शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 8: जीव जनन कैसे करते हैं - सम्पूर्ण नोट्स, MCQ और प्रश्न उत्तर

जीव जनन कैसे करते हैं

परिचय:

क्या आपने कभी सोचा है कि आम का पेड़ हर साल आम कैसे देता है? बिल्ली के बच्चे अपनी माँ से इतने समान क्यों दिखते हैं? या फिर एक छोटा सा बीज कैसे विशाल वृक्ष बन जाता है? इन सभी प्रश्नों का उत्तर जनन (Reproduction) में छिपा है

जनन जीवन की सबसे मौलिक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया हैयह वह क्रियाविधि है जिसके द्वारा जीव अपने जैसी नई संतानें उत्पन्न करते हैं और अपनी प्रजाति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखते हैंयदि जनन हो, तो कोई भी प्रजाति कुछ समय में ही विलुप्त हो जाएगीजनन के माध्यम से ही जीवन का निरंतर प्रवाह बना रहता है और विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ती है

CBSE कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 7 "जीव जनन कैसे करते हैं" अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है जिससे बोर्ड परीक्षा में 10-12 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं

इस अध्याय में हम समझेंगे कि जीव दो मुख्य तरीकों से जनन करते हैं: अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) और लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)हम देखेंगे कि सरल एककोशिकीय जीवों से लेकर जटिल बहुकोशिकीय पौधों और जंतुओं तकसभी में जनन कैसे होता हैविशेष रूप से हम पुष्पी पौधों और मनुष्यों में जनन की प्रक्रिया का विस्तार से अध्ययन करेंगे

जनन केवल संतानोत्पत्ति तक सीमित नहीं हैयह आनुवंशिक विविधता (genetic variation) का भी स्रोत है जो विकास के लिए आवश्यक हैलैंगिक जनन में दो जनकों से आनुवंशिक सामग्री मिलने से संतान में नए लक्षणों का संयोजन होता है, जो प्रजाति को बदलते वातावरण में जीवित रहने में मदद करता है

आइए इस रोचक अध्याय की यात्रा शुरू करें और समझें कि प्रकृति ने जीवन को निरंतर बनाए रखने के लिए कितने अद्भुत तरीके विकसित किए हैं

 

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 8: जीव जनन कैसे करते हैं - सम्पूर्ण नोट्स, MCQ और प्रश्न उत्तर


जनन क्या है और क्यों आवश्यक है?

जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने समान नए जीव उत्पन्न करते हैंयह जीवों की एक मूलभूत विशेषता है जो उन्हें निर्जीव वस्तुओं से अलग करती है

जनन की आवश्यकता:

प्रजाति की निरंतरता: प्रत्येक जीव का जीवनकाल सीमित होता हैजनन के माध्यम से नई पीढ़ियाँ उत्पन्न होती हैं, जिससे प्रजाति का अस्तित्व बना रहता है

जनसंख्या का संतुलन: जनन से जीवों की संख्या बनी रहती हैयदि किसी प्रजाति में जनन हो, तो वह शीघ्र ही विलुप्त हो जाएगी

आनुवंशिक सामग्री का संचरण: जनन के माध्यम से DNA एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होता है, जिससे जनकों के लक्षण संतानों में आते हैं

विविधता और विकास: विशेषकर लैंगिक जनन में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है, जो प्राकृतिक चयन और विकास के लिए आवश्यक है

"Inter-War Economy (1919-1939): Great Depression से Bretton Woods तक"


जनन के प्रकार

जीवों में जनन मुख्यतः दो प्रकार का होता है:

अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): इसमें केवल एक जनक की आवश्यकता होती हैयुग्मक (gametes) नहीं बनतेसंतान जनक की आनुवंशिक प्रतिलिपि (clone) होती है

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction): इसमें दो जनकों (नर और मादा) की आवश्यकता होती हैविशेष जनन कोशिकाएँयुग्मक (नर युग्मक और मादा युग्मक)—बनते हैं जो संलयन (fertilization) करके नए जीव को जन्म देते हैंसंतान में दोनों जनकों के लक्षणों का संयोजन होता है


अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)

अलैंगिक जनन सरल और तीव्र प्रक्रिया हैइसमें विशेष जनन अंगों या युग्मकों की आवश्यकता नहीं होतीयह मुख्यतः एककोशिकीय जीवों, कुछ बहुकोशिकीय जीवों और पौधों में पाया जाता है

विखंडन (Fission)

यह एककोशिकीय जीवों में पाया जाने वाला सबसे सरल जनन तरीका है

द्विखंडन (Binary Fission): इसमें एक कोशिका दो बराबर भागों में विभाजित हो जाती हैपहले केंद्रक विभाजित होता है, फिर कोशिकाद्रव्य विभाजित होकर दो संतति कोशिकाएँ बनाता है

उदाहरण: अमीबा, पैरामीशियम, बैक्टीरिया

अमीबा में द्विखंडन: अमीबा में यह किसी भी दिशा में हो सकता है क्योंकि इसका आकार अनियमित होता हैपहले केंद्रक लंबा होकर दो भागों में बँट जाता हैफिर कोशिकाद्रव्य संकुचित होकर बीच से दो भागों में बँट जाता है, जिससे दो छोटे अमीबा बनते हैं जो धीरे-धीरे बढ़कर पूर्ण आकार के हो जाते हैं

बहुखंडन (Multiple Fission): प्रतिकूल परिस्थितियों में कुछ एककोशिकीय जीव अपने चारों ओर एक सुरक्षात्मक आवरण (cyst) बना लेते हैंइस आवरण के अंदर केंद्रक कई बार विभाजित होता है और अनेक संतति केंद्रक बनाता हैफिर कोशिकाद्रव्य भी विभाजित होकर अनेक छोटी कोशिकाएँ बनाता हैजब परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं, तो आवरण फट जाता है और सभी संतति कोशिकाएँ बाहर आकर स्वतंत्र जीवन जीने लगती हैं

उदाहरण: प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)।

मुकुलन (Budding)

इस विधि में जनक के शरीर पर एक छोटा उभार या मुकुल (bud) बनता हैयह मुकुल धीरे-धीरे बढ़ता है और एक छोटे जीव का रूप ले लेता हैकुछ समय बाद यह मुकुल मातृ शरीर से अलग हो जाता है और स्वतंत्र जीवन जीने लगता हैकभी-कभी मुकुल जुड़ा ही रहता है और एक colony बना लेता है

उदाहरण:

यीस्ट (Yeast): यह एककोशिकीय कवक है जिसमें अनुकूल परिस्थितियों में तेजी से मुकुलन होता हैएक कोशिका पर एक या अधिक मुकुल बन सकते हैं

हाइड्रा (Hydra): यह एक बहुकोशिकीय जलीय जंतु हैइसके शरीर के किनारे पर एक मुकुल बनता है जिसमें धीरे-धीरे तंबू (tentacles) विकसित होते हैंपूर्ण विकसित होने पर यह मुकुल अलग होकर नया हाइड्रा बन जाता है

