर्मियों को थाने में जिंदा जला दिया

गांधी जी की प्रतिक्रिया

·       गांधी जी बहुत दुखी हुए

·       उन्होंने कहा: "आंदोलन हिंसक हो गया है"

·       12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन वापस ले लिया

नेताओं की प्रतिक्रिया

·       Jawaharlal Nehru, Subhas Chandra Bose जैसे युवा नेता निराश हुए

·       उन्हें लगा कि आंदोलन अपने चरम पर था, वापस लेना गलत था

·       लेकिन गांधी जी का मानना था: "हिंसक साधन से स्वराज नहीं सकता"

 

असहयोग आंदोलन के परिणाम

 

सकारात्मक

पहली बार जन-आंदोलनलाखों लोगों ने भाग लिया
सभी वर्ग शामिलकिसान, मजदूर, मध्यम वर्ग, छात्र
हिंदू-मुस्लिम एकता (खिलाफत के साथ)
स्वदेशी और खादी राष्ट्रीय प्रतीक बने
लोगों को ब्रिटिश सरकार से डर खत्म हुआ

नकारात्मक

आंदोलन अचानक वापस लेने से निराशा
खिलाफत मुद्दा अंततः असफल (1924 में तुर्की ने खुद खलीफा पद खत्म किया)
हिंदू-मुस्लिम एकता अस्थायी साबित हुई

क्रांतियों का युग 1830–1848 


📝
10 MCQs

1. अवध (Awadh) में किसान आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
a)
अल्लूरी सीताराम राजू
b)
बाबा रामचंद्र
c)
जवाहरलाल नेहरू
d)
सरदार पटेल
उत्तर: b) बाबा रामचंद्र
(CBSE 2019, Delhi)

 

2. बाबा रामचंद्र कौन थे?
a)
एक ज़मींदार
b)
एक वकील
c) Fiji
में गिरमिटिया मजदूर रह चुके संन्यासी
d)
एक शिक्षक
उत्तर: c) Fiji में गिरमिटिया मजदूर रह चुके संन्यासी
(CBSE 2020, All India)

 

3. Oudh Kisan Sabha की स्थापना कब हुई?
a)
सितंबर 1920
b)
अक्टूबर 1920
c)
दिसंबर 1920
d)
जनवरी 1921
उत्तर: b) अक्टूबर 1920
(CBSE 2018, Outside Delhi)

 

4. "नई-धोबी बंद" (Nai-Dhobi Bandh) क्या था?
a)
एक हड़ताल
b)
ज़मींदारों का सामाजिक बहिष्कार
c)
एक कानून
d)
एक त्योहार
उत्तर: b) ज़मींदारों का सामाजिक बहिष्कार
(CBSE 2021, Term-1)

 

5. गुडेम हिल्स में आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
a)
बिरसा मुंडा
b)
अल्लूरी सीताराम राजू
c)
बाबा रामचंद्र
d)
खुदीराम बोस
उत्तर: b) अल्लूरी सीताराम राजू
(CBSE 2019, Compartment -
बहुत important)

 

6. गुडेम हिल्स कहाँ स्थित है?
a)
बिहार
b)
उत्तर प्रदेश
c)
आंध्र प्रदेश
d)
असम
उत्तर: c) आंध्र प्रदेश
(CBSE 2020, Delhi)

 

7. आदिवासियों के लिए "स्वराज" का मतलब क्या था?
a)
ब्रिटिश शासन से मुक्ति
b)
जंगलों पर अपने पारंपरिक अधिकार वापस
c)
मताधिकार
d)
शिक्षा का अधिकार
उत्तर: b) जंगलों पर अपने पारंपरिक अधिकार वापस
(CBSE 2018, All India)

 

8. Inland Emigration Act किस वर्ष पास हुआ?
a) 1850
b) 1859
c) 1865
d) 1880
उत्तर: b) 1859
(CBSE 2022, Term-1)

 

