मंगलवार, 20 जनवरी 2026

सविनय अवज्ञा आंदोलन की ओर – दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह | कक्षा 10 इतिहास NCERT Chapter 2 | Notes PDF Download.

सविनय अवज्ञा आंदोलन की ओर – दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह 

परिचय -

असहयोग आंदोलन की वापसी (1922) के बाद राष्ट्रवादी आंदोलन में नई ऊर्जा भरने के लिए गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) की शुरुआत की। यह आंदोलन दांडी मार्च (Salt March) – 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 के साथ शुरू हुआ और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रतीकात्मक क्षणों में से एक बन गया। NCERT Class 10 History Chapter 2 के इस खंड में हम देखेंगे कि कैसे साइमन कमीशन के विरोध से शुरू हुई घटनाओं की श्रृंखला ने पूर्ण स्वराज की मांग और नमक सत्याग्रह को जन्म दिया।

यह section board exam में सबसे ज्यादा marks देता है – हर साल 10-12 marks guaranteed प्रश्न आते हैं।

 

सविनय अवज्ञा आंदोलन की ओर – दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह


साइमन कमीशन (Simon Commission) – 1928

पृष्ठभूमि

1919 के Government of India Act में प्रावधान था कि 10 साल बाद भारत में संवैधानिक सुधारों की समीक्षा की जाएगी।

साइमन कमीशन का गठन

नवंबर 1927 में ब्रिटिश सरकार ने Simon Commission की स्थापना की।

अध्यक्ष: Sir John Simon

मुख्य समस्या:

·         आयोग में सभी 7 सदस्य अंग्रेज़ थे

·         एक भी भारतीय सदस्य नहीं था

·         यह भारतीयों के लिए अपमानजनक था

भारतीय प्रतिक्रिया – "साइमन वापस जाओ"

फरवरी 1928 में जब Simon Commission भारत पहुंचा:

विरोध प्रदर्शन:

·         पूरे देश में हड़तालें और प्रदर्शन

·         नारा: "Simon Go Back" (साइमन वापस जाओ)

·         काले झंडे दिखाए गए

·         Congress और Muslim League दोनों ने बहिष्कार किया

लाहौर घटना (अक्टूबर 1928):

·         Lala Lajpat Rai के नेतृत्व में शांतिपूर्ण प्रदर्शन

·         पुलिस ने लाठीचार्ज किया

·         लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए

·         कुछ हफ्ते बाद उनकी मृत्यु हो गई

“अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acids, Bases and Salts)” Notes 


नेहरू रिपोर्ट (Nehru Report) – अगस्त 1928

भारतीयों का जवाब

साइमन कमीशन के जवाब में Congress ने Motilal Nehru की अध्यक्षता में एक समिति बनाई।

अगस्त 1928: Nehru Report पेश की गई

मुख्य प्रस्ताव:

·         भारत को Dominion Status (स्वशासन) मिले

·         ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर रहते हुए स्वायत्तता

विवाद

युवा नेताओं का विरोध:

·         Jawaharlal Nehru, Subhas Chandra Bose जैसे युवा नेता

·         उन्हें Dominion Status काफी नहीं लगा

·         मांग: पूर्ण स्वराज (Complete Independence)

"आंदोलन में विभिन्न धाराएं" Chapter 2 History Notes 


लाहौर अधिवेशन (Lahore Session) – दिसंबर 1929

ऐतिहासिक निर्णय

दिसंबर 1929 में रावी नदी के तट पर Congress का लाहौर अधिवेशन हुआ।

अध्यक्ष: Jawaharlal Nehru (पहली बार)

पूर्ण स्वराज की घोषणा

Congress ने ऐतिहासिक निर्णय लिया:

"पूर्ण स्वराज" (Purna Swaraj) की मांग
✅ Dominion Status अस्वीकार
26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय

"प्रथम विश्व युद्ध, खिलाफत और असहयोग आंदोलन" – गांधी जी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रवाद का नया दौर! 


26 जनवरी 1930 – प्रथम स्वतंत्रता दिवस

पूर्ण स्वराज दिवस

26 जनवरी 1930 को पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया:

·         लाखों लोगों ने तिरंगा झंडा फहराया

·         स्वतंत्रता की शपथ ली

·         सभाएं और जुलूस निकाले गए

·         यह दिन राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना

महत्व:

·         यही कारण है कि आज भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है

·         1950 में संविधान लागू होने की तारीख जानबूझकर 26 जनवरी चुनी गई


 दांडी मार्च (Salt March) – मार्च-अप्रैल 1930

गांधी जी का रणनीतिक चुनाव – नमक

सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने के लिए गांधी जी ने नमक को चुना।

नमक क्यों?