बीजाणु निर्माण (Spore Formation)

कुछ जीव विशेष प्रकार की जनन कोशिकाएँ बनाते हैं जिन्हें बीजाणु (Spores) कहते हैंये बीजाणु बहुत छोटे, हल्के और मजबूत आवरण से ढके होते हैंये हवा, जल या अन्य माध्यमों से दूर-दूर तक फैल सकते हैं और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैंअनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर बीजाणु अंकुरित होकर नया जीव बनाता है

उदाहरण:

राइजोपस (Rhizopus - ब्रेड मोल्ड): इसमें विशेष संरचनाएँबीजाणुधानी (sporangium)—बनती हैं जो लंबे तंतुओं पर स्थित होती हैंएक बीजाणुधानी में हजारों बीजाणु होते हैंपरिपक्व होने पर बीजाणुधानी फट जाती है और बीजाणु हवा में फैल जाते हैंये बीजाणु जहाँ भी उचित नमी और पोषण पाते हैं, वहाँ अंकुरित होकर नया राइजोपस बना लेते हैं

फर्न (Ferns), मॉस (Mosses), कवक (Fungi): ये सभी बीजाणु निर्माण द्वारा जनन करते हैं

कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)

पौधों में जड़, तना या पत्ती जैसे कायिक भागों से नए पौधे उत्पन्न होने की प्रक्रिया को कायिक प्रवर्धन कहते हैंयह एक प्रकार का अलैंगिक जनन है

प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन:

जड़ों द्वारा: शकरकंद, डहेलिया में जड़ों पर कलिकाएँ बनती हैं जो नए पौधे बनाती हैं

तने द्वारा:

·       भूमिगत तना: आलू (कंद - tuber), अदरक (प्रकंद - rhizome), प्याज (शल्ककंद - bulb) में भूमिगत तने पर कलिकाएँ होती हैं जो नए पौधे बनाती हैं

·       भूस्तारी (Runners): घास, स्ट्रॉबेरी में तने जमीन पर फैलते हैं और नोड्स पर जड़ें निकालकर नए पौधे बनाते हैं

पत्तियों द्वारा: ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा) की पत्तियों के किनारों पर छोटे-छोटे पौधे (plantlets) बनते हैंये पत्ती से गिरकर जमीन में जड़ें जमा लेते हैं

कृत्रिम कायिक प्रवर्धन (मनुष्य द्वारा):

कलम (Cutting): गुलाब, गन्ना, बोगनवेलिया में तने का एक भाग काटकर मिट्टी में लगा दिया जाता हैयह जड़ें निकालकर नया पौधा बन जाता है

दाब लगाना (Layering): तने की एक शाखा को मिट्टी में दबा दिया जाता है जबकि वह मातृ पौधे से जुड़ी रहती हैजड़ें निकलने पर इसे काटकर अलग कर दिया जाता है

रोपण (Grafting): दो पौधों के भागों को जोड़ा जाता हैएक भाग (stock) जड़ प्रदान करता है और दूसरा (scion) तना और फल देता हैयह विधि आम, संतरा, गुलाब आदि में उपयोग होती है

ऊतक संवर्धन (Tissue Culture): पौधे के किसी भाग की कोशिकाओं को प्रयोगशाला में विशेष पोषक माध्यम पर उगाया जाता हैएक छोटे से ऊतक से हजारों पौधे तैयार किए जा सकते हैंयह विधि ऑर्किड, सजावटी पौधों और केला जैसे फलों में उपयोग होती है

कायिक प्रवर्धन के लाभ:

·       तेज और आसान विधि

·       जनक के समान गुणों वाले पौधे मिलते हैं

·       बीज रहित पौधे (जैसे केला, अंगूर की कुछ किस्में) इसी विधि से उगाए जाते हैं

·       फल तेजी से (2-3 वर्ष में) मिलने लगते हैं

कायिक प्रवर्धन की हानियाँ:

·       आनुवंशिक विविधता नहीं आती

·       रोग एक पीढ़ी से दूसरी में चले जाते हैं

·       नए वातावरण में अनुकूलन की क्षमता कम होती है

पुनरुद्भवन (Regeneration)

कुछ जीवों में शरीर का कटा हुआ भाग पुनः विकसित हो सकता हैयदि जीव कई टुकड़ों में कट जाए, तो प्रत्येक टुकड़ा एक पूर्ण जीव बन सकता है

उदाहरण:

प्लेनेरिया (Planaria): यदि इसे काटा जाए तो प्रत्येक टुकड़ा पुनरुद्भवन द्वारा पूर्ण जीव बन जाता है

हाइड्रा: यदि इसे टुकड़ों में काट दिया जाए तो प्रत्येक टुकड़ा एक नया हाइड्रा बन सकता है

पुनरुद्भवन की क्रियाविधि: इन जीवों में विशेष कोशिकाएँ होती हैं जो तीव्र गति से विभाजित होकर बड़े समूह (mass) बना लेती हैंफिर ये कोशिकाएँ विभेदित होकर विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में बदल जाती हैं और विभिन्न अंग बना लेती हैं

कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय: नियंत्रण एवं समन्वय


लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)

लैंगिक जनन अधिक जटिल प्रक्रिया है जिसमें दो जनकों की आवश्यकता होती हैइसमें विशेष कोशिकाएँयुग्मक (Gametes)बनते हैं

युग्मकों के प्रकार:

·       नर युग्मक (Male Gamete): सामान्यतः छोटा और गतिशील

·       मादा युग्मक (Female Gamete): सामान्यतः बड़ा और अगतिशील, पोषक पदार्थों से भरपूर

निषेचन (Fertilization): नर और मादा युग्मकों के संलयन की प्रक्रिया को निषेचन कहते हैंइससे युग्मनज (Zygote) बनता है जो दोनों जनकों से गुणसूत्र प्राप्त करता हैयुग्मनज विभाजित होकर भ्रूण (embryo) बनाता है जो धीरे-धीरे विकसित होकर नया जीव बन जाता है

लैंगिक जनन के लाभ:

·       आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है

·       नए लक्षणों का संयोजन होता है

·       प्रजाति में विकास और अनुकूलन की क्षमता बढ़ती है

·       प्राकृतिक चयन के लिए सामग्री मिलती है

लैंगिक जनन की हानियाँ:

·       धीमी प्रक्रिया

·       दो जनकों की आवश्यकता

·       अधिक ऊर्जा खर्च होती है


पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन

पुष्पी पौधों (Angiosperms) में पुष्प जनन अंग होता हैपुष्प में नर और मादा दोनों जनन अंग हो सकते हैं (उभयलिंगी पुष्प) या केवल एक (एकलिंगी पुष्प)।

पुष्प की संरचना

एक पूर्ण पुष्प में चार मुख्य चक्र होते हैं:

बाह्यदल (Sepals): सबसे बाहरी चक्र, हरे रंग के, कली अवस्था में पुष्प की रक्षा करते हैंसभी बाह्यदलों को मिलाकर बाह्यदल पुंज (Calyx) कहते हैं

पंखुड़ियाँ (Petals): रंगीन और आकर्षक, कीटों और परागणकर्ताओं को आकर्षित करती हैंसभी पंखुड़ियों को मिलाकर दल पुंज (Corolla) कहते हैं

पुंकेसर (Stamens) - नर जनन अंग:

·       पुंतंतु (Filament): लंबा धागेनुमा भाग

·       परागकोश (Anther): ऊपरी फूला हुआ भाग जिसमें परागकण (Pollen grains) बनते हैंपरागकण में नर युग्मक होते हैं

स्त्रीकेसर (Carpel/Pistil) - मादा जनन अंग:

·       वर्तिकाग्र (Stigma): ऊपरी चिपचिपा भाग जो परागकणों को पकड़ता है

·       वर्तिका (Style): बीच का लंबा भाग

·       अंडाशय (Ovary): निचला फूला हुआ भाग जिसमें बीजांड (Ovules) होते हैंबीजांड में मादा युग्मक (अंडाणु) होता है

परागण (Pollination)

परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण परागण कहलाता है

स्व-परागण (Self-Pollination): जब एक पुष्प के परागकण उसी पुष्प या उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं

पर-परागण (Cross-Pollination): जब एक पुष्प के परागकण दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैंयह अधिक लाभदायक है क्योंकि इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है

परागण के माध्यम:

·       कीट परागण: रंगीन पंखुड़ियाँ, मधु, सुगंध से कीट आकर्षित होते हैं

·       वायु परागण: हल्के, शुष्क परागकण, लंबे पुंकेसर, पंखदार वर्तिकाग्र

·       जल परागण: जलीय पौधों में

·       पक्षी परागण: बड़े, चमकीले, अधिक मधुयुक्त पुष्प

निषेचन (Fertilization)

परागण के बाद परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है और एक लंबी परागनली (Pollen tube) बनाता हैयह नली वर्तिका से होती हुई अंडाशय में प्रवेश करती है और बीजांड तक पहुँचती हैपरागनली के अंदर से दो नर युग्मक बीजांड में प्रवेश करते हैं

द्विनिषेचन (Double Fertilization): यह पुष्पी पौधों की विशेषता है

·       एक नर युग्मक अंडाणु (मादा युग्मक) से संलयित होकर युग्मनज (2n) बनाता है, जो भ्रूण में विकसित होगा

·       दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केंद्रक से संलयित होकर भ्रूणपोष (Endosperm - 3n) बनाता है, जो भोजन संचय करता है

फल और बीज निर्माण

निषेचन के बाद:

·       बीजांड बीज (Seed) में बदलता है

·       अंडाशय फल (Fruit) में बदलता है

·       बीज में भ्रूण और भ्रूणपोष (संचित भोजन) होता है

·       फल बीज की सुरक्षा करता है और उनके प्रकीर्णन (dispersal) में मदद करता है

बीज प्रकीर्णन के माध्यम:

·       हवा: हल्के, पंखयुक्त (डैंडेलियन), रोमयुक्त (सूरजमुखी)

·       जल: तैरने वाले (नारियल)

·       जंतु: चिपचिपे, काँटेदार (जंगली गाजर), रसीले फल (आम, जामुन)

·       विस्फोट: फलियाँ फटकर बीज दूर फेंकती हैं (मटर, अरहर)

कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय: जैव प्रक्रम (Life Processes) 


मनुष्यों में लैंगिक जनन

मनुष्य में लैंगिक जनन यौवनारंभ (Puberty) के बाद शुरू होता हैयौवनारंभ वह अवस्था है (लड़कों में 13-14 वर्ष, लड़कियों में 11-12 वर्ष) जब शरीर में हार्मोनल परिवर्तनों के कारण जनन क्षमता विकसित होती है और द्वितीयक लैंगिक लक्षण प्रकट होते हैं

नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)

वृषण (Testes - एकवचन Testis): एक जोड़ी अंडाकार ग्रंथियाँ जो शरीर के बाहर वृषणकोष (Scrotum) नामक थैली में स्थित होती हैंयहाँ तापमान शरीर के तापमान से 2-3°C कम होता है जो शुक्राणु निर्माण के लिए आवश्यक है

कार्य:

·       शुक्राणु (Sperms) का निर्माणयौवनारंभ से मृत्युपर्यंत निरंतर

·       टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) हार्मोन का स्रावण

शुक्रवाहिनी (Vas deferens): नली जो शुक्राणुओं को वृषण से मूत्रमार्ग तक ले जाती है

सहायक ग्रंथियाँ: प्रोस्टेट ग्रंथि और शुक्राशय (seminal vesicles) द्रव स्रावित करती हैं जो शुक्राणुओं को पोषण देता है और उन्हें गति के लिए माध्यम प्रदान करता हैशुक्राणु + द्रव = वीर्य (Semen)

शिश्न (Penis): मूत्र और वीर्य को शरीर से बाहर निकालने वाला अंग

मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)

अंडाशय (Ovaries): एक जोड़ी अंडाकार ग्रंथियाँ जो उदर गुहा में स्थित होती हैं

कार्य:

·       अंडाणु (Ova - एकवचन Ovum) का निर्माणजन्म के समय से ही सभी अपरिपक्व अंडाणु मौजूद होते हैं; यौवनारंभ से प्रति माह एक परिपक्व होता है

·       एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्रावण

फैलोपियन नलिका/डिंबवाहिनी (Fallopian tubes/Oviducts): अंडाशय से गर्भाशय तक जाने वाली एक जोड़ी नलिकाएँयहीं पर सामान्यतः निषेचन होता है

गर्भाशय (Uterus): मांसल, थैलीनुमा अंग जहाँ भ्रूण का विकास होता हैइसकी दीवार मोटी और रक्त वाहिकाओं से भरपूर होती है

योनि (Vagina): गर्भाशय को शरीर के बाहर से जोड़ने वाली नली

निषेचन और गर्भधारण

अंडोत्सर्ग (Ovulation): प्रति माह एक परिपक्व अंडाणु अंडाशय से मुक्त होता है और फैलोपियन नलिका में आता है

संभोग (Copulation): शुक्राणु मादा जननांग में पहुँचते हैं और फैलोपियन नलिका की ओर तैरते हैं

निषेचन: यदि अंडाणु उपस्थित हो तो एक शुक्राणु अंडाणु में प्रवेश कर उससे संलयित होता है और युग्मनज बनता हैयह प्रक्रिया फैलोपियन नलिका में होती है