9. Inland Emigration Act का मुख्य प्रावधान क्या था?
a)
मजदूरों को विदेश जाने की अनुमति
b)
बागान मजदूरों को बिना permission के बागान छोड़ना मना
c)
शिक्षा अनिवार्य
d)
ज़मीन का पुनर्वितरण
उत्तर: b) बागान मजदूरों को बिना permission के बागान छोड़ना मना
(CBSE 2019, Outside Delhi)

 

10. 1921-22 में विदेशी कपड़ों का आयात कितना कम हुआ?
a)
एक-चौथाई
b)
आधा (50%)
c)
तीन-चौथाई
d)
पूरी तरह बंद
उत्तर: b) आधा (50%)
(CBSE 2017, Delhi)

“यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण: कुलीन वर्ग, मध्यम वर्ग और उदारवाद – Class 10 History Notes”

Very Short Answer

 

1. अवध के किसानों की मुख्य मांगें क्या थीं?
उत्तर: किसानों की मुख्य मांगें थीं: (1) लगान में कमी, (2) बेगार प्रथा की समाप्ति, (3) शोषक ज़मींदारों और तालुकदारों का सामाजिक बहिष्कार

 

2. "नई-धोबी बंद" का क्या अर्थ था?
उत्तर: यह अवध में ज़मींदारों के सामाजिक बहिष्कार का तरीका थापंचायतों ने तय किया कि नाई (barbers) और धोबी (washermen) शोषक ज़मींदारों को सेवा नहीं देंगे

 

3. अल्लूरी सीताराम राजू का आंदोलन का तरीका गांधी जी से कैसे अलग था?
उत्तर: सीताराम राजू ने गांधी जी का सम्मान किया और खादी पहनी, लेकिन अहिंसा स्वीकार नहीं कीउन्होंने guerrilla warfare (छापामार युद्ध) अपनाया और बल प्रयोग को ज़रूरी माना

 

4. बागान मजदूरों ने "स्वराज" का अर्थ कैसे समझा?
उत्तर: बागान मजदूरों ने समझा कि "गांधी राज" में उन्हें अपने गांवों में ज़मीन मिलेगीस्वराज का मतलब था बागान छोड़कर गांव लौटने और ज़मीन पाने की आज़ादी

 

5. शहरों में असहयोग आंदोलन धीमा क्यों पड़ गया?
उत्तर: तीन मुख्य कारण: (1) खादी महंगी थी और आम लोग खरीद नहीं सकते थे, (2) राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान कम थे, (3) वकीलों के लिए practice छोड़ना आर्थिक रूप से मुश्किल था

यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय-Class 10 History Notes

 

📚 5 Short Answer


1. शहरों में असहयोग आंदोलन की भागीदारी और इसके आर्थिक प्रभाव का वर्णन कीजिए
(CBSE 2019, All India + 2020, Delhi)

उत्तर:

भागीदारी:

·       छात्रों ने सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़े

·       Motilal Nehru, CR Das जैसे वकीलों ने practice बंद की

·       व्यापारियों ने विदेशी सामान बेचना बंद किया

आर्थिक प्रभाव (सबसे नाटकीय):

·       1921-22 में विदेशी कपड़ों का आयात आधा हो गया

·       विदेशी कपड़े सार्वजनिक रूप से जलाए गए

·       खादी और स्वदेशी की मांग बढ़ी

·       Indian textile mills और handlooms का उत्पादन बढ़ा

सीमा: खादी महंगी थी, इसलिए आंदोलन धीमा पड़ा


2. अवध में किसान आंदोलन का विस्तृत वर्णन करते हुए बाबा रामचंद्र और जवाहरलाल नेहरू की भूमिका बताइए
(CBSE 2018, Outside Delhi + 2021, Term-2 – Important)

उत्तर:

पृष्ठभूमि:

·       तालुकदार और ज़मींदार किसानों से बहुत ऊंचा किराया लेते थे

·       बेगार प्रथा (बिना मज़दूरी के काम)

·       किसान नियमित रूप से बेदखल किए जाते थे

बाबा रामचंद्र की भूमिका:

·       Fiji में गिरमिटिया मजदूर रह चुके संन्यासी

·       किसानों को संगठित किया

·       मांगें: लगान कम हो, बेगार खत्म हो, ज़मींदारों का सामाजिक बहिष्कार

·       नई-धोबी बंदनाई और धोबी ज़मींदारों को सेवा दें

नेहरू की भूमिका:

·       जून 1920 में अवध के गांवों में गए

·       अक्टूबर 1920 में Oudh Kisan Sabha की स्थापना

·       एक महीने में 300+ शाखाएं गांवों में खुलीं

परिणाम: 1921 में आंदोलन हिंसक हो गया, Congress leadership असहज हुई


3. अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में आदिवासी आंदोलन का वर्णन कीजिएयह गांधीवादी अहिंसा से कैसे अलग था?
(CBSE 2017, Delhi + 2019, Compartment + 2020, All India –
बार-बार पूछा जाता है)

उत्तर:

पृष्ठभूमि:

·       गुडेम हिल्स (आंध्र प्रदेश) में आदिवासी किसान

·       औपनिवेशिक सरकार ने जंगल बंद कर दिए

·       आदिवासियों के पारंपरिक अधिकार छिन गए

अल्लूरी सीताराम राजू:

·       करिश्माई नेता, दावा किया कि उनके पास विशेष शक्तियां हैं

·       लोग उन्हें divine incarnation (ईश्वर का अवतार) मानते थे

आदिवासियों की व्याख्या:

·       "स्वराज" = जंगलों पर अपना पुराना अधिकार वापस

·       बल प्रयोग ज़रूरी हैभारत को force से ही आज़ाद कराया जा सकता है

गांधीवाद से अंतर:

·       आदिवासियों ने गांधी जी का सम्मान किया, खादी पहनी, शराब छोड़ी

·       लेकिन अहिंसा स्वीकार नहीं की

Guerrilla warfare अपनायापुलिस थानों पर हमले, हथियार लूटे


4. बागान मजदूरों ने असहयोग आंदोलन में कैसे भाग लिया? Inland Emigration Act क्या था?
(CBSE 2018, All India + 2022, Term-2)

उत्तर:

Inland Emigration Act of 1859:

·       बागान मजदूरों को बिना permission के बागान छोड़ना मना था

·       यह कानून उन्हें बंधुआ मजदूर जैसी स्थिति में रखता था

मजदूरों की समस्या:

·       असम और अन्य जगहों पर tea plantations में कठोर परिस्थितियां

·       कम मज़दूरी, अमानवीय व्यवहार

·       गांव जाने की आज़ादी नहीं

स्वराज की व्याख्या:

·       मजदूरों ने समझा: "गांधी राज" आने वाला है

·       हर किसी को अपने गांव में ज़मीन मिलेगी

1921 की घटना:

·       हज़ारों मजदूर असम के बागानों से अपने गांवों की तरफ चल पड़े

·       रास्ते में railway और steamer strike

·       पुलिस ने रोका और बेरहमी से पीटा

·       बहुत कम मजदूर अपने गंतव्य तक पहुंचे


5. असहयोग आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों ने "स्वराज" को अलग-अलग तरीके से क्यों समझा?
(CBSE 2020, Outside Delhi + 2021, Term-2)

उत्तर:

NCERT स्पष्ट करता है: "स्वराज की पुकार का सभी ने जवाब दिया, लेकिन यह शब्द अलग-अलग लोगों के लिए अलग मतलब रखता था।"

समूह

स्वराज का मतलब

शहरी मध्यम वर्ग

राजनीतिक स्वतंत्रता, स्वशासन

अवध के किसान

लगान में कमी, बेगार खत्म, ज़मींदारों से मुक्ति

आदिवासी

जंगलों पर अपने पारंपरिक अधिकार वापस

बागान मजदूर

गांव लौटना, ज़मीन पाना, बागान की बंधुआ व्यवस्था से मुक्ति

कारण:

·       हर समूह की अपनी समस्याएं और आकांक्षाएं थीं

·       Congress का राजनीतिक कार्यक्रम सबकी ज़रूरतें पूरी नहीं करता था

·       स्थानीय नेताओं ने गांधी जी का नाम लेकर अपने मुद्दे उठाए


📖
Long Answer Questions

1. असहयोग आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी का विस्तृत वर्णन करते हुए बताइए कि उन्होंने "स्वराज" को कैसे समझा।
(CBSE 2019, All India + 2020, Delhi + 2021, Term-2 – Most Important 5 Marker)

उत्तर:

परिचय:
असहयोग आंदोलन (1921-22) एक बहुआयामी जन-आंदोलन था जिसमें अलग-अलग सामाजिक समूहों ने अपनी समझ और आकांक्षाओं के साथ भाग लिया। NCERT में स्पष्ट है: "सभी ने स्वराज की पुकार का जवाब दिया, लेकिन यह शब्द अलग-अलग लोगों के लिए अलग मतलब रखता था।"

1. शहरों में मध्यम वर्ग:

भागीदारी:

·       छात्रों ने सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़े, राष्ट्रीय संस्थानों में दाखिला लिया

·       Motilal Nehru, CR Das जैसे वकीलों ने कानूनी practice छोड़ी

·       व्यापारियों ने विदेशी सामान बेचना बंद किया

·       1921-22 में विदेशी कपड़ों का आयात आधा हो गया

स्वराज का मतलब:

·       राजनीतिक स्वतंत्रता, ब्रिटिश शासन से मुक्ति

·       स्वशासन का अधिकार

सीमा: खादी महंगी थी, राष्ट्रीय संस्थान कम थे, इसलिए लोग धीरे-धीरे वापस सरकारी संस्थानों में लौटे।

2. अवध में किसान:

भागीदारी:

·       बाबा रामचंद्र (Fiji में गिरमिटिया मजदूर रह चुके संन्यासी) के नेतृत्व में

·       जवाहरलाल नेहरू ने Oudh Kisan Sabha (अक्टूबर 1920) की स्थापना की

·       नई-धोबी बंदज़मींदारों का सामाजिक बहिष्कार

स्वराज का मतलब:

·       लगान में कमी

·       बेगार प्रथा की समाप्ति

·       शोषक तालुकदारों और ज़मींदारों से मुक्ति

परिणाम: 1921 में आंदोलन हिंसक हो गयातालुकदारों के घरों पर हमले, बाज़ारों को लूटा गया।

3. गुडेम हिल्स (आंध्र प्रदेश) में आदिवासी:

भागीदारी:

·       अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में

·       गांधी जी का सम्मान किया, खादी पहनी, शराब छोड़ी

·  लेकिन अहिंसा स्वीकार नहीं की

Guerrilla warfare – पुलिस थानों पर हमले, हथियार लूटे

स्वराज का मतलब:

·       जंगलों पर अपने पारंपरिक अधिकार वापस

·       औपनिवेशिक forest laws से मुक्ति

·       बल प्रयोग से स्वतंत्रता

4. असम के बागान मजदूर:

भागीदारी:

·       Inland Emigration Act 1859 के खिलाफजो बिना permission बागान छोड़ना मना करता था

·       1921 में हज़ारों मजदूर बागानों से अपने गांवों की तरफ चल पड़े

स्वराज का मतलब:

·       "गांधी राज" में गांव लौटना

·       अपने गांव में ज़मीन पाना

·       बागान की बंधुआ व्यवस्था से मुक्ति

परिणाम: पुलिस ने बेरहमी से पीटा, बहुत कम मजदूर अपने गंतव्य तक पहुंचे।

निष्कर्ष:
असहयोग आंदोलन में विविधता ने इसे व्यापक और शक्तिशाली बनाया। हर समूह ने अपनी समस्याओं के समाधान के रूप में स्वराज को देखा। हालांकि Congress leadership को इन विभिन्न धाराओं को एक करने में चुनौतियां आईं, लेकिन यह भागीदारी ही राष्ट्रीय आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने में सफल रही।