1. सार्वभौमिक आवश्यकता:

·         अमीर-गरीब सभी के लिए ज़रूरी

·         रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा

2. नमक कानून (Salt Law):

·         ब्रिटिश सरकार का नमक पर एकाधिकार

·         नमक बनाना या बेचना गैरकानूनी

·         नमक कर (Salt Tax) – गरीबों पर बोझ

3. प्रतीकात्मक महत्व:

·         ब्रिटिश शासन की मनमानी का प्रतीक

·         सभी वर्गों को जोड़ सकता था

गांधी जी का कथन:
"नमक पर टैक्स सबसे अन्यायपूर्ण है। अमीर-गरीब सभी नमक खाते हैं।"

दांडी यात्रा की शुरुआत

12 मार्च 1930:

स्थान: साबरमती आश्रम (अहमदाबाद), गुजरात
गंतव्य: दांडी (समुद्र तट), गुजरात
दूरी: लगभग 240 मील (385 किमी)
साथी: 78 स्वयंसेवक (volunteers)
समय: 24 दिन

यात्रा का विवरण:

तारीख

घटना

12 मार्च 1930

साबरमती आश्रम से यात्रा शुरू

12-5 अप्रैल

रोज़ाना 10-12 मील पैदल चलना

रास्ते में

हज़ारों लोग शामिल हुए, गांवों में भाषण

6 अप्रैल 1930

दांडी पहुंचे, समुद्री पानी से नमक बनाया

6 अप्रैल 1930 – नमक कानून तोड़ना

सुबह: गांधी जी ने समुद्र के पानी को उबालकर नमक बनाया

महत्व:

·         यह प्रतीकात्मक कार्य था – ब्रिटिश कानून की अवहेलना

·         पूरी दुनिया ने देखा

·         अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने व्यापक कवरेज दी

गांधी जी के शब्द:
"मैंने नमक कानून तोड़ा है। अब यह सरकार पर निर्भर है कि वह क्या करती है।"

 Chapter 1 "रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण" complete किया?


आंदोलन का देशव्यापी प्रसार

पूरे देश में नमक सत्याग्रह

दांडी मार्च के बाद पूरे भारत में नमक कानून तोड़ा गया:

तटीय क्षेत्र:

·         लोग समुद्र के पानी से नमक बनाने लगे

·         हज़ारों लोगों ने गिरफ्तारी दी

अन्य क्षेत्रों में:

·         विदेशी कपड़ों का बहिष्कार

·         शराब की दुकानों का घेराव

·         वन कानूनों की अवहेलना

·         चौकीदारी कर (chaukidari tax) देने से मना

सविनय अवज्ञा के तरीके

क्षेत्र

सविनय अवज्ञा का रूप

आर्थिक

विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, कर न देना

सामाजिक

शराब की दुकानों का घेराव (महिलाओं ने बड़ी भूमिका)

वन क्षेत्र

वन कानूनों की अवहेलना, लकड़ी काटना

ग्रामीण

लगान न देना, चौकीदारी कर से मना

महिलाओं की भागीदारी

पहली बार बड़े पैमाने पर:

·         हज़ारों महिलाएं घरों से बाहर निकलीं

·         जुलूसों में शामिल हुईं

·         शराब की दुकानों का घेराव (picketing)

·         विदेशी कपड़ों की होली जलाई

·         गिरफ्तारियां दीं

प्रमुख महिला नेता:

·         Kamala Nehru

·         Sarojini Naidu

·         हज़ारों गुमनाम महिलाएं

 "राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद (nationalism & Imperalism)(Balkans)"


ब्रिटिश दमन और गांधी जी की गिरफ्तारी

सरकार की प्रतिक्रिया

अप्रैल-मई 1930:

·         लाखों लोग आंदोलन में शामिल

·         ब्रिटिश सरकार घबरा गई

·         कठोर दमन शुरू किया

गांधी जी की गिरफ्तारी

मई 1930: गांधी जी को गिरफ्तार कर लिया गया

परिणाम:

·         पूरे देश में विरोध प्रदर्शन

·         आंदोलन और तेज़ हो गया

·         लगभग 1 लाख लोग जेल गए

Dharasana Salt Works घटना

गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद:

·         Sarojini Naidu और Abbas Tyabji के नेतृत्व में

·         Dharasana Salt Works (गुजरात) पर शांतिपूर्ण march

·         पुलिस ने बेरहमी से लाठीचार्ज किया

·         सैकड़ों घायल, कई मारे गए

·         अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने ब्रिटिश क्रूरता की निंदा की


गांधी-इरविन समझौता (Gandhi-Irwin Pact) – 5 मार्च 1931

पृष्ठभूमि

नवंबर 1930: लंदन में First Round Table Conference

·         Congress ने बहिष्कार किया

·         Conference विफल रहा

ब्रिटिश सरकार को एहसास हुआ कि Congress के बिना कोई समाधान संभव नहीं।

समझौते की शर्तें

5 मार्च 1931 को गांधी जी और वायसराय Lord Irwin के बीच समझौता:

Congress सहमत हुई:
✅ सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करेगी
Second Round Table Conference में भाग लेगी

सरकार सहमत हुई:
✅ सभी राजनीतिक कैदी रिहा होंगे
✅ तटीय क्षेत्रों में लोग व्यक्तिगत उपयोग के लिए नमक बना सकते हैं
✅ शांतिपूर्ण picketing की अनुमति

आलोचना

कई नेताओं ने निराशा जताई:

·         Subhas Chandra Bose, Jawaharlal Nehru – समझौता कमज़ोर

·         Bhagat Singh, Sukhdev, Rajguru को फांसी (23 मार्च 1931) – इसमें कोई रियायत नहीं