आरोपण (Implantation): युग्मनज विभाजित होते हुए गर्भाशय की ओर बढ़ता है और लगभग एक सप्ताह में कोरक (Blastocyst) के रूप में गर्भाशय की दीवार में स्थापित (implant) हो जाता हैयहीं से गर्भावस्था (Pregnancy) शुरू होती है

भ्रूण का विकास:

·       युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) बनाता है

·       8वें सप्ताह के बाद भ्रूण को गर्भ (Foetus) कहते हैं

·       अपरा/प्लेसेंटा (Placenta): विशेष संरचना जो भ्रूण और माँ के रक्त को जोड़ती हैइसके माध्यम से भ्रूण को ऑक्सीजन और पोषण मिलता है तथा अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकलते हैं

·       लगभग 9 महीने (280 दिन) में गर्भ पूर्ण विकसित हो जाता है

प्रसव (Birth/Parturition): गर्भाशय की मांसपेशियाँ लयबद्ध संकुचन करती हैं और शिशु योनि मार्ग से बाहर आता है

मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle)

यौवनारंभ से रजोनिवृत्ति (45-50 वर्ष) तक मादाओं में प्रति 28-30 दिन में होने वाला चक्र

चरण:

1.     रजस्राव (Menstruation - दिन 1-5): गर्भाशय की भीतरी परत टूटकर रक्त स्राव के रूप में बाहर निकलती है

2.     फॉलिक्युलर चरण (दिन 6-13): नई परत बनना शुरू होती है, अंडाशय में अंडाणु परिपक्व होता है

3.     अंडोत्सर्ग (दिन 14): परिपक्व अंडाणु अंडाशय से मुक्त होता है

4.     ल्यूटियल चरण (दिन 15-28): गर्भाशय की परत और मोटी होती है, रक्त वाहिकाओं से भरपूर होती है

यदि निषेचन हो तो यह परत फिर से टूटती है और मासिक धर्म शुरू होता हैयदि निषेचन हो जाए तो यह परत बनी रहती है और गर्भावस्था शुरू होती है

CHAPTER 3! The Making of a Global World – Part 1: पूर्व-आधुनिक विश्व – The Pre-Modern World.


जनन स्वास्थ्य

यौन संचारित रोग (STDs): जो रोग यौन संपर्क से फैलते हैंजैसे सिफलिस, गोनोरिया, HIV/AIDS। बचाव: सुरक्षित यौन संबंध, एक साथी के प्रति वफादारी, स्वच्छता

गर्भनिरोध (Contraception): अवांछित गर्भ को रोकने के उपाय

विधियाँ:

·       अवरोधक: कंडोम (बीमारी से भी बचाव), डायाफ्राम

·       रासायनिक: गर्भनिरोधक गोलियाँ (हार्मोनल)

·       अंतर्गर्भाशयी युक्ति (IUD): कॉपर-T

·       शल्य: पुरुष नसबंदी, महिला नसबंदी

गर्भपात: चिकित्सकीय कारणों से या अनचाहे गर्भ को समाप्त करनाभारत में लिंग चयन के लिए गर्भपात कानूनन अपराध है (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act - PCPNDT Act)।

कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds).


📝 MCQs (PYQ)

प्रश्न 1: अलैंगिक जनन की विधि नहीं है
(
) द्विखंडन
(
) मुकुलन
(
) निषेचन
(
) बीजाणु निर्माण
उत्तर: () निषेचन

 

प्रश्न 2: अमीबा में जनन होता है
(
) बहुखंडन द्वारा
(
) द्विखंडन द्वारा
(
) मुकुलन द्वारा
(
) बीजाणु निर्माण द्वारा
उत्तर: () द्विखंडन द्वारा

 

प्रश्न 3: निम्नलिखित में से कौन सा पौधा पत्तियों से नया पौधा बना सकता है?
() गुलाब
(
) ब्रायोफिलम
(
) आलू
(
) अदरक
उत्तर: () ब्रायोफिलम

 

प्रश्न 4: पुष्प का नर जनन अंग है
() वर्तिकाग्र
(
) पुंकेसर
(
) अंडाशय
(
) वर्तिका
उत्तर: () पुंकेसर

 

प्रश्न 5: परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण कहलाता है
() निषेचन
(
) परागण
(
) अंकुरण
(
) बीजांकुरण
उत्तर: () परागण

 

प्रश्न 6: निषेचन के बाद बीजांड परिवर्तित होता है
() फल में
(
) बीज में
(
) परागकण में
(
) भ्रूणपोष में
उत्तर: () बीज में

 

प्रश्न 7: मनुष्य में निषेचन होता है
() अंडाशय में
(
) गर्भाशय में
(
) फैलोपियन नलिका में
(
) योनि में
उत्तर: () फैलोपियन नलिका में

 

प्रश्न 8: नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का स्रावण होता है
() वृषण से
(
) अंडाशय से
(
) गर्भाशय से
(
) प्रोस्टेट ग्रंथि से
उत्तर: () वृषण से

 

प्रश्न 9: मादा में अंडोत्सर्ग (Ovulation) होता है
() प्रतिदिन
(
) प्रति सप्ताह
(
) प्रति माह (लगभग 28 दिन में एक बार)
(
) प्रति वर्ष
उत्तर: () प्रति माह (लगभग 28 दिन में एक बार)

 

प्रश्न 10: द्विनिषेचन (Double Fertilization) की विशेषता है
() कवकों की
(
) जंतुओं की
(
) पुष्पी पौधों की
(
) बैक्टीरिया की
उत्तर: () पुष्पी पौधों की

 

CHAPTER 2 COMPLETE! Part 4 = सामूहिक अपनेपन की भावना  


Short Answer

प्रश्न 1: जनन क्यों आवश्यक है? कोई दो कारण लिखिए

उत्तर:
जनन निम्नलिखित कारणों से आवश्यक है:

1.     प्रजाति की निरंतरता: प्रत्येक जीव का जीवनकाल सीमित होता हैजनन के द्वारा नई संतानें उत्पन्न होती हैं जो प्रजाति को विलुप्त होने से बचाती हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी उसका अस्तित्व बनाए रखती हैं

2.     आनुवंशिक विविधता: विशेषकर लैंगिक जनन में दो जनकों से आनुवंशिक सामग्री मिलने से संतान में नए लक्षणों का संयोजन होता हैयह विविधता प्रजाति को बदलते वातावरण में अनुकूलन और विकास में सहायता करती है

प्रश्न 2: अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन में कोई तीन अंतर लिखिए। (CBSE 2020, 2019, 2017)

उत्तर:

विशेषता

अलैंगिक जनन

लैंगिक जनन

जनकों की संख्या

केवल एक जनक की आवश्यकता

दो जनकों (नर और मादा) की आवश्यकता

युग्मक निर्माण

युग्मक नहीं बनते

विशेष जनन कोशिकाएँयुग्मकबनते हैं

आनुवंशिक विविधता

संतान आनुवंशिक रूप से जनक की प्रतिलिपि होती है, कोई विविधता नहीं

संतान में दोनों जनकों के लक्षणों का संयोजन होता है, विविधता आती है

गति

तीव्र प्रक्रिया

अपेक्षाकृत धीमी प्रक्रिया

उदाहरण

द्विखंडन (अमीबा), मुकुलन (यीस्ट), बीजाणु निर्माण (राइजोपस)