2. अवध के किसान आंदोलन का विस्तृत विवरण देते हुए बाबा रामचंद्र और जवाहरलाल नेहरू की भूमिका समझाइए।
(CBSE 2018, Delhi + 2020, Outside Delhi)

उत्तर:

परिचय:
अवध (Awadh) में किसान आंदोलन असहयोग आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जो Congress के राजनीतिक कार्यक्रम से अलग विकसित हुआ।

किसानों की समस्याएं:

1. आर्थिक शोषण:

·       तालुकदार और ज़मींदार बहुत ऊंचा किराया (rent) मांगते थे

·       कई तरह के अतिरिक्त कर (cesses) लगाए जाते थे

2. बेगार प्रथा:

·       किसानों को बिना मज़दूरी के ज़मींदारों के खेतों में काम करना पड़ता था

3. Tenure की असुरक्षा:

·       किसान नियमित रूप से बेदखल कर दिए जाते थे

·       लीज़ की ज़मीन पर कोई अधिकार नहीं

बाबा रामचंद्र की भूमिका:

पृष्ठभूमि:

·       एक संन्यासी जो पहले Fiji में indentured labourer (गिरमिटिया मजदूर) के रूप में काम कर चुके थे

·       किसानों की समस्याओं को गहराई से समझते थे

नेतृत्व:

·       अवध के किसानों को संगठित किया

·       आंदोलन को गति दी

मांगें:
लगान (revenue) में कमी
बेगार की प्रथा खत्म हो
शोषक ज़मींदारों का सामाजिक बहिष्कार

नई-धोबी बंद (Nai-Dhobi Bandh):

·       पंचायतों ने निर्णय लिया कि नाई (barbers) और धोबी (washermen) शोषक ज़मींदारों को सेवा नहीं देंगे

·       यह सामाजिक दबाव का शक्तिशाली तरीका था

जवाहरलाल नेहरू की भूमिका:

प्रारंभिक संपर्क:

·       जून 1920 में नेहरू ने अवध के गांवों में जाना शुरू किया

·       किसानों की समस्याएं सुनीं और समझीं

Oudh Kisan Sabha (अक्टूबर 1920):

·       नेहरू, बाबा रामचंद्र और अन्य नेताओं ने मिलकर स्थापना की

·       उद्देश्य: किसानों को संगठित करना, उनकी मांगें उठाना

·       एक महीने में 300+ शाखाएं गांवों में खुल गईं

Congress से जोड़ना:

·       नेहरू ने किसान संघर्ष को wider nationalist struggle में integrate करने का प्रयास किया

आंदोलन का विकास (1921):

जैसे-जैसे आंदोलन फैला, इसने कठोर और हिंसक रूप ले लिया:

·       तालुकदारों और व्यापारियों के घरों पर हमले

·       बाज़ारों को लूटा गया

·       अनाज के भंडार पर कब्ज़ा

स्थानीय व्याख्या:

·       किसानों ने दावा किया: "गांधी जी ने कहा है कि कोई टैक्स नहीं देना"

·       "ज़मीन गरीबों में बांट दी जाएगी"

·       महात्मा के नाम का इस्तेमाल हर कार्रवाई को जायज़ ठहराने के लिए

Congress की चुनौती:

·       Congress leadership (गांधी जी सहित) इस हिंसक मोड़ से असहज थी

·       आंदोलन Congress programme से अलग विकसित हो गया

निष्कर्ष:
अवध का किसान आंदोलन दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रवाद ने अपने स्थानीय संदर्भ और मुद्दों के साथ रूप लिया। बाबा रामचंद्र और नेहरू दोनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन आंदोलन का स्वरूप उनके नियंत्रण से बाहर चला गया।


3. अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में आदिवासी आंदोलन का विस्तृत विवरण दीजिए। यह गांधीवादी तरीकों से कैसे अलग था?
(CBSE 2017, Outside Delhi + 2019, All India + 2020, Compartment)

उत्तर:

परिचय:
गुडेम हिल्स (आंध्र प्रदेश) में आदिवासी किसानों का संघर्ष असहयोग आंदोलन का एक अनूठा पहलू था, जो गांधीवादी अहिंसा से अलग था।