·         पूर्ण स्वराज की मांग छोड़ दी

Second Round Table Conference – विफलता

गांधी जी लंदन गए (सितंबर 1931)

Congress के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में

समस्याएं:

·         ब्रिटिश सरकार ने कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया

·         सांप्रदायिक मुद्दों पर अटक गई बैठक

·         Congress को अलग-थलग करने का प्रयास

परिणाम: Conference पूरी तरह विफल रहा

सविनय अवज्ञा आंदोलन दोबारा शुरू (1932)

दिसंबर 1931: गांधी जी भारत लौटे

जनवरी 1932: आंदोलन फिर से शुरू किया

सरकार की प्रतिक्रिया:

·         और कठोर दमन

·         Congress को गैरकानूनी घोषित किया

·         हज़ारों नेता जेल

1934: आंदोलन धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ा और आधिकारिक रूप से वापस ले लिया गया

Class 10 History (NCERT) | Chapter 1: “राष्ट्र की दृश्य कल्पना” 


सविनय अवज्ञा आंदोलन की सीमाएं (Limits of Civil Disobedience)

सभी वर्गों ने भाग नहीं लिया

हालांकि सविनय अवज्ञा आंदोलन व्यापक था, लेकिन कुछ सामाजिक समूह सीमित रूप से या बिल्कुल शामिल नहीं हुए।


1. मुस्लिम समुदाय की सीमित भागीदारी

कारण

1. खिलाफत आंदोलन की विफलता:

·         1924 में तुर्की ने खुद खलीफा पद खत्म किया

·         हिंदू-मुस्लिम एकता कमज़ोर हुई

2. सांप्रदायिक दंगे:

·         1920 के दशक में कई शहरों में दंगे

·         आपसी अविश्वास बढ़ा

3. अलग राजनीतिक मुद्दे:

·         Muslim League की मांगें अलग थीं

·         पृथक निर्वाचन (separate electorates) और सुरक्षा के मुद्दे

4. Congress का रुख:

·         कई मुस्लिम नेताओं को लगा कि Congress हिंदू हितों का प्रतिनिधित्व करती है

परिणाम: बहुत कम मुसलमान सविनय अवज्ञा आंदोलन में शामिल हुए


2. दलित वर्ग (Depressed Classes) और आंदोलन

Dr. BR Ambedkar की भूमिका

Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar – दलितों के सबसे बड़े नेता

समस्या:

·         दलित (अछूत) समाज में सबसे शोषित वर्ग

·         उन्हें मंदिरों में प्रवेश, कुओं से पानी लेने की भी मनाही

Congress का रुख

गांधी जी का प्रयास:

·         उन्होंने दलितों को "हरिजन" (ईश्वर की संतान) कहा

·         मंदिर प्रवेश आंदोलन चलाया

·         उन्होंने अछूतपन के खिलाफ अभियान चलाए

लेकिन सीमा:

·         Congress में ऊंची जाति का प्रभुत्व

·         ज़मीनी स्तर पर भेदभाव जारी रहा

·         दलितों को सत्ता में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला

Ambedkar की मांग

अलग निर्वाचन मंडल (Separate Electorates):

·         Ambedkar ने मांग की कि दलितों के लिए अलग निर्वाचन

·         ताकि उनके अपने प्रतिनिधि चुन सकें

Poona Pact (1932):

·         गांधी जी ने अलग निर्वाचन का विरोध किया

·         आमरण अनशन शुरू किया

·         अंततः Poona Pact – दलितों के लिए आरक्षित सीटें (reserved seats) लेकिन संयुक्त निर्वाचन

दलितों की आशंकाएं

·         उन्हें लगा Congress उनकी मुख्य समस्याओं (जाति व्यवस्था, अस्पृश्यता) को नहीं उठा रही

·         ज़मीन का पुनर्वितरण नहीं हो रहा

·         ऊंची जाति के नेतृत्व पर संदेह

परिणाम: दलित वर्ग ने सीमित भागीदारी की


3. व्यापारी/उद्योगपति वर्ग (Business Class)

शुरुआती समर्थन

1930-31:

·         व्यापारियों ने आंदोलन का आर्थिक समर्थन किया

·         विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

·         स्वदेशी को बढ़ावा

समर्थन वापसी

1932 के बाद:

·         जब आंदोलन फिर शुरू हुआ, तो व्यापारी वर्ग पीछे हट गया

कारण:

1. संपत्ति के अधिकारों की चिंता:

·         ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांतिकारी मांगें (ज़मीन का पुनर्वितरण)

·         व्यापारियों को डर था कि आंदोलन समाजवादी रुख ले सकता है

2. व्यापार में नुकसान:

·         लंबे आंदोलन से कारोबार प्रभावित

·         बार-बार हड़तालें और बंद

3. ब्रिटिश से समझौता:

·         कुछ व्यापारियों ने सोचा कि बातचीत से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं

परिणाम: दूसरे चरण (1932-34) में व्यापारी वर्ग का समर्थन कम रहा


4. किसान वर्ग – विभाजित भागीदारी

अमीर किसान (Rich Peasants)

मांग: लगान में कमी

समस्या:

·         जब आंदोलन फिर शुरू हुआ (1932), सरकार ने लगान घटाने से मना किया

·         अमीर किसान निराश हुए और आंदोलन से अलग हो गए

गरीब किसान (Poor Peasants)

मांग: ज़मीन का पुनर्वितरण, बेगार खत्म

समस्या:

·         Congress ने इतनी क्रांतिकारी मांगें नहीं उठाईं

·         गरीब किसानों को लगा उनके मुद्दे ignore हो रहे हैं

परिणाम: किसान वर्ग में असंतोष, आंदोलन में कमज़ोरी


सीमाओं का सारांश – एक नज़र में

समूह

भागीदारी

मुख्य कारण

मुस्लिम

बहुत सीमित

खिलाफत विफलता, सांप्रदायिक दंगे, अलग राजनीतिक मुद्दे

दलित वर्ग

सीमित

ऊंची जाति का प्रभुत्व, मुख्य मुद्दे (जाति व्यवस्था) नहीं उठे, अलग निर्वाचन विवाद

व्यापारी वर्ग

शुरू में समर्थन, बाद में वापसी

संपत्ति अधिकारों की चिंता, व्यापार में नुकसान

अमीर किसान

शुरू में सक्रिय, बाद में अलग

सरकार ने लगान कम करने से मना किया

गरीब किसान

सीमित

ज़मीन पुनर्वितरण जैसे क्रांतिकारी मुद्दे नहीं उठे

 "जर्मनी और इटली का निर्माण" – NCERT के exact points पर सरल हिंदी notes!


MCQs (PYQ)

1. Simon Commission की स्थापना कब हुई?
a) 1925
b) नवंबर 1927
c) 1928
d) 1930
उत्तर: b) नवंबर 1927
(CBSE 2019, Delhi)

2. Simon Commission में कितने सदस्य थे?
a) 5 (सभी भारतीय)
b) 7 (सभी अंग्रेज़)
c) 10 (5 भारतीय + 5 अंग्रेज़)
d) 12 (सभी भारतीय)
उत्तर: b) 7 (सभी अंग्रेज़)
(CBSE 2020, All India)

3. Congress ने Lahore Session में पूर्ण स्वराज की घोषणा कब की?
a) नवंबर 1929
b) दिसंबर 1929
c) जनवरी 1930
d) मार्च 1930
उत्तर: b) दिसंबर 1929
(CBSE 2018, Outside Delhi)

4. पहली बार स्वतंत्रता दिवस कब मनाया गया?
a) 15 अगस्त 1930
b) 26 जनवरी 1930
c) 12 मार्च 1930
d) 6 अप्रैल 1930
उत्तर: b) 26 जनवरी 1930
(CBSE 2021, Term-1 - बहुत important)

5. दांडी मार्च कब शुरू हुआ?
a) 6 मार्च 1930
b) 12 मार्च 1930
c) 26 मार्च 1930
d) 6 अप्रैल 1930
उत्तर: b) 12 मार्च 1930
(CBSE 2019, Compartment - हर साल पूछा जाता है)

6. गांधी जी ने नमक कानून कहाँ तोड़ा?
a) साबरमती
b) अहमदाबाद
c) दांडी
d) बॉम्बे
उत्तर: c) दांडी
(CBSE 2020, Delhi)

7. दांडी मार्च की दूरी कितनी थी?
a) 150 मील
b) 240 मील
c) 300 मील
d) 400 मील
उत्तर: b) 240 मील
(CBSE 2018, All India)

8. गांधी जी के साथ दांडी मार्च में कितने स्वयंसेवक थे?
a) 50
b) 78
c) 100
d) 150
उत्तर: b) 78
(CBSE 2022, Term-1)

9. Gandhi-Irwin Pact कब हस्ताक्षरित हुआ?
a) 5 फरवरी 1931
b) 5 मार्च 1931
c) 5 अप्रैल 1931
d) 5 मई 1931
उत्तर: b) 5 मार्च 1931
(CBSE 2019, Outside Delhi)

10. Gandhi-Irwin Pact के अनुसार कौन सी बात गलत है?
a) राजनीतिक कैदी रिहा होंगे
b) तटीय क्षेत्रों में व्यक्तिगत उपयोग के लिए नमक बनाया जा सकता है
c) भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी रद्द होगी
d) शांतिपूर्ण picketing की अनुमति
उत्तर: c) भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी रद्द होगी
(CBSE 2017, Delhi

क्रांतियों का युग 1830–1848 


Short Answer Questions-

1. दांडी मार्च का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
(CBSE 2016, Term-2 + 2019, All India + 2020, Delhi)

उत्तर:

तारीख: 12 मार्च - 6 अप्रैल 1930

मार्ग: साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) से दांडी (गुजरात तट)
दूरी: लगभग 240 मील
साथी: 78 स्वयंसेवक
समय: 24 दिन की पैदल यात्रा

घटना:

·         रोज़ाना 10-12 मील चलते थे

·         रास्ते में गांवों में भाषण, हज़ारों लोग शामिल हुए

·         6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचे

·         समुद्री पानी उबालकर नमक बनाया और कानून तोड़ा

महत्व: यह प्रतीकात्मक विरोध पूरी दुनिया में छा गया और सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई।