मनुष्य, अधिकांश जंतु, पुष्पी पौधे

 

प्रश्न 3: कायिक प्रवर्धन क्या है? इसके दो लाभ लिखिए। (CBSE 2018)

उत्तर:

कायिक प्रवर्धन: पौधों में जड़, तना या पत्ती जैसे कायिक (vegetative) भागों से नए पौधे उत्पन्न होने की प्रक्रिया को कायिक प्रवर्धन कहते हैंयह एक प्रकार का अलैंगिक जनन है

उदाहरण: आलू (कंद), अदरक (प्रकंद), प्याज (शल्ककंद), ब्रायोफिलम (पत्ती), गन्ना (तने की कलम)।

लाभ:

1.     समान गुणों वाले पौधे: कायिक प्रवर्धन से उत्पन्न सभी पौधे आनुवंशिक रूप से मातृ पौधे के समान होते हैं, इसलिए वांछित गुणजैसे फल का स्वाद, रंग, आकारबनाए रखे जा सकते हैं

2.     तेज वृद्धि: बीज से उगाने की तुलना में कायिक प्रवर्धन से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और जल्दी फल देने लगते हैंकुछ पौधे जो बीज नहीं बनाते (जैसे केला, बीज रहित अंगूर), उन्हें केवल इसी विधि से उगाया जा सकता है

प्रश्न 4: परागण क्या है? स्व-परागण और पर-परागण में अंतर लिखिए। (CBSE 2019, 2016)

उत्तर:

परागण: परागकणों का परागकोश (anther) से वर्तिकाग्र (stigma) तक स्थानांतरण परागण कहलाता हैयह लैंगिक जनन में निषेचन से पहले की आवश्यक प्रक्रिया है

अंतर:

स्व-परागण

पर-परागण

एक पुष्प के परागकण उसी पुष्प या उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं

एक पुष्प के परागकण दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं

बाहरी माध्यम (कीट, हवा, जल) की आवश्यकता नहीं

बाहरी माध्यमकीट, हवा, पक्षी, जलकी आवश्यकता होती है

आनुवंशिक विविधता नहीं आती

आनुवंशिक विविधता आती है, स्वस्थ संतान

उदाहरण: मटर, सूरजमुखी

उदाहरण: पपीता, गुड़हल

प्रश्न 5: मासिक धर्म चक्र क्या है? इसकी अवधि कितनी होती है? (CBSE 2020)

उत्तर:

मासिक धर्म चक्र: यौवनारंभ (11-12 वर्ष) से रजोनिवृत्ति (45-50 वर्ष) तक मादाओं में प्रति माह होने वाला प्रजनन चक्र मासिक धर्म चक्र कहलाता है

अवधि: लगभग 28-30 दिन (औसतन 28 दिन)।

महत्व: यह चक्र मादा को गर्भधारण के लिए तैयार करता हैप्रत्येक चक्र में एक अंडाणु परिपक्व होता है और गर्भाशय की दीवार मोटी रक्त वाहिकाओं से भरपूर हो जाती है ताकि यदि निषेचन हो तो भ्रूण वहाँ स्थापित हो सके

रजस्राव (Menstruation): यदि निषेचन नहीं होता, तो गर्भाशय की यह मोटी परत टूटकर रक्त स्राव के रूप में योनि मार्ग से बाहर निकलती हैयह प्रक्रिया 3-5 दिन तक चलती है और इसे मासिक धर्म या रजस्राव कहते हैं


Long Answer

प्रश्न 1. Great Depression के कारणों और प्रभावों का विस्तार से वर्णन करेंभारत पर इसके प्रभाव को भी शामिल करें। (CBSE 2020, 2019)

उत्तर:

Great Depression (महामंदी) 1929-1930s:

Great Depression 20वीं सदी की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी थी जो लगभग 1929 से शुरू हुई और 1930s के मध्य तक चली

भाग A: Great Depression के कारण

1. कृषि अत्यधिक उत्पादन (Agricultural Overproduction):

·       पूर्वी यूरोप में गेहूं उत्पादन फिर से शुरू हुआ

·       अत्यधिक उत्पादन (Overproduction) से अनाज की कीमतें घटीं

·       ग्रामीण आय घटी, किसान कर्ज बढ़ा

·       खरीदारी क्षमता कम हुई

2. US विदेशी ऋण की वापसी:

·       1923-1928 में USA ने बाकी विश्व में पूंजी निर्यात किया था

·       1928 की पहली छमाही में US विदेशी ऋण $1 बिलियन से अधिक थे

·       अचानक ऋण देना बंद कर दिया

·       जो देश US वित्तपोषण पर निर्भर थे, उन्हें गंभीर संकट का सामना करना पड़ा

·       यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएं डगमगा गईं

3. Wall Street Crash (29 October 1929):

Black Tuesday - 29 अक्टूबर 1929

 New York Stock Exchange पर लगभग 16 मिलियन शेयर एक दिन में ट्रेड किए गए

  लगभग $14 बिलियन का stock मूल्य खो गया

  हजारों निवेशकों का सफाया

  Dow Jones: 381 से गिरकर 230 (8 हफ्तों में 40% गिरावट)

4. Bank Failures और Credit Crunch:

·       Stock Market संकट ने बैंक विफलता को प्रभावित किया

·       अधिक ग्राहकों ने अपनी बचत निकाली

·       बैंक बंद हुए

·       क्रेडिट की उपलब्धता समाप्त, व्यवसाय प्रभावित

5. Protectionism - Smoot-Hawley Tariff Act (1930):

·       17 जून 1930 को President Hoover ने कानून पर हस्ताक्षर किए

20,000+ आयातित सामानों पर टैरिफ बढ़ाया

  टैरिफ 50-100% और बढ़ाए - इतिहास में सबसे ऊंचे

·       अन्य देशों ने जवाबी टैरिफ लगाए

·       विश्व व्यापार में भारी गिरावट

6. Gold Standard की जड़ता:

·       देशों ने deflation (अपस्फीति) को उपाय माना

·       विस्तारवादी नीतियां नहीं अपनाई गईं

·       जर्मनी के Chancellor ने कठोर austerity - कर बढ़ाए, मजदूरी काटी

7. Deflationary Expectations:

·       लोगों को लगा कीमतें और कम होंगी

·       खरीदारी टालना - कम कीमतों का इंतजार

·       उधार लेने से अनिच्छुक

·       खर्च घटा, मांग और गिरी - दुष्चक्र

भाग B: Great Depression के वैश्विक प्रभाव

1. विनाशकारी आर्थिक गिरावट:

दुनिया के अधिकांश क्षेत्रों में उत्पादन, रोजगार, आय और व्यापार में भयानक गिरावट हुई

प्रमुख आंकड़े:

मापदंड

गिरावट (1929-32)

World GDP

-15%

World Trade (Total)

-60 to -70%

US Industrial Production

-47%

Germany Industrial Production

-47%

2. बेरोजगारी - सबसे बड़ा सामाजिक परिणाम:

देश

बेरोजगारी दर (%)

USA

26.1

Germany

21.8

France

16.2

UK

15.4

अमेरिका में 25% तक बेरोजगारी - यानी हर चौथा व्यक्ति बेरोजगार

लाखों लोग बेरोजगार, गरीबी, भूख की रेखा पर

3. Deflation (मूल्य गिरावट):

देश

Wholesale Price Index 1932 (1929=100)

USA

64

Germany

76

France

79

UK

81

·       कीमतें 20-36% तक गिर गईं

·       लेकिन आय और भी ज्यादा गिरी

भाग C: भारत पर प्रभाव

A. ग्रामीण भारत - विनाशकारी प्रभाव:

1. कृषि कीमतों में भारी गिरावट:

भारत में कृषि कीमतें 50-60% गिर गईं

  अंतर्राष्ट्रीय बाजार की गिरावट का सीधा असर

  विशेष रूप से निर्यात फसलें प्रभावित:

·       Jute (जूट): 60% गिरावट

o   Cotton (कपास), Tea (चाय), Wheat (गेहूं)

2. औपनिवेशिक शोषण जारी:

·       ब्रिटिश सरकार ने राजस्व मांगों को कम करने से इनकार

·       भारी गिरावट के बावजूद कर वसूली जारी

·       भू-राजस्व, नमक कर, अन्य कर नहीं घटे

·       किसान दोहरी मार - कम आय, उच्च कर

3. ग्रामीण ऋणग्रस्तता (Rural Indebtedness) बढ़ी:

·       कीमतें गिरीं, लेकिन कर्ज की मांग नहीं

किसान कर्ज के जाल में फंसे

·       साहूकारों से और कर्ज

·       भूमि खोने का खतरा बढ़ा

·       गरीबी और भुखमरी में वृद्धि

4. सबसे ज्यादा प्रभावित:

·       वैश्विक बाजार के लिए उत्पादन करने वाले भारतीय किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

·       बंगाल के जूट किसान

·       पंजाब के गेहूं किसान

·       महाराष्ट्र, गुजरात के कपास किसान

B. शहरी भारत - कम प्रभावित:

1. उद्योगों को संरक्षण:

·       ब्रिटिश सरकार ने उद्योगों को टैरिफ संरक्षण दिया

·       उद्योग में निवेश बढ़ाया गया

·       घरेलू उद्योग को लाभ

2. निश्चित आय वालों को फायदा:

मध्यम वर्ग वेतनभोगी कर्मचारी

  शहर में रहने वाले जमींदार

  कीमतें कम हो रही थीं, सब कुछ अधिक किफायती

·       वास्तविक आय बढ़ी (real income increased)

C. स्वतंत्रता आंदोलन से संबंध:

1. Civil Disobedience Movement (1930):

महामंदी ने ग्रामीण संकट को गहरा किया

किसान ब्रिटिश शोषण के खिलाफ और अधिक असंतुष्ट

  1930 में महात्मा गांधी ने Civil Disobedience Movement शुरू किया

ग्रामीण भारत की दुर्दशा स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत करने का कारक

2. राष्ट्रवाद का विकास:

·       आर्थिक शोषण की समझ बढ़ी

·       औपनिवेशिक नीतियों की आलोचना तेज हुई

निष्कर्ष:

Great Depression ने पूरी दुनिया को हिला दिया - World GDP -15%, US बेरोजगारी 26%, World trade -60-70% । भारत में ग्रामीण संकट सबसे गहरा था - कृषि कीमतें 50-60% गिरीं, लेकिन ब्रिटिश कर वसूली जारी रहीइस संकट ने दिखाया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी परस्पर जुड़ी है और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कितना जरूरी है

प्रश्न 2. 1925 में ब्रिटेन की Gold Standard पर वापसी के निर्णय के क्या परिणाम हुए? इस निर्णय की आलोचना क्यों हुई? (CBSE 2018, 2017)

उत्तर:

ब्रिटेन और Gold Standard (1925-1931):

पृष्ठभूमि:

प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के दौरान ब्रिटेन ने Gold Standard छोड़ दिया थायुद्ध के बाद, ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति कमजोर थी:

·       विशाल बाह्य कर्ज

·       जापान और भारत से प्रतिस्पर्धा

·       उत्पादन घटा, बेरोजगारी बढ़ी

भाग A: 1925 का निर्णय

Winston Churchill का निर्णय:

·       1925 में Winston Churchill (वित्त मंत्री) ने युद्ध-पूर्व समानता पर Gold Standard पर वापसी का निर्णय लिया

·       उद्देश्य: ब्रिटिश Pound की प्रतिष्ठा बहाल करना

·       लंदन को फिर से वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाना

John Maynard Keynes का विरोध:

·       प्रसिद्ध Economist John Maynard Keynes ने इस निर्णय का तीव्र विरोध किया

·       Keynes ने पूछा: Churchill ने "ऐसी मूर्खतापूर्ण बात क्यों की?"

·       चेतावनी दी कि Pound overvalued (अधिमूल्यित) हो जाएगा

·       लेकिन सुना नहीं गया

भाग B: Overvalued Pound के परिणाम

1. आयात सस्ता, घरेलू उद्योग प्रभावित:

·       Pound overvalued होने से आयात अपेक्षाकृत सस्ता हो गया

·       विदेशी सामान सस्ते में उपलब्ध

·       ब्रिटिश उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से नुकसान

·       नए उद्योगों के विकास में बाधा

·       घरेलू उत्पादन प्रभावित

2. निर्यात महंगा और प्रतिस्पर्धाहीन:

·       निर्यात महंगे हो गए

·       अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रिटिश सामान अप्रतिस्पर्धी

·       विश्व व्यापार में ब्रिटिश निर्यात का हिस्सा गिर रहा था

·       1925 के बाद निर्यात की मात्रा भी घटी

3. विशिष्ट उद्योगों पर प्रभाव:

A. Coal (कोयला) उद्योग:

·       अन्य जगहों पर खदानें खोली गईं

·       जल शक्ति (Hydro-power) के विकास से प्रतिस्पर्धा

·       ब्रिटिश कोयला निर्यात घटा

B. Cotton (कपास) उद्योग:

·       भारतीय घरेलू उत्पादन बढ़ा

·       सुदूर पूर्व में जापानी प्रतिस्पर्धा

·       Lancashire के कपड़ा मिलें संकट में

C. Iron, Steel, Shipbuilding:

·       युद्धकाल के अत्यधिक विस्तार से पीड़ित

·       युद्ध के बाद मांग घटी

·       Overvalued pound ने समस्या बढ़ाई

4. बेरोजगारी में भारी वृद्धि:

तुलनात्मक बेरोजगारी दर (1925-29):

देश

बेरोजगारी दर (%)

USA

7.9

France

3.8

Germany

9.2

UK

12.0

·       ब्रिटेन में 12% बेरोजगारी - सबसे ज्यादा

·       निर्यात-आधारित उद्योगों में बेरोजगारी सबसे ज्यादा

·       सामाजिक संकट

5. General Strike 1926 (आम हड़ताल):

·       4-13 मई 1926

·       खनन उद्योग में मजदूरी कटौती के प्रयास से शुरू

·       खदान मालिकों ने "lockout" किया

·       अन्य मजदूरों ने एकजुटता में general strike (आम हड़ताल) की

·       9 दिनों तक देश लगभग ठप

·       13 दिनों के बाद Trade Union Council ने हड़ताल वापस ली

·       लेकिन खनिकों की हड़ताल और चली

भाग C: आलोचना के कारण

1. गलत Valuation:

·       युद्ध-पूर्व parity पर वापसी का मतलब Pound को overvalue करना था

·       ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति युद्ध-पूर्व से कमजोर थी

·       लेकिन मुद्रा मूल्य उसी स्तर पर रखा गया

2. Deflationary Pressure:

·       Gold Standard maintain करने के लिए deflation (अपस्फीति) करना पड़ा

·       घरेलू कीमतें कम करनी पड़ीं

·       मजदूरी काटनी पड़ी

·       आर्थिक गतिविधि धीमी हुई

3. प्रतिस्पर्धाहीनता:

·       ब्रिटिश सामान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बहुत महंगे हो गए

·       निर्यात घटा, रोजगार घटा

4. Flexibility की कमी:

·       Gold Standard में devaluation (अवमूल्यन) का विकल्प नहीं

·       आर्थिक समस्याओं से निपटने में कठिनाई

·       Monetary policy पर constraint

5. सामाजिक परिणाम:

·       बेरोजगारी बढ़ी, गरीबी बढ़ी

·       General Strike 1926 - सामाजिक अशांति

·       मजदूर वर्ग का जीवन स्तर घटा

भाग D: अंतिम परिणाम - 1931 में छोड़ना

September 1931 - Gold Standard छोड़ा:

·       Great Depression के दबाव में सितंबर 1931 में Gold Standard छोड़ना पड़ा

·       Pound का Devaluation हुआ

Devaluation के लाभ:

·       ब्रिटिश निर्यात कीमतें कम हुईं

·       आयात महंगे हुए, घरेलू उद्योग को राहत

·       कीमतों की गिरावट रुकी

·       Depression mild रहा (अन्य देशों की तुलना में)

·       आर्थिक पुनर्प्राप्ति शुरू हुई

सबक:

·       Keynes सही साबित हुए

·       1925 का निर्णय वास्तव में "मूर्खतापूर्ण" था

·       Rigid exchange rates से flexibility बेहतर है

·       आर्थिक वास्तविकताओं को ignore नहीं किया जा सकता

निष्कर्ष:

ब्रिटेन की 1925 में Gold Standard पर वापसी एक आर्थिक नीति की विफलता का उदाहरण हैइसने Pound को overvalue किया, निर्यात महंगे बनाए, निर्यात-आधारित उद्योगों को नुकसान पहुंचाया, बेरोजगारी बढ़ाई (12%), और General Strike 1926 को जन्म दिया । John Maynard Keynes की चेतावनियां सही साबित हुईंअंततः 1931 में Gold Standard छोड़ना पड़ा, जिसके बाद आर्थिक स्थिति में सुधार आयायह उदाहरण दिखाता है कि आर्थिक नीतियां प्रतीक (Pound की प्रतिष्ठा) की बजाय वास्तविकताओं पर आधारित होनी चाहिए

 

प्रश्न 3. Bretton Woods Conference (1944) की पृष्ठभूमि, मुख्य निर्णयों और महत्व का विस्तार से वर्णन करें। (CBSE 2020, 2019, 2016).

उत्तर:

Bretton Woods Conference (1944) - नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का जन्म:

भाग A: पृष्ठभूमि (Background)

1. 1930s के Great Depression का सबक:

·       Great Depression (1929-1930s) ने दिखाया कि uncoordinated policies विनाशकारी हैं

·       Protectionism: Smoot-Hawley Tariff (1930) और जवाबी टैरिफ ने trade 60-70% घटाया

  Competitive Devaluation: देशों ने अपनी मुद्राओं का devaluation किया, "race to the bottom"

  Gold Standard की विफलता: Deflation और economic hardship

  परिणाम: World GDP -15%, unemployment 25%, widespread poverty

2. द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945):

·       एक और विनाशकारी युद्ध

·       यूरोप और जापान बर्बाद

·       पुनर्निर्माण की जरूरत

·       आर्थिक अराजकता से बचने की आवश्यकता

3. USA का उदय:

·       USA सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था

·       सबसे बड़ा लेनदार राष्ट्र

·       नई व्यवस्था में leadership लेने की स्थिति में

4. सहयोग की आवश्यकता:

 1930s की गलतियां दोहराने की इच्छा

  अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जरूरी

  Stability और prosperity सुनिश्चित करने का लक्ष्य

भाग B: Bretton Woods Conference (जुलाई 1944)

स्थान और समय:

·       स्थान: Bretton Woods, New Hampshire, USA

  समय: जुलाई 1944 (WWII अभी चल रहा था)

सहभागी:

·       44 संबद्ध राष्ट्र (Allied Nations)

·       प्रमुख अर्थशास्त्री शामिल

·       USA का नेतृत्व

उद्देश्य:

नई अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय व्यवस्था बनाना

  युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और विकास के लिए framework

मुद्रा स्थिरता सुनिश्चित करना

  Free trade को बढ़ावा देना

भाग C: मुख्य निर्णय (Main Decisions)

1. IMF (International Monetary Fund) की स्थापना:

स्थापना:

·       1944 में Bretton Woods में निर्णय

1945 में परिचालन शुरू

·       Headquarters: Washington D.C., USA

उद्देश्य:

मुद्रा स्थिरता (Currency Stability) को बढ़ावा देना

विनिमय दर (Exchange Rates) को स्थिर रखना

  Balance of Payment (BOP) संकट में सदस्य देशों की मदद करना

  अल्पकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करना

कैसे काम करता है:

Quota System: सदस्य देश अपनी आर्थिक शक्ति के अनुसार quota जमा करते हैं

  संकट में ऋण प्राप्त कर सकते हैं

·       Quota के अनुसार voting power

2. World Bank की स्थापना:

पूरा नाम:
International Bank for Reconstruction and Development (IBRD)