पृष्ठभूमिआदिवासियों की समस्याएं:

1. जंगलों का बंद होना:

·       औपनिवेशिक सरकार ने जंगलों को बंद कर दिया (forest closure)

·       आदिवासियों को उनके पारंपरिक अधिकारों से वंचित किया गया

2. आजीविका पर प्रभाव:

·       जंगल से लकड़ी, फल, जड़ी-बूटी, शिकारसब प्रतिबंधित

·       पशुचारण और shifting cultivation (झूम खेती) पर रोक

·       आदिवासियों की पारंपरिक जीवन-शैली खतरे में

अल्लूरी सीताराम राजूकरिश्माई नेता:

व्यक्तित्व:

·       करिश्माई और प्रभावशाली व्यक्तित्व

·       दावा किया कि उनके पास विशेष शक्तियां हैं (special powers)

·       लोग उन्हें divine incarnation (ईश्वर का अवतार) मानते थे

·       कहा जाता था कि उनके पास जादुई शक्तियां हैं

आदिवासियों की "स्वराज" की व्याख्या:

मुख्य मांग:

·       जंगलों पर अपना पुराना अधिकार वापस मिलना

·       औपनिवेशिक forest laws से मुक्ति

·       पारंपरिक जीवन-शैली जीने की स्वतंत्रता

बल प्रयोग को उचित माना:

·       आदिवासियों को लगा कि भारत को बल प्रयोग (force) से ही आज़ाद कराया जा सकता है

·       अहिंसा से ब्रिटिश शासन को नहीं हटाया जा सकता

गांधीवाद का चयनात्मक स्वीकार:

स्वीकार किया:

·       गांधी जी का सम्मान किया

·       खादी पहनी

·       शराब छोड़ी

अस्वीकार किया:

·       अहिंसा को अस्वीकार कर दिया

·       बल प्रयोग को ज़रूरी माना

आंदोलन का स्वरूप – Guerrilla Warfare (छापामार युद्ध):

तरीका:

·       पुलिस थानों पर हमले किए

·  हथियार लूटे

·  जंगलों में छिपकर लड़ाई

·  Hit-and-run tactics (मारो और भागो)

स्थान: घने जंगलों का उपयोगछिपने और surprise attacks के लिए

गांधीवादी तरीकों से अंतर:

पहलू

गांधीवादी तरीका

सीताराम राजू का तरीका

साधन

अहिंसा, सत्याग्रह

Guerrilla warfare, बल प्रयोग

दर्शन

सत्य और अहिंसा

बल से ही स्वतंत्रता संभव

रणनीति

शांतिपूर्ण प्रतिरोध, बहिष्कार

हथियारबंद विद्रोह, पुलिस थानों पर हमले

नेतृत्व

Congress, educated middle class

स्थानीय करिश्माई नेता

उद्देश्य

राजनीतिक स्वराज

जंगलों पर पारंपरिक अधिकार

 

ब्रिटिश प्रतिक्रिया:

·       सरकार ने दमन किया

·       सीताराम राजू को पकड़ा गया और मार दिया गया

निष्कर्ष:
अल्लूरी सीताराम राजू का आंदोलन दिखाता है कि राष्ट्रवाद ने आदिवासी समुदायों में अपने स्थानीय संदर्भ और परंपराओं के साथ रूप लिया। गांधीवादी प्रभाव के बावजूद, उन्होंने अहिंसा को अस्वीकार किया और अपने अधिकारों के लिए सशस्त्र संघर्ष को चुना।


4. बागान मजदूरों की भागीदारी और Inland Emigration Act का विस्तृत विवरण दीजिए।
(CBSE 2018, All India + 2020, Delhi)

उत्तर:

परिचय:
बागान (plantation) मजदूरों ने असहयोग आंदोलन में अपने तरीके से भाग लिया, "स्वराज" को गांव लौटने और ज़मीन पाने की आज़ादी के रूप में समझा।

Inland Emigration Act of 1859:

मुख्य प्रावधान:

·       बागान मजदूरों को बिना permission के बागान छोड़ना मना था

·       यह उन्हें बंधुआ मजदूर (bonded labour) जैसी स्थिति में रखता था

उद्देश्य:

·       plantation owners को सस्ते मज़दूर उपलब्ध कराना

·       मजदूरों को बागानों में बांधे रखना

बागान मजदूरों की समस्याएं:

1. कठोर कार्य परिस्थितियां:

·       असम और अन्य जगहों पर tea plantations में कठोर काम

·       बहुत कम मज़दूरी

·       लंबे काम के घंटे

2. अमानवीय व्यवहार:

·       plantation managers द्वारा क्रूर व्यवहार

·       कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं

·       बीमारी या चोट पर कोई मदद नहीं

3. आज़ादी का अभाव:

·       गांव जाने की आज़ादी नहीं

·       परिवार से मिलने भी नहीं जा सकते थे

·       पूरी तरह plantation के नियंत्रण में

मजदूरों की "स्वराज" की व्याख्या:

अफवाहें और उम्मीदें:

·       मजदूरों ने सुना: "गांधी राज" आने वाला है

·       Gandhi Raj में हर किसी को अपने गांव में ज़मीन मिलेगी

·       अब plantation में काम करने की ज़रूरत नहीं

स्वराज का मतलब:

·       गांव लौटना

·       अपनी ज़मीन पर खेती करना

·       Inland Emigration Act से मुक्ति

·       plantation की बंधुआ व्यवस्था खत्म

1921 की घटनाबड़े पैमाने पर पलायन:

शुरुआत:

·  हज़ारों मजदूर असम के बागानों से अपने गांवों की तरफ चल पड़े

·  बिना permission के बागान छोड़ दिया

·  Inland Emigration Act की खुली अवहेलना

बाधाएं:

1. Transport की समस्या:

·       रास्ते में railway और steamer strike हो गई

·       यात्रा करना मुश्किल हो गया

2. पुलिस का दमन:

·       पुलिस ने मजदूरों को रोका

·       बेरहमी से पीटा (brutal repression)

·       कई को गिरफ्तार किया

परिणाम:

·       बहुत कम मजदूर अपने गंतव्य तक पहुंच पाए

·       ज़्यादातर रास्ते में ही रोक दिए गए

·       फिर भी इस घटना ने plantation system को चुनौती दी

महत्व:

1. स्वराज की लोकप्रिय व्याख्या:

·       दिखाता है कि साधारण लोगों ने राष्ट्रवादी नारों को अपनी आर्थिक आकांक्षाओं से जोड़ा

2. सामाजिक न्याय की मांग:

·       सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक मुक्ति की मांग

3. ब्रिटिश शासन को चुनौती:

·       बागान मजदूरों ने colonial labour system को खुली चुनौती दी

निष्कर्ष:
बागान मजदूरों की भागीदारी असहयोग आंदोलन की व्यापकता दिखाती है। उन्होंने "स्वराज" को अपनी समझ से परिभाषित किया और plantation की बंधुआ व्यवस्था से मुक्ति की आशा से आंदोलन में शामिल हुए। हालांकि उनका प्रयास तुरंत सफल नहीं हुआ, लेकिन यह colonial exploitation के खिलाफ एक महत्वपूर्ण विरोध था।

 

निष्कर्ष

 

आंदोलन में विभिन्न धाराएं" यह दिखाती हैं कि असहयोग आंदोलन एक बहुआयामी जन-आंदोलन था जिसमें हर वर्ग ने अपनी समझ और ज़रूरतों के हिसाब से हिस्सा लियाशहरों का मध्यम वर्ग राजनीतिक स्वतंत्रता चाहता था, अवध के किसान आर्थिक शोषण से मुक्ति, आदिवासी जंगलों पर अपना अधिकार और बागान मजदूर गांव लौटने की आज़ादी। Congress leadership को इन सभी धाराओं को एक करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसी विविधता ने आंदोलन को व्यापक और शक्तिशाली बनाया

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