2. नमक मार्च को औपनिवेशिक शासन के खिलाफ प्रतिरोध का प्रभावी प्रतीक क्यों माना गया?
(CBSE 2017, Delhi + 2019, Outside Delhi + 2020, Compartment)

उत्तर:

1. सार्वभौमिक प्रतीक:

·         नमक एक शक्तिशाली प्रतीक था जो पूरे राष्ट्र को एकजुट कर सकता था

·         अमीर-गरीब सभी के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थ

2. ब्रिटिश अन्याय का चेहरा:

·         नमक पर सरकार का एकाधिकार

·         नमक कर गरीबों पर बोझ

·         नमक बनाना गैरकानूनी – ब्रिटिश शासन की दमनकारी प्रकृति

3. व्यापक मांगें:

·         31 जनवरी 1930 को गांधी जी ने वायसराय Irwin को पत्र लिखा

·         11 मांगें – सभी वर्गों के मुद्दे शामिल

·         नमक कर खत्म करना प्रमुख मांग

4. अंतर्राष्ट्रीय ध्यान:

·         यूरोपीय और अमेरिकी प्रेस ने व्यापक कवरेज दी

·         गांधी जी विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हुए


3. सविनय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी का वर्णन कीजिए।
(CBSE 2018, All India + 2020, Outside Delhi + 2021, Term-2)

उत्तर:

पहली बार बड़े पैमाने पर:

·         Salt March में महिलाओं ने पहली बार बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लिया

·         हज़ारों महिलाएं घरों से बाहर निकलीं

भागीदारी के तरीके:

·         जुलूसों में शामिल होना

·         शराब की दुकानों का घेराव (picketing of liquor shops)

·         विदेशी कपड़ों की होली जलाना

·         नमक बनाना

·         स्वयं गिरफ्तारियां देना

प्रमुख महिला नेता:

·         Sarojini Naidu – Dharasana Salt Works का नेतृत्व किया

·         Kamala Nehru

·         हज़ारों गुमनाम ग्रामीण और शहरी महिलाएं

महत्व:

·         महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को व्यापक और शक्तिशाली बनाया

·         सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भूमिका बढ़ी


4. Gandhi-Irwin Pact की मुख्य शर्तें लिखिए।
(CBSE 2017, Outside Delhi + 2019, Delhi + 2022, Term-2)

उत्तर:

तारीख: 5 मार्च 1931

Congress की ओर से:
✅ सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करेगी
Second Round Table Conference में भाग लेगी

ब्रिटिश सरकार की ओर से:
✅ सभी राजनीतिक कैदी रिहा होंगे (हिंसा में शामिल को छोड़कर)

✅ तटीय क्षेत्रों में लोग व्यक्तिगत उपयोग के लिए नमक बना सकते हैं

✅ शांतिपूर्ण picketing की अनुमति (शराब और विदेशी कपड़े की दुकानें)

✅ सत्याग्रहियों की जब्त संपत्ति वापस (अगर तीसरे पक्ष को नहीं बेची गई)
✅ Congress पर से प्रतिबंध हटाना

आलोचना:

·         Bhagat Singh, Rajguru, Sukhdev की फांसी में कोई रियायत नहीं (23 मार्च 1931)

·         कई युवा नेता निराश हुए


5. सविनय अवज्ञा आंदोलन में दलित वर्ग की सीमित भागीदारी के कारण बताइए।
(CBSE 2018, Outside Delhi + 2020, All India)

उत्तर:

1. Congress में ऊंची जाति का प्रभुत्व:

·         Congress नेतृत्व मुख्यतः ऊंची जातियों से

·         दलितों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला

2. मुख्य मुद्दे नहीं उठे:

·         दलितों की असली समस्याएं – जाति व्यवस्था, अस्पृश्यता, ज़मीन का पुनर्वितरण – Congress ने पूरी तरह नहीं उठाए

·         सामाजिक सुधार की मांग secondary रही

3. Dr. Ambedkar का अलग दृष्टिकोण:

·         Ambedkar ने अलग निर्वाचन मंडल (separate electorates) की मांग की

·         दलितों के लिए स्वतंत्र राजनीतिक पहचान चाहते थे

4. गांधी-Ambedkar विवाद:

·         गांधी जी ने अलग निर्वाचन का विरोध किया, आमरण अनशन

·         Poona Pact 1932 – आरक्षित सीटें लेकिन संयुक्त निर्वाचन

·         दलितों को लगा उनकी पूर्ण स्वायत्तता नहीं मिली

परिणाम: दलित वर्ग ने आंदोलन में सीमित भागीदारी की।

“यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण: कुलीन वर्ग, मध्यम वर्ग और उदारवाद – Class 10 History Notes” 


Long Answer Questions-

1. सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई? इसके मुख्य चरणों और परिणामों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
(CBSE 2019, All India + 2020, Delhi + 2021, Term-2 – Most Important 5 Marker)

उत्तर:

परिचय:
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) असहयोग आंदोलन की वापसी के बाद राष्ट्रवादी संघर्ष का दूसरा बड़ा चरण था। यह दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह के साथ शुरू हुआ।

पृष्ठभूमि:

1. Simon Commission (1927):

·         नवंबर 1927 में गठन – सभी 7 सदस्य अंग्रेज़

·         पूरे देश में विरोध – "Simon Go Back"

·         लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज, बाद में मृत्यु (अक्टूबर 1928)

2. Nehru Report (अगस्त 1928):

·         Motilal Nehru की अध्यक्षता

·         Dominion Status की मांग

·         युवा नेता असंतुष्ट – पूर्ण स्वराज चाहिए

3. Lahore Session (दिसंबर 1929):

·         Jawaharlal Nehru अध्यक्ष

·         पूर्ण स्वराज की घोषणा

·         26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय

आंदोलन की शुरुआत – दांडी मार्च:

गांधी जी का रणनीतिक चुनाव:

·         नमक को प्रतीक चुना – सभी के लिए आवश्यक

·         ब्रिटिश नमक कानून और नमक कर अन्यायपूर्ण

मार्च का विवरण:

·         12 मार्च 1930 – साबरमती आश्रम से यात्रा शुरू

·         78 स्वयंसेवकों के साथ

·         240 मील की दूरी, 24 दिन

·         6 अप्रैल 1930 – दांडी पहुंचे, समुद्री पानी से नमक बनाया

आंदोलन का प्रसार:

देशव्यापी सविनय अवज्ञा:

·         पूरे भारत में नमक कानून तोड़ा गया

·         विदेशी कपड़ों का बहिष्कार

·         शराब की दुकानों का घेराव (महिलाओं ने बड़ी भूमिका)

·         वन कानूनों की अवहेलना

·         चौकीदारी कर देने से मना

·         किसानों ने लगान न देने का आंदोलन

महिलाओं की भागीदारी:

·         पहली बार बड़े पैमाने पर

·         हज़ारों महिलाएं जुलूसों में, picketing में, गिरफ्तारियां दीं

ब्रिटिश दमन:

·         मई 1930 – गांधी जी गिरफ्तार

·         लगभग 1 लाख लोग जेल गए

·         Dharasana Salt Works पर बेरहम लाठीचार्ज

Gandhi-Irwin Pact (5 मार्च 1931):

·         आंदोलन स्थगित, राजनीतिक कैदी रिहा

·         तटीय क्षेत्रों में व्यक्तिगत नमक की अनुमति

·         Congress ने Second Round Table Conference में भाग लेना स्वीकार किया

Second Round Table Conference (सितंबर 1931):

·         गांधी जी लंदन गए – Congress के एकमात्र प्रतिनिधि

·         Conference विफल रहा

आंदोलन फिर शुरू (1932):

·         जनवरी 1932 में फिर से शुरू

·         और कठोर दमन

·         1934 में आधिकारिक रूप से वापस

परिणाम:

सकारात्मक:
✅ पहली बार महिलाओं की बड़े पैमाने पर भागीदारी

अंतर्राष्ट्रीय ध्यान – गांधी जी विश्व प्रसिद्ध

✅ ब्रिटिश सरकार को एहसास कि राज हमेशा नहीं चलेगा

✅ राष्ट्रवादी भावना और मजबूत

नकारात्मक:
❌ कुछ वर्गों (मुस्लिम, दलित) की सीमित भागीदारी
❌ Second Round Table Conference विफल
❌ पूर्ण स्वराज नहीं मिला

निष्कर्ष:
सविनय अवज्ञा आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को गंभीर चुनौती दी और स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। दांडी मार्च आज भी अहिंसक प्रतिरोध का सबसे प्रतीकात्मक उदाहरण है।


2. नमक मार्च (Salt March) को औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक प्रभावी प्रतीक क्यों माना जाता है? विस्तार से समझाइए।
(CBSE 2017, Delhi + 2019, Compartment + 2020, Outside Delhi)

उत्तर:

परिचय:
नमक मार्च (12 मार्च - 6 अप्रैल 1930) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे प्रतीकात्मक घटनाओं में से एक है। गांधी जी ने इसे सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत के लिए चुना।

नमक एक शक्तिशाली प्रतीक क्यों:

1. सार्वभौमिक आवश्यकता:

·         नमक सभी वर्गों – अमीर-गरीब के लिए आवश्यक

·         रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अनिवार्य हिस्सा

·         पूरे राष्ट्र को एकजुट कर सकता था

2. ब्रिटिश अन्याय का प्रतीक:

नमक कानून:

·         ब्रिटिश सरकार का नमक पर एकाधिकार

·         नमक बनाना या बेचना गैरकानूनी

·         नमक कर (Salt Tax) – गरीबों पर बोझ

अन्यायपूर्णता:

·         लोग समुद्र के किनारे रहते हुए भी नमक नहीं बना सकते थे

·         महंगे दामों पर सरकार से खरीदना पड़ता था

·         ब्रिटिश शासन की दमनकारी प्रकृति का स्पष्ट उदाहरण

3. व्यापक राजनीतिक मांगें:

31 जनवरी 1930 – गांधी जी का पत्र:

·         वायसराय Irwin को पत्र लिखा

·         11 मांगें प्रस्तुत कीं

·         सभी वर्गों के मुद्दे शामिल:

o    नमक कर खत्म करना

o    भूमि राजस्व में कमी

o    सैन्य खर्च में कटौती

o    रुपये-पाउंड विनिमय दर

o    विदेशी कपड़ों पर सुरक्षात्मक शुल्क

4. रणनीतिक चतुराई:

गांधी जी की सूझबूझ:

·         साधारण लगने वाला मुद्दा, लेकिन गहरा राजनीतिक संदेश

·         ब्रिटिश सरकार इसे हल्के में ले सकती थी – लेकिन बाद में समझा कि यह कितना शक्तिशाली था

·         अहिंसक तरीके से कानून तोड़ना – moral high ground

5. मार्च का नाटकीय प्रभाव:

यात्रा का विवरण:

·         240 मील की पैदल यात्रा – 24 दिन

·         रास्ते में हज़ारों लोग शामिल हुए

·         हर गांव में भाषण, जागरूकता

·         मीडिया की व्यापक कवरेज

6 अप्रैल 1930 – चरम क्षण:

·         गांधी जी ने समुद्री पानी उबालकर नमक बनाया

·         प्रतीकात्मक विरोध – कानून की अवहेलना

·         पूरी दुनिया देख रही थी

6. अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव:

विश्व स्तर पर ध्यान:

·         यूरोपीय और अमेरिकी प्रेस ने व्यापक कवरेज दी

·         नमक मार्च ने पहली बार गांधी जी को विश्व स्तर पर प्रसिद्ध किया

·         ब्रिटिश साम्राज्यवाद की आलोचना बढ़ी

·         अन्य उपनिवेशों के लिए प्रेरणा

7. महिलाओं की भागीदारी:

·         नमक मार्च पहली राष्ट्रीय गतिविधि थी जिसमें महिलाओं ने बड़े पैमाने पर भाग लिया

·         सामाजिक बाधाएं टूटीं

·         महिलाओं ने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई

8. ब्रिटिश शासन को चुनौती:

·         नमक मार्च ने ब्रिटिश सरकार को यह एहसास करवाया कि उनका राज हमेशा नहीं चलेगा

·         सत्ता में भारतीयों को हिस्सेदारी देनी होगी

·         Gandhi-Irwin Pact इसी का परिणाम था

निष्कर्ष:
नमक मार्च एक साधारण कार्य (नमक बनाना) को असाधारण राजनीतिक प्रतीक में बदल गया। इसने दिखाया कि साधारण लोग भी अन्यायपूर्ण कानूनों का अहिंसक विरोध कर सकते हैं। यह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ नैतिक विरोध का सबसे शक्तिशाली उदाहरण बन गया।


3. सविनय अवज्ञा आंदोलन की सीमाओं का विस्तृत विवरण दीजिए। किन सामाजिक समूहों ने सीमित भागीदारी की और क्यों?
(CBSE 2018, Delhi + 2020, All India + 2021, Term-2)

उत्तर:

परिचय:
हालांकि सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) एक व्यापक जन-आंदोलन था, लेकिन कुछ सामाजिक समूहों ने सीमित या न के बराबर भागीदारी की। यह आंदोलन की महत्वपूर्ण सीमाएं थीं।

1. मुस्लिम समुदाय की सीमित भागीदारी:

कारण:

a) खिलाफत आंदोलन की विफलता:

·         1924 में तुर्की ने खुद खलीफा पद खत्म किया

·         हिंदू-मुस्लिम एकता (1920-22 का golden period) टूट गई

b) सांप्रदायिक दंगे (1920s):

·         कई शहरों में हिंदू-मुस्लिम दंगे

·         आपसी अविश्वास बढ़ा

c) अलग राजनीतिक मुद्दे:

·         Muslim League की मांगें Congress से अलग

·         पृथक निर्वाचन (separate electorates) और सुरक्षा के मुद्दे

·         मुस्लिम बहुल प्रांतों में स्वायत्तता की मांग

d) Congress का रुख:

·         कई मुस्लिम नेताओं को लगा कि Congress हिंदू हितों का प्रतिनिधित्व करती है

·         Congress में ऊंची जाति के हिंदुओं का प्रभुत्व

परिणाम:

·         असहयोग आंदोलन (1920-22) की तुलना में बहुत कम मुसलमान शामिल हुए

·         सांप्रदायिक दूरी बढ़ी

2. दलित वर्ग (Depressed Classes) की सीमित भागीदारी:

Dr. BR Ambedkar की भूमिका:

·         दलितों के सबसे बड़े नेता

·         समाज में सबसे शोषित वर्ग – अस्पृश्यता, सामाजिक भेदभाव

समस्याएं:

a) Congress में ऊंची जाति का प्रभुत्व:

·         Congress नेतृत्व मुख्यतः ऊंची जातियों से

·         ज़मीनी स्तर पर भेदभाव जारी रहा

·         दलितों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व और सत्ता में हिस्सेदारी नहीं मिली

b) मुख्य मुद्दे नहीं उठे:

·         दलितों की असली समस्याएं:

o    जाति व्यवस्था का उन्मूलन

o    अस्पृश्यता खत्म करना

o    ज़मीन का पुनर्वितरण

o    मंदिर प्रवेश, कुओं से पानी लेने का अधिकार

·         Congress ने इन मुद्दों को पूरी तरह नहीं उठाया – secondary रहे

c) गांधी जी का प्रयास – लेकिन सीमाएं:

·         गांधी जी ने दलितों को "हरिजन" (ईश्वर की संतान) कहा

·         मंदिर प्रवेश आंदोलन चलाया

·         अछूतपन के खिलाफ अभियान

·         लेकिन: जाति व्यवस्था की जड़ों पर प्रहार नहीं

d) Ambedkar की मांग – Separate Electorates:

·         Ambedkar ने मांग की: दलितों के लिए अलग निर्वाचन मंडल

·         ताकि वे अपने प्रतिनिधि खुद चुन सकें

·         गांधी जी ने विरोध किया, आमरण अनशन शुरू किया

·         Poona Pact (1932): आरक्षित सीटें (reserved seats) लेकिन संयुक्त निर्वाचन

·         दलितों को लगा उनकी पूर्ण स्वायत्तता नहीं मिली

परिणाम:

·         दलितों को आशंका कि Congress उनकी मुख्य समस्याओं को ignore कर रही है

·         सीमित भागीदारी

3. व्यापारी/उद्योगपति वर्ग:

शुरुआती समर्थन (1930-31):

·         व्यापारियों ने आर्थिक समर्थन किया

·         विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

·         स्वदेशी को बढ़ावा

समर्थन वापसी (1932 के बाद):

कारण:

a) संपत्ति के अधिकारों की चिंता:

·         ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांतिकारी मांगें उठने लगीं

·         ज़मीन का पुनर्वितरण, बेगार खत्म

·         व्यापारियों को डर था कि आंदोलन समाजवादी रुख ले सकता है

·         उनकी संपत्ति और व्यवसाय को खतरा

b) व्यापार में नुकसान:

·         लंबे आंदोलन से कारोबार प्रभावित

·         बार-बार हड़तालें, बंद, picketing

·         आर्थिक नुकसान

c) समझौता बेहतर:

·         कुछ व्यापारियों ने सोचा कि ब्रिटिश सरकार से बातचीत बेहतर परिणाम दे सकती है

परिणाम:

·         दूसरे चरण (1932-34) में व्यापारी वर्ग का समर्थन काफी कम रहा

4. किसान वर्ग – विभाजित भागीदारी:

a) अमीर किसान (Rich Peasants):

मांग: लगान में कमी, राजस्व कम

समस्या:

·         शुरुआत में सक्रिय भागीदारी

·         लेकिन जब आंदोलन फिर शुरू हुआ (1932), सरकार ने लगान घटाने से साफ मना किया

·         अमीर किसान निराश हुए

·         आंदोलन से अलग हो गए

b) गरीब किसान (Poor Peasants):

मांग: ज़मीन का पुनर्वितरण, बेगार खत्म, ज़मींदारी प्रथा खत्म

समस्या:

·         Congress ने इतनी क्रांतिकारी मांगें नहीं उठाईं

·         गरीब किसानों को लगा उनके मुद्दे ignore हो रहे हैं

·         Congress धनी किसानों और ज़मींदारों को नाराज़ नहीं करना चाहती थी

परिणाम:

·         किसान वर्ग में असंतोष

·         गरीब किसानों की सीमित भागीदारी

सारांश तालिका:

समूह

भागीदारी

मुख्य कारण

मुस्लिम

बहुत सीमित

खिलाफत विफलता, सांप्रदायिक दंगे, अलग मुद्दे, separate electorates

दलित

सीमित

ऊंची जाति प्रभुत्व, जाति व्यवस्था मुद्दा नहीं, separate electorates विवाद

व्यापारी

शुरू में हां, बाद में नहीं

संपत्ति अधिकार चिंता, व्यापार नुकसान, समाजवाद का डर

अमीर किसान

शुरू में हां, बाद में नहीं

सरकार ने लगान कम नहीं किया

गरीब किसान

सीमित

ज़मीन पुनर्वितरण जैसे क्रांतिकारी मुद्दे नहीं उठे

निष्कर्ष:
सविनय अवज्ञा आंदोलन की ये सीमाएं दिखाती हैं कि भारतीय समाज की जटिलता को एक राजनीतिक कार्यक्रम में समेटना मुश्किल था। Congress को राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए विभिन्न वर्गों के बीच संतुलन बनाना पड़ता था, लेकिन इसका नतीजा यह हुआ कि कुछ वर्गों की मुख्य मांगें पीछे रह गईं। फिर भी, यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक चरण था।


निष्कर्ष

सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक चरण था। दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह ने दुनिया का ध्यान खींचा और ब्रिटिश शासन की अनैतिकता को उजागर किया। पूर्ण स्वराज की मांग ने स्पष्ट कर दिया कि भारतीय अब Dominion Status से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि आंदोलन की कुछ सीमाएं थीं – विशेषकर मुस्लिम, दलित और अन्य वर्गों की सीमित भागीदारी – फिर भी यह एक व्यापक जन-आंदोलन था जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। Gandhi-Irwin Pact और Second Round Table Conference की विफलता ने दिखाया कि ब्रिटिश सरकार वास्तविक सत्ता हस्तांतरण के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन आंदोलन ने भारतीयों में आत्मविश्वास और एकता की भावना मजबूत की।


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