स्थापना:

·       1944 में Bretton Woods में निर्णय

1945 में परिचालन शुरू

·       Headquarters: Washington D.C., USA

उद्देश्य:

Reconstruction (पुनर्निर्माण): युद्ध-विध्वस्त यूरोप और जापान का

  Development (विकास): विकासशील देशों का आर्थिक विकास

दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए ऋण

  बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य परियोजनाओं को वित्त

3. Fixed Exchange Rate System (निश्चित विनिमय दर प्रणाली):

Dollar-Gold Link:

·       US Dollar को Gold से जोड़ा गया - $35 प्रति औंस सोना

·       USA ने प्रतिबद्धता दी कि वह $35 पर सोना खरीदेगा/बेचेगा

Other Currencies-Dollar Link:

·       अन्य सभी मुद्राओं को Dollar से जोड़ा गया

·       प्रत्येक देश ने अपनी मुद्रा का Dollar में par value निर्धारित किया

·       Example: 1 Pound Sterling = $4.03

Fixed but Adjustable:

·       विनिमय दरें fixed लेकिन adjustable

·       ±1% के भीतर fluctuation की अनुमति

·       "Fundamental disequilibrium" की स्थिति में बदलाव संभव

उद्देश्य:

मुद्रा अस्थिरता से बचना

  1930s के प्रतिस्पर्धी devaluation से बचना

·       व्यापार और निवेश में predictability

·       लेकिन पूर्ण rigidity नहीं

4. Capital Controls की अनुमति:

·       देशों को cross-border capital flows को नियंत्रित करने की अनुमति

·       Speculative capital movements से बचने के लिए

·       Domestic policy autonomy बनाए रखना

5. Free Trade को बढ़ावा:

व्यापार बाधाओं को कम करना

  Protectionism से दूर, multilateral trade की ओर

बाद में GATT (1947) की स्थापना

भाग D: Bretton Woods System का महत्व

1. तत्काल प्रभाव (1945-1970s):

A. युद्ध के बाद पुनर्निर्माण:

Marshall Plan के साथ मिलकर यूरोप का पुनर्निर्माण

  जापान का पुनर्निर्माण

  World Bank ने दीर्घकालिक वित्त प्रदान किया

B. "Golden Age" of Growth:

1950s-1960s में अभूतपूर्ण आर्थिक विकास

  Developed countries में तेज growth

  व्यापार तेजी से बढ़ा

जीवन स्तर में सुधार

C. मुद्रा स्थिरता:

·       Exchange rates स्थिर रहीं

·       Trade और investment में predictability

·       1930s जैसी currency chaos नहीं

D. विकासशील देशों को सहायता:

·       World Bank ने विकास परियोजनाओं को वित्त दिया

·       IMF ने BOP संकट में मदद की

2. दीर्घकालिक विरासत:

A. संस्थागत Framework:

·       IMF और World Bank आज भी सक्रिय और महत्वपूर्ण

·       190+ सदस्य देश

·       Global financial safety net

B. वैश्विक आर्थिक शासन:

International economic governance की नींव

  Multilateral approach की शुरुआत

  देशों के बीच economic cooperation का platform

C. Crisis Management:

·       IMF - financial crises में मदद करता है

·       1990s Asian Crisis, 2008 Global Financial Crisis में भूमिका

·       COVID-19 pandemic में भी active

D. Development Finance:

·       World Bank - विश्व का सबसे बड़ा development finance institution

·       गरीबी कम करने, बुनियादी ढांचा बनाने में योगदान

3. Bretton Woods System का अंत (1971):

Nixon Shock (15 August 1971):

·       US President Richard Nixon ने Dollar-Gold convertibility समाप्त की

·       Dollar के लिए सोना देने से इनकार

·       कारण: US gold reserves घट रहे थे, Vietnam War खर्च

परिणाम:

·       Fixed exchange rate system समाप्त

·       Floating exchange rates की शुरुआत

·       लेकिन IMF और World Bank जारी रहे

4. आज की प्रासंगिकता:

A. 2008 Global Financial Crisis:

·       Bretton Woods institutions ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

·       IMF ने कई देशों को rescue packages दिए

·       Coordination platform प्रदान किया

B. COVID-19 Pandemic:

·       IMF और World Bank ने emergency financing दी

·       विकासशील देशों को सहायता

C. Reform की मांग:

·       Emerging economies (China, India) अधिक representation चाहते हैं

·       Governance structure में सुधार की बहस

·       लेकिन मूल framework आज भी relevant

निष्कर्ष:

Bretton Woods Conference (1944) एक ऐतिहासिक मोड़ था जिसने आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की नींव रखी । IMF और World Bank की स्थापना, fixed exchange rate system, और international cooperation के सिद्धांतों ने 1930s की गलतियों से सीखते हुए एक नई शुरुआत कीहालांकि 1971 में fixed exchange rate system समाप्त हो गया, लेकिन इन संस्थाओं का महत्व आज भी बना हुआ हैवे global financial stability, crisis management, और development finance में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं । Bretton Woods की विरासत यह है कि आर्थिक समस्याओं को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से ही हल किया जा सकता है, अलगाव से नहीं


निष्कर्ष

जनन जीवन की सबसे मौलिक और अद्भुत प्रक्रिया है जो प्रजातियों की निरंतरता सुनिश्चित करती हैप्रकृति ने विभिन्न जीवों में जनन के विविध तरीके विकसित किए हैंसरल एककोशिकीय जीवों में द्विखंडन से लेकर जटिल बहुकोशिकीय जीवों में लैंगिक जनन तक

अलैंगिक जनन सरल, तेज और कम ऊर्जा खर्च वाला है, लेकिन इसमें आनुवंशिक विविधता नहीं आतीलैंगिक जनन अधिक जटिल है लेकिन यह आनुवंशिक विविधता प्रदान करता है जो विकास और अनुकूलन के लिए आवश्यक हैदोनों विधियों के अपने-अपने लाभ हैं और विभिन्न परिस्थितियों में उपयोगी हैं

पुष्पी पौधों में पुष्प एक अद्भुत जनन अंग है जिसमें परागण, निषेचन, फल और बीज निर्माण की जटिल प्रक्रियाएँ होती हैंद्विनिषेचन जैसी विशेषताएँ पुष्पी पौधों को अन्य पौधों से अलग करती हैंमनुष्यों में जनन तंत्र अत्यंत विकसित हैहार्मोनल नियंत्रण, मासिक धर्म चक्र, गर्भावस्था और प्रसवये सभी सुव्यवस्थित प्रक्रियाएँ हैं

जनन स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता अत्यंत आवश्यक हैयौन संचारित रोगों से बचाव, उचित गर्भनिरोध, और जिम्मेदार यौन व्यवहारये सभी स्वस्थ समाज के लिए जरूरी हैंलैंगिक भेदभाव और कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सामाजिक जागरूकता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है  